बोर्ड प्रश्न पत्र: फरवरी 2025
जीवविज्ञान (BIOLOGY)
समय: 3 घंटे (Time: 3 Hrs.)
अधिकतम अंक: 70 (Max. Marks: 70)
विभाग – अ (SECTION – A)
प्र. १. निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्नों के लिए सही उत्तर चुनिए तथा लिखिए : [१०]
(विशेष रूप से बीटल्स/भृंग के लिए, लेकिन यह कीट परागण के अंतर्गत आता है)।
(विशेष रूप से सिर में स्थित एक्रोसोम में)।
पौधे (plants) \(\rightarrow\) हिरन (deer) \(\rightarrow\) शेर (lion)
(उत्पादक) (शाकभक्षी) (माँसभक्षी)
(10% के नियम के अनुसार: पौधे 1000J -> हिरन 100J -> शेर 10J)।
HSC Biology
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प्र. २. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [८]
विभाग – ब (SECTION – B)
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [१६]
प्रजातियाँ: 1. एपिस मेलिफेरा (Apis mellifera - यूरोपियन मक्खी) 2. एपिस सेराना इंडिका (Apis cerana indica - भारतीय मक्खी)।
भूमिका: वे उत्कृष्ट परागणकर्ता हैं। जब वे मकरंद के लिए फूलों पर जाती हैं, तो वे परागकणों का स्थानांतरण करती हैं, जिससे निषेचन होता है और फसल की पैदावार (जैसे: सूरजमुखी, सरसों) में काफी वृद्धि होती है।
(ब) प्रतिहारी शिरा (portal vein) किस प्रकार सामान्य शिरा (normal vein) से भिन्न है?
(अ) फुफ्फुसीय शिरा (Pulmonary vein) - यह फेफड़ों से हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त ले जाती है।
(ब) एक सामान्य शिरा शरीर के ऊतकों की केशिकाओं से शुरू होती है और हृदय में समाप्त होती है। जबकि एक प्रतिहारी शिरा (Portal vein) एक अंग की केशिकाओं से शुरू होती है और सीधे हृदय में जाने के बजाय किसी अन्य अंग की केशिकाओं में समाप्त होती है (जैसे: यकृत प्रतिहारी शिरा)।
बीमारी: सामान्य घेंघा (Simple Goiter)।
सूक्ष्मपोषक तत्त्व: आयोडीन (Iodine) - पहाड़ी क्षेत्रों की मिट्टी और पानी में आयोडीन की कमी होती है।
- मलेरिया: मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर।
- फाइलेरियासिस (हाथीपाँव): मादा क्यूलेक्स (Culex) मच्छर।
- डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome): जीन प्रारूप: 45 + XY या 45 + XX (21वीं जोड़ी में ट्राइसोमी के कारण कुल 47)।
- क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome): जीन प्रारूप: 44 + XXY (कुल 47)।
(i) यूस्टेशियन ट्यूब (eustachian tube)
(ii) पीनियल ग्रंथि (pineal gland)
(iii) मध्य कर्ण (middle ear)
(iv) मध्य कर्ण की परत (lining of middle ear)
- यूस्टेशियन ट्यूब: अंतर्जनस्तर (Endoderm)
- पीनियल ग्रंथि: बहिर्जनस्तर (Ectoderm)
- मध्य कर्ण (हड्डियां/संरचना): मध्यजनस्तर (Mesoderm)
- मध्य कर्ण की परत: अंतर्जनस्तर (Endoderm)
वृद्धि नियामक: एथिलीन (Ethylene)।
पौधों में स्रोत: यह पकते हुए फलों (ripening fruits), फूलों और जीर्ण पत्तियों (senescent leaves) में संश्लेषित होता है।
परागकण (लघु बीजाणु) पहले समसूत्री विभाजन से दो असमान कोशिकाओं में विभाजित होता है:
- कायिक कोशिका (Vegetative Cell): यह बड़ी होती है, इसमें प्रचुर मात्रा में खाद्य भंडार और एक बड़ा अनियमित केंद्रक होता है।
- जनन कोशिका (Generative Cell): यह छोटी, तर्कु आकार की होती है और कायिक कोशिका के कोशिका द्रव्य में तैरती रहती है। यह आगे चलकर नर युग्मक बनाती है।
अधिकांश आवृतबीजी पौधों में परागकण इसी 2-कोशीय अवस्था में झड़ते हैं।
- स्वउतप्रेरक (Autocatalytic): जब DNA अपनी खुद की प्रतिलिपि (replica) के संश्लेषण का निर्देशन करता है (प्रतिकृतियन / Replication)।
- विषमोरप्रेरक (Heterocatalytic): जब DNA अन्य अणुओं जैसे RNA और प्रोटीन के संश्लेषण का निर्देशन करता है (अनुलेखन / अनुवाद)।
वाष्पोत्सर्जन: पौधे के वायवीय भागों से जल का वाष्प के रूप में होने वाला ह्रास वाष्पोत्सर्जन कहलाता है।
अंतर: वाष्पोत्सर्जन में जल रंध्रों (stomata) के माध्यम से वाष्प के रूप में निकलता है, जबकि बिंदु स्त्रावण में जल पत्तियों के किनारों पर स्थित जलरंध्रों (hydathodes) से द्रव (liquid) के रूप में निकलता है।
यह एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस (Erythroblastosis fetalis / HDN) नामक गंभीर स्थिति को रोकने के लिए किया जाता है। पहले प्रसव के दौरान, भ्रूण का कुछ Rh+ रक्त माँ के Rh- रक्त में मिल सकता है, जिससे माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडीज बन सकती हैं। यदि दूसरी गर्भावस्था Rh+ होती है, तो ये एंटीबॉडीज प्लेसेंटा को पार करके भ्रूण की RBCs को नष्ट कर सकती हैं। एंटी-Rh इंजेक्शन (रोगम) माँ की प्रतिरक्षा प्रणाली को संवेदनशील होने से पहले ही भ्रूण की RBCs को नष्ट कर देता है।
[चित्र प्रश्न 14 देखें]
(i) A B C D E F G H → A B C F G H ( D E का विलोपन)
(ii) A B C D E F G H → P Q R C D E F G H (स्थानांतरण)
(iii) A B C D E F G H → A B C D C D E F G H (C D का दोहराव)
(iv) A B C D E F G H → A D C B E F G H (B C D का प्रतिलोमन)
- विलोपन (Deletion): गुणसूत्र का खंड DE नष्ट हो गया है।
- स्थानांतरण (Translocation): खंड AB को एक गैर-समजात गुणसूत्र के खंड PQR से बदल दिया गया है।
- द्विगुणन (Duplication): खंड CD की पुनरावृत्ति हुई है।
- प्रतिलोमन (Inversion): खंड BCD उल्टा होकर DCB हो गया है।
विभाग – क (SECTION – C)
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [२४]
| अंग क्षेत्र (organ region) | अनुकंपी प्रभाव (sympathetic effect) | परानुकंपी प्रभाव (parasympathetic effect) |
|---|---|---|
| (i) हृदय की धड़कन (heart beat) | बढ़ती है (increases) | कम होती है (decreases) |
| (ii) रक्त वाहिकाएँ (blood vessels) | संकुचित होती हैं (constricts) | फैलती हैं (dilates) |
| (iii) धमनीय बीपी (arterial B.P.) | बढ़ता है (increases) | कम होती है (decreases) |
| (iv) आँख की पुतली (pupil of eye) | फैलती है (dilates) | संकुचित होती है (constricts) |
| (v) जठरात्र संबंधी गतिविधियाँ (gastrointestinal movements) | क्रमाकुंचन को धीमा कर देता है (retards peristalsis) | बढ़ाता है / तेज करता है (increases/accelerates) |
| (vi) मूत्राशय (urinary bladder) | शिथिल होता है (relaxes) | संकुचित होता है (contracts) |
(ब) सतही रूप से स्थित दो धमनियों (two superficially placed arteries) के नाम लिखिए।
(अ) चित्र: (विद्यार्थी धमनी की अनुप्रस्थ काट का चित्र बनाएं जिसमें तीन परतें: ट्यूनिका एक्सटर्ना, ट्यूनिका मीडिया (मोटी पेशीय) और ट्यूनिका इंटर्ना स्पष्ट दिखाई दें)।
(ब) सतही धमनियां: रेडियल धमनी (Radial artery - कलाई), कैरोटिड धमनी (Carotid artery - गर्दन), या टेम्पोरल धमनी।
- त्रिक प्रकृति (Triplet Nature): तीन न्यूक्लियोटाइड मिलकर एक अमीनो अम्ल का कूट बनाते हैं।
- सार्वभौमिकता (Universality): यह कूट लगभग सभी जीवों में समान होता है।
- असदिगध (Non-ambiguous): एक कोडॉन केवल एक ही अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करता है।
- अपभ्रष्टता (Degeneracy): एक अमीनो अम्ल के लिए एक से अधिक कोडॉन हो सकते हैं।
- कॉमा-रहित (Commaless): इसे बिना किसी विराम चिह्न के लगातार पढ़ा जाता है।
- प्रारंभ और समापन कूट: AUG प्रारंभ कोडॉन है, जबकि UAA, UAG, UGA समापन (stop) कोडॉन हैं।
(ब) किन्हीं दो प्रतिबंधक विकर (restriction enzymes) तथा उनके स्रोत जीवों (source organisms) के नाम लिखिए।
(अ) समस्या: यदि दो अलग-अलग प्रतिबंधक विकर उपयोग किए जाते हैं, तो वे अलग-अलग "चिपचिपे सिरे" (sticky ends) उत्पन्न करेंगे जो एक-दूसरे के पूरक (complementary) नहीं होंगे। परिणामस्वरूप, वेक्टर DNA और दाता DNA आपस में जुड़ नहीं पाएंगे और DNA लाइगेज उन्हें जोड़कर rDNA नहीं बना पाएगा।
(ब) उदाहरण:
- EcoRI - स्रोत: Escherichia coli
- HindIII - स्रोत: Haemophilus influenzae
(ब) मनुष्य में अवशेषी अंग के कोई दो उदाहरण दीजिए।
(अ) स्पष्टीकरण: अवशेषी अंग वे संरचनाएं हैं जो वर्तमान जीव में अक्रियाशील या अल्पविकसित हैं, लेकिन उनके पूर्वजों में ये पूर्ण विकसित और कार्यात्मक थीं। उनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि जीव उन पूर्वजों से विकसित हुए हैं जिनमें ये अंग उपयोगी थे।
(ब) उदाहरण: कृमि रूप परिशेषिका (Vermiform Appendix), अनुत्रिक (Coccyx/tail bone), अक्ल दाढ़ (Wisdom teeth)।
जल विभव (\(\Psi_w\)): शुद्ध जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा और किसी विलयन में जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा के बीच के अंतर को जल विभव कहते हैं। यह जल की गति की दिशा निर्धारित करता है।
प्रभावित करने वाले कारक:
- उपलब्ध मृदा जल (कोशिकीय जल)।
- मृदा विलयन की सांद्रता (Concentration)।
- मृदा वातन (Soil aeration)।
- मृदा का तापमान (इष्टतम 20°C - 30°C)।
Diagrammatic Representation: (Students are required to draw this diagram only]
Diagrammatic Representation: (For Better Understanding of the concept. Students are not required to draw this diagram.)
विकासात्मक प्रवाहचित्र:अंकुरण (Germination) \(\rightarrow\) किशोर अवस्था / कायिक वृद्धि (Juvenile Phase) \(\rightarrow\) प्रजनन अवस्था (Reproductive Phase) \(\rightarrow\) परिपक्वता (Maturation/Fruiting) \(\rightarrow\) जीर्णता (Senescence) \(\rightarrow\) मृत्यु (Death)
तत्त्व: नाइट्रोजन (N2)।
लाभ:
- रासायनिक उर्वरकों की तुलना में सस्ते होते हैं।
- पर्यावरण के अनुकूल और प्रदूषण मुक्त होते हैं।
- मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार करते हैं।
- मिट्टी जनित रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
बायोफोर्टिफिकेशन: यह सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए उच्च स्तर के विटामिन, खनिज, या प्रोटीन और स्वस्थ वसा वाली फसलों के प्रजनन की विधि है।
GM पौधों के संदर्भ में: आनुवंशिक संशोधन (Genetic Modification) से इसे तेजी से प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, गोल्डन राइस एक GM फसल है जिसे प्रो-विटामिन A (बीटा-कैरोटीन) जीन के साथ बायोफोर्टिफाइड किया गया है ताकि विटामिन A की कमी को दूर किया जा सके।
| आवास (Habitat) | सु-स्थान / निकेत (Niche) |
|---|---|
| वह भौतिक स्थान जहाँ जीव रहता है। (पता) | पारिस्थितिकी तंत्र में जीव की कार्यात्मक भूमिका। (पेशा) |
| एक ही आवास में कई प्रजातियाँ रह सकती हैं। | प्रत्येक प्रजाति का निकेत विशिष्ट होता है। |
| उदाहरण: एक तालाब। | उदाहरण: उस तालाब में मेंढक का शिकारी होना। |
अपघटन: अपघटकों द्वारा जटिल कार्बनिक पदार्थों (मृत पौधों/जानवरों) को अकार्बनिक पदार्थों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और पोषक तत्वों) में तोड़ने की प्रक्रिया को अपघटन कहते हैं।
आरेखित निरूपण:
मृत अवशेष (Detritus) \(\downarrow\)
1. विखंडन (Fragmentation - केंचुआ आदि)
\(\downarrow\)
2. निक्षालन (Leaching - जल में घुलनशील पोषक तत्व मिट्टी में)
\(\downarrow\)
3. अपचय (Catabolism - जीवाणु/कवक एंजाइम)
\(\downarrow\)
4. ह्यूमस निर्माण (Humification)
\(\downarrow\)
5. खनिजीकरण (Mineralization)
जैव आवर्धन: खाद्य श्रृंखला में एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर पर जाने पर विषाक्त पदार्थों की सांद्रता में वृद्धि होने की प्रक्रिया को जैव आवर्धन कहते हैं।
DDT प्रवाह चार्ट:
\(\downarrow\)
ज़ूप्लवक (0.04 ppm)
\(\downarrow\)
छोटी मछली (0.5 ppm)
\(\downarrow\)
बड़ी मछली (2 ppm)
\(\downarrow\)
मछली खाने वाले पक्षी (25 ppm)
स्पष्टीकरण: DDT अजैव निम्नीकरणीय (non-biodegradable) और वसा में घुलनशील है। यह जीवों के वसा ऊतकों में जमा हो जाता है। जैसे-जैसे एक पोषी स्तर दूसरे को खाता है, DDT जमा होता जाता है, और शीर्ष मांसाहारियों (पक्षियों) में विषाक्त स्तर तक पहुँच जाता है, जिससे कैल्शियम चयापचय बाधित होता है और अंडे के छिलके पतले हो जाते हैं।
विभाग – ड (SECTION – D)
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [१२]
(ब) प्रतिबिम्ब रचना (image formation) में रेटिना (retina) का महत्त्व लिखिए।
(क) उन कोशिकाओं के नाम दीजिए जो मंद प्रकाश (dim light) तथा दिन के प्रकाश (day light) में कार्य करती हैं?
(ड) विटामिन ए (vitamin A) द्वारा कौन-सा वर्णक (pigment) प्राप्त होता है?
(अ) स्थान: नेत्र के पिछले ध्रुव (posterior pole) पर, थोड़ा मध्य की ओर, जहाँ से ऑप्टिक तंत्रिका आँख से बाहर निकलती है।
(ब) रेटिना का महत्त्व: यह वह पर्दा है जिस पर वस्तु का प्रतिबिंब बनता है। इसमें प्रकाशग्राही कोशिकाएं होती हैं जो प्रकाश ऊर्जा को तंत्रिका आवेगों (action potentials) में बदल देती हैं जो मस्तिष्क तक भेजे जाते हैं।
(क) कोशिकाएं: मंद प्रकाश: शलाका कोशिकाएं (Rod cells); दिन का प्रकाश: शंकु कोशिकाएं (Cone cells)।
(ड) वर्णक: रेटिनल (Retinal) (जो रोडोप्सिन का हिस्सा है) विटामिन A का व्युत्पन्न (derivative) है।
[हृदय की संचालन प्रणाली का चित्र - SA नोड, AV नोड, हिज का बंडल, पुर्किन्जे तंतु दिखाते हुए]
स्पष्टीकरण:
- SA नोड (शिरा-अलिंद पर्व): दाएं अलिंद के ऊपरी दाएं कोने में स्थित पेसमेकर। यह आवेग शुरू करता है।
- AV नोड (अलिंद-निलय पर्व): दाएं अलिंद के निचले बाएं कोने में स्थित। यह आवेग ग्रहण करता है और थोड़ा विलंबित करता है।
- हिज का बंडल (Bundle of His): AV नोड से निकलता है और निलय भित्ति में दाएं और बाएं शाखाओं में विभाजित होता है।
- पुर्किन्जे तंतु (Purkinje Fibers): बंडल शाखाओं से निकलने वाले सूक्ष्म तंतु जो निलय की दीवारों में फैलते हैं और निलय संकुचन का कारण बनते हैं।
(ब) जीनरूप (genotype) को चार्ट की सहायता से दर्शाइए।
(अ) अपूर्ण प्रभाविता: दोनों एलील आंशिक रूप से व्यक्त होते हैं। फीनोटाइप एक मिश्रण होता है।
उदाहरण: मिराबिलिस जलापा (4 O'clock plant)। लाल (RR) x सफेद (rr) = गुलाबी (Rr)।
सहप्रभाविता: दोनों एलील समान और स्वतंत्र रूप से व्यक्त होते हैं।
उदाहरण: मवेशियों में चितकबरा (Roan) रंग या AB रक्त समूह। लाल (RR) x सफेद (WW) = चितकबरा (RW)।
P: लाल (RR) x सफेद (rr)
F1: गुलाबी (Rr)
F2: 1 लाल (RR) : 2 गुलाबी (Rr) : 1 सफेद (rr)
सहप्रभाविता चार्ट:
P: लाल (RR) x सफेद (WW)
F1: चितकबरा (RW)
F2: 1 लाल (RR) : 2 चितकबरा (RW) : 1 सफेद (WW)
(ii) पराग नली (pollen-tube) के प्रवेश के संबंध में निभागीय युग्मन (chalazogamy) तथा अंडद्वारी प्रवेश (porogamy) के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
(iii) मध्य प्रवेश (mesogamy) दर्शाने के लिए एक स्वच्छ तथा नामांकित चित्र बनाइए।
(i) नालयुग्मन: वह प्रक्रिया जिसमें नर युग्मकों को पराग नली के माध्यम से अंड कोशिका तक ले जाया जाता है।
(ii) अंतर:
- अंडद्वारी प्रवेश (Porogamy): पराग नली बीजांड द्वार (Micropyle) के माध्यम से बीजांड में प्रवेश करती है (सबसे सामान्य)।
- निभागीय युग्मन (Chalazogamy): पराग नली निभाग (Chalaza - आधार भाग) के माध्यम से प्रवेश करती है।
(iii) चित्र (Mesogamy):
[मध्य प्रवेश (Mesogamy) का चित्र - जहाँ पराग नली अध्यावरण (Integuments) के माध्यम से प्रवेश करती है]
(ब) यदि महिला की डिंबवाही नलिका (fallopian tube) अवरोधित (blocked) हो गई है, तो बांझपन (infertility) को दूर करने के लिए कौन-सा उपचार (treatment) दिया जा सकता है? संक्षेप में समझाइए।
(क) शुक्राणु बैंक (sperm bank) क्या है?
(अ) बांझपन: 1-2 साल तक असुरक्षित यौन सहवास के बाद भी गर्भधारण करने या बच्चे पैदा करने में असमर्थता।
(ब) उपचार: IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन):
संक्षेप में: इसे "टेस्ट ट्यूब बेबी" भी कहा जाता है। पत्नी/दाता से अंडाणु और पति/दाता से शुक्राणु एकत्र किए जाते हैं और प्रयोगशाला में समान परिस्थितियों में निषेचित किए जाते हैं। फिर युग्मनज या प्रारंभिक भ्रूण (8 ब्लास्टोमेरेस तक) को डिंबवाही नलिका (ZIFT) या गर्भाशय (IUT) में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
(क) शुक्राणु बैंक: एक ऐसी सुविधा जहाँ वीर्य/शुक्राणुओं को एकत्र किया जाता है, बहुत कम तापमान पर जमाया जाता है (क्रायोप्रिजर्वेशन), और भविष्य में कृत्रिम गर्भाधान में उपयोग के लिए संग्रहीत किया जाता है।