Chapter 1: नवनिर्माण
Balbharati Solutions for Hindi - Yuvakbharati 12th Standard HSC Maharashtra State Board - [Latest Edition]
कृति पूर्ण कीजिए :
कृति पूर्ण कीजिए :
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गयुक्त शब्द तैयार कर उनका अर्थपूर्णवाक्य में प्रयोग कीजिए :
उपसर्गयुक्त शब्द - अनीति।
वाक्य : अनीति के मार्ग पर नहीं चलना चाहिए।
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गयुक्त शब्द तैयार कर उनका अर्थपूर्णवाक्य में प्रयोग कीजिए :
शब्द : निर् + बल = निर्बल।
वाक्य : निर्बल को सताना नहीं चाहिए।
‘धरती से जुड़ा रहकर ही मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है’, इस विषय पर अपना मत प्रकट कीजिए ।
लक्ष्य का अर्थ है निर्धारित उद्देश्य, जिसे प्राप्त करने के लिए गंभीरता पूर्वक नजर रखी जाए और उसे अर्जित करने के लिए यथासंभव प्रयास किया जाए। हर व्यक्ति का अपने-अपने ढंग से लक्ष्य निर्धारण करने और उसे अर्जित करने का अपना तरीका होता है। कोई इसे हल्के-फुल्के ढंग से लेता है और बड़े से बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर लेता है। ऐसे लक्ष्य क्षमता की कमी और अपर्याप्त साधन के अभाव में कभी पूरे नहीं हो पाते। जो व्यक्ति अपनी क्षमता और अपने पास उपलब्ध संसाधनों के अनुसार लक्ष्य का निर्धारण और उसकी पूर्ति के लिए तन-मन-धन से प्रयास करता है, वह व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में अवश्य सफल होता है। ऐसे दूरदर्शी व्यक्ति जमीन से जुड़े हुए होते हैं और समझ-बूझ कर अपना लक्ष्य निर्धारित करते तथा उसके निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
‘समाज का नवनिर्माण और विकास नर-नारी के सहयोग से ही संभव है’, इसपर अपने विचार लिखिए ।
हमारा समाज विभिन्न प्रकार की कुरीतियों और समस्याओं से भरा हुआ है। अनेक समाज सुधारकों के कठिन परिश्रम के बावजूद आज भी हमारे समाज में अनेक प्रकार की विषमताएँ व्याप्त हैं। असमानता, जातीयता, सांप्रदायिकता, प्रांतीयता, अस्पृश्यता आदि समस्याओं के कारण समाज के नर-नारी दोनों समान रूप से व्यथित हैं। जब तक हमारे समाज से ये बुराइयाँ दूर नहीं होती, तब तक समाज का नव निर्माण और विकास होना असंभव है। नर-नारी दोनों रथ के दो पहियों के समान हैं। बिना दोनों के सहयोग से आगे बढ़ना मुश्किल है। समाज की अनेक समस्याएँ ऐसी हैं, जिनके बारे में नारी को नर से अधिक जानकारियाँ होती हैं। नर-नारी दोनों कंधे से कंधा मिलाकर समाज उत्थान के कार्य में जुटेंगे, तभी समाज का नव निर्माण और विकास संभव हो सकता है।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर चतुष्पादियों का रसास्वादन कीजिए :
(२) पसंद की पंक्तियाँ - __________________
(३) पसंद आने के कारण - _________________
(4) कविता का केंद्रीय भाव - __________________
(१) रचनाकार का नाम - त्रिलोचन।
(२) पसंद की पंक्तियाँ - कविता की पसंद की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
पथ के संकट को वही सहता है,
एक दिन सिद्धि के शिखर पर बैठ
अपना इतिहास वही कहता है।
(३) पसंद आने के कारण - प्रस्तुत पंक्तियों में यह बात कही गई है कि एक बार अपने लक्ष्य का निर्धारण कर लेने के बाद मनुष्य को हर समय उसको पूरा करने के काम में जी-जान से लग जाना चाहिए। फिर मार्ग में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, उन्हें सहते हुए निरंतर आगे ही बढ़ते रहना चाहिए। एक दिन ऐसे व्यक्ति को सफलता मिलकर ही रहती है। ऐसे ही व्यक्ति लोगों के आदर्श बन जाते हैं। लोग उनका गुणगान करते है और उनसे प्रेरणा लेते हैं।
(४) कविता का केंद्रीय भाव - प्रस्तुत कविता में संघर्ष करने, अत्याचार, विषमता तथा निर्बलता पर विजय पाने का आवाहन किया गया है तथा समाज में समानता, स्वतंत्रता एवं समानता की स्थापना की बात कही गई है।
चतुष्पदी के लक्षण लिखिए।
चतुष्पदी चैपाई की भाँति चार चरणों वाला छंद होता है। इसके प्रथम, द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में पंक्तियों के तुक मिलते हैं। तीसरे चरण का तुक नहीं मिलता। प्रत्येक चतुष्पदी भाषा और विचार की दृष्टि से अपने आप में पूर्ण होती है और कोई चतुष्पदी किसी दूसरी से संबंधित नहीं होती।
त्रिलोचन जी के दो काव्य संग्रहों के नाम -
त्रिलोचन जी के कुछ प्रमुख काव्य संग्रह हैं - (1) धरती (2) दिगंत (3) गुलाब और बुलबुल (4) उस जनपद का कवि हूँ (5) सब का अपना आकाश। (इनमें से कोई दो नाम लिखे जा सकते हैं।)
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
Chapterwise List for Hindi Yuvakbharati 12th Standard
Access Balbharati Solutions for all chapters of 12th Standard HSC Maharashtra State Board Hindi.
- Chapter 1: नवनिर्माण
- Chapter 2: निराला भाई
- Chapter 3: सच हम नहीं; सच तुम नहीं
- Chapter 4: आदर्श बदला
- Chapter 5.1: गुरुबानी
- Chapter 5.2: वृंद के दोहे
- Chapter 6: पाप के चार हथि यार
- Chapter 7: पेड़ होने का अर्थ
- Chapter 8: सुनो किशोरी
- Chapter 9: चुनिंदा शेर
- Chapter 10: ओजोन विघटन का संकट
- Chapter 11: कोखजाया
- Chapter 12: सुनु रे सखिया, कजरी
- Chapter 13: कनुप्रिया
- Chapter 14: पल्लवन
- Chapter 15: फीचर लेखन
- Chapter 16: मैं उद्घोषक
- Chapter 17: ब्लॉग लेखन
- Chapter 18: प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Difficult Words & Meanings (कठिन शब्द और उनके अर्थ):
आकलन (Ākalan): Assessment or comprehension (मूल्यांकन या समझ)
कृति (Kṛti): Activity or work (कार्य या रचना)
पीड़ित (Pīṛit): Suffering or victim (दुखी या सताया हुआ व्यक्ति)
सताए हुए (Satāe hue): Oppressed or harassed (जिन पर अत्याचार हुआ हो)
मंजिल (Manzil): Destination or goal (लक्ष्य या गंतव्य)
पथ (Path): Path or way (रास्ता)
संकट (Sankaṭ): Crisis or trouble (मुसीबत)
सिद्धि (Siddhi): Accomplishment or success (सफलता)
शिखर (Shikhar): Peak or summit (चोटी)
इतिहास (Itihās): History (अतीत का विवरण)
उपसर्गयुक्त (Upsargyukt): Formed with a prefix (उपसर्ग से बना शब्द)
अर्थपूर्ण (Arthpūrṇ): Meaningful (जिसका कोई अर्थ हो)
नीति (Nīti): Policy or ethics (सिद्धांत या आचार)
अनीति (Anīti): Immorality or injustice (अनैतिकता या अन्याय)
मार्ग (Mārg): Way or path (रास्ता)
निर्बल (Nirbal): Weak or powerless (कमजोर)
अभिव्यक्त (Abhivyakt): Expressed (प्रकट किया हुआ)
लक्ष्य (Lakṣya): Aim or goal (उद्देश्य)
धरती (Dhartī): Earth (पृथ्वी)
मनुष्य (Manuṣya): Human being (इंसान)
प्राप्त (Prāpt): Achieve or obtain (पाना)
मत (Mat): Opinion or view (विचार)
प्रकट (Prakaṭ): Reveal or express (ज़ाहिर करना)
उद्देश्य (Uddeśya): Objective or purpose (मकसद)
अर्जित (Arjit): Earned or acquired (कमाया हुआ या प्राप्त किया हुआ)
यथासंभव (Yathāsambhav): As far as possible (जितना संभव हो सके)
प्रयास (Prayās): Effort (कोशिश)
ढंग (Ḍhang): Manner or way (तरीका)
क्षमता (Kṣamatā): Capability or capacity (योग्यता)
अपर्याप्त (Aparyāpt): Insufficient (नाकाफी)
अभाव (Abhāv): Lack or scarcity (कमी)
तन-मन-धन से: Wholeheartedly (पूरी लगन से)
दूरदर्शी (Dūrdarśī): Far-sighted (आगे की सोचने वाला)
निरंतर (Nirantar): Continuously (लगातार)
कुरीतियों (Kurītiyoṁ): Evil customs or malpractices (बुरी प्रथाएँ)
सुधारकों (Sudhārakoṁ): Reformers (समाज सुधार करने वाले)
परिश्रम (Pariśram): Hard work or labor (मेहनत)
विषमताएँ (Viṣamatāeṁ): Disparities or inequalities (असमानताएँ)
व्याप्त (Vyāpt): Prevalent or widespread (फैला हुआ)
जातीयता (Jātīyatā): Casteism (जातिवाद)
सांप्रदायिकता (Sāmpradāyikatā): Communalism (धार्मिक समूहवाद)
प्रांतीयता (Prāntīyatā): Regionalism (क्षेत्रवाद)
अस्पृश्यता (Aspṛśyatā): Untouchability (छूआछूत)
व्यथित (Vyathit): Distressed or grieved (दुखी)
उत्थान (Utthān): Upliftment or progress (उन्नति)
रसास्वादन (Rasāsvādan): Appreciation (काव्य का आनंद)
चतुष्पादियों (Chatuṣpādiyoṁ): Quatrains (चार पंक्तियों वाली कविता)
रचनाकार (Rachanākār): Creator or author (लेखक या कवि)
पंक्तियाँ (Paṅktiyāṁ): Lines or verses (कविता की लाइनें)
केंद्रीय भाव (Kendrīya bhāv): Central idea or theme (मुख्य विचार)
संघर्ष (Saṅgharṣ): Struggle or conflict (लड़ाई या प्रयास)
अत्याचार (Atyāchār): Atrocity or tyranny (ज़ुल्म)
निर्बलता (Nirbalatā): Weakness (कमजोरी)
आवाहन (Āvāhan): Call or invocation (पुकार)
स्थापना (Sthāpanā): Establishment (स्थापित करना)
साहित्य (Sāhitya): Literature (लिखी हुई कला)
लक्षण (Lakṣaṇ): Characteristics (विशेषताएँ)
छंद (Chhand): Meter in poetry (कविता का माप या लय)
चरण (Charaṇ): Foot or part of a stanza (कविता की पंक्ति का भाग)
तुक (Tuk): Rhyme (पंक्तियों के अंत में समान ध्वनि)
काव्य संग्रह: Poetry collection (कविताओं का समूह)
दिगंत (Digant): Horizon (क्षितिज)
जनपद (Janpad): District or region (क्षेत्र)
उद्घोषक (Udghoṣak): Announcer (कार्यक्रम का संचालन करने वाला)
विघटन (Vighaṭan): Disintegration (टूटना या बिखरना)
पल्लवन (Pallavan): Elaboration (किसी विचार का विस्तार)
फीचर (Phīchar): Feature (लेख का एक प्रकार)
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