जीवविज्ञान (56) - 2024 समाधान
अधिकतम अंक : 70 | समय : 3 घंटे
विभाग - अ (SECTION – A)
(i) पौधों में उस वृद्धि हॉर्मोन (growth hormone) की पहचान कीजिए जो निरोधात्मक प्रभाव (inhibitory effect) का कारण होता है।
(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा लैक ओपेरॉन (lac operon) का हिस्सा नहीं है?
(iii) निषेचन की अनुपस्थिति में कॉर्पस ल्यूटियम (corpus luteum) ......... में विकृत (degenerate) हो जाता है।
(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा नासा गुहा (nasal cavity) को विभाजित करता है?
(v) निम्नलिखित में से कौन सा रोग संक्रमित सुई (unsterilized needle) के कारण होता है?
(vi) निवर्धन एंजाइम (restriction enzyme) का अभिज्ञान क्रम (recognition sequence) साधारणतया ......... न्यूक्लियोटाइड लम्बा होता है।
(vii) निम्नलिखित में से कौन से प्रकार को परागणकारी (pollinator) की आवश्यकता होती है, लेकिन उसका परिणाम आनुवंशिक रूप से स्वयुग्मन (autogamy) के समान होता है?
(viii) निम्नलिखित में से कौन सा आगे विकसित नहीं होता?
(ix) आदर्श स्थिति के तहत जन्म की संख्या के लिए उपयुक्त पद (term) की पहचान कीजिए।
(x) लेखाचित्र (graph) को देखिए तथा सही विकल्प चुनिए :
वक्र A और सीधी रेखा B
HSC Biology
- Biology - July 2025 - English Medium View Answer Key
- Biology - March 2025 - English Medium View Answer Key
- Biology - March 2025 - Marathi Medium View Answer Key
- Biology - March 2025 - Hindi Medium View Answer Key
- Biology - March 2024 - English Medium View Answer Key Answer Key
- Biology - March 2024 - Hindi Medium View Answer Key
- Biology - July 2024 - English Medium View Answer Key
- Biology - March 2023 - English Medium View Answer Key
- Biology - July 2023 - English Medium View Answer Key
- Biology - March 2022 - English Medium View Answer Key
- Biology - July 2022 - English Medium View Answer Key
- Biology - MARCH 2013 View
- Biology - OCTOBER 2013 View
- Biology - MARCH 2014 View
- Biology - OCTOBER 2014 View
- Biology - MARCH 2015 View
- Biology - JULY 2015 View
- Biology - MARCH 2016 View
- Biology - JULY 2016 View
- Biology - MARCH 2017 View
- Biology - JULY 2017 View
(i) अवशेषी अंग (vestigial organs) क्या हैं?
(ii) ZIFT पद का विस्तृत रूप लिखिए।
(iii) अंतःस्रावी ग्रंथि (endocrine gland) का नाम लिखिए, जो जन्म के समय प्रमुख (prominent) होती है लेकिन धीरे-धीरे वयस्क अवस्था में कमज़ोर (atrophied) हो जाती है।
(iv) IAA का पूर्ण रूप (full form) क्या है?
(v) प्रतिजैविक क्लो रोमाइसिटिन (antibiotic chloromycetin) के सूक्ष्मजीवी स्रोत (microbial source) का नाम दीजिए।
(vi) लैंगरहेंस कोशिका गुच्छ (islets of langerhans) की कौन सी कोशिकाएँ हॉर्मोन इंसुलिन का उत्पादन करती हैं?
(vii) आवृतबीजी (angiosperm) में 300 बीजों के निर्माण के लिए कितने अर्धसूत्री विभाजन (meiotic divisions) की आवश्यकता होती है?
स्पष्टीकरण: 300 बीजों के लिए 300 परागकण और 300 भ्रूणकोष की आवश्यकता होती है।
- 300 परागकणों के लिए: \( 300/4 = 75 \) विभाजन।
- 300 भ्रूणकोष (eggs) के लिए: \( 300/1 = 300 \) विभाजन।
- कुल = 75 + 300 = 375.
(viii) उत्प्रवास (emigration) शब्द की व्याख्या कीजिए।
विभाग - ब (SECTION – B)
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [16]
- उन्होंने अपने प्रयोगों के लिए उद्यान मटर (Pisum sativum) का चयन किया जो उगाने में आसान और स्व-परागित था।
- उन्होंने एक समय में केवल एक ही लक्षण की वंशागति का अध्ययन किया।
- उन्होंने अपने प्रयोगों के आँकड़ों का सटीक सांख्यिकीय रिकॉर्ड रखा।
- भाग्यवश उन्होंने जिन लक्षणों को चुना वे अलग-अलग गुणसूत्रों पर स्थित थे या उनमें सहलग्नता (linkage) नहीं थी।
1. डी.एन.ए. का अलगाव
2. प्रतिबंध पाचन
3. जेल वैद्युतकर्णसंचलन
4. सदर्न ब्लॉटिंग
| मानव शुक्राणु (Sperm) | मानव अंडाणु (Ovum) |
|---|---|
| यह चल (motile) और सक्रिय होता है। | यह अचल (non-motile) और निष्क्रिय होता है। |
| आकार में बहुत छोटा होता है। | कोशिका द्रव्य के कारण आकार में बड़ा होता है। |
| माइटोकॉन्ड्रिया मध्य भाग में सर्पिल रूप में व्यवस्थित होते हैं। | माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं। |
| X या Y गुणसूत्र होता है। | केवल X गुणसूत्र होता है। |
- दोषपूर्ण जीन का प्रतिस्थापन: जैसे, ADA की कमी के कारण SCID का उपचार।
- कैंसर कोशिकाओं का विनाश: ऐसे जीन डालना जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर सकें।
- आनुवंशिक रोगों जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस, हीमोफिलिया आदि का उपचार।
- उपचारात्मक प्रोटीन बनाने वाले जीनों को शरीर में पहुंचाना।
(अ) जीन प्रवाह (gene flow)
(ब) गुणसूत्री विपधन (chromosomal aberrations)
(अ) जीन प्रवाह: किसी आबादी (population) में नए जीवों या युग्मकों के आगमन से जीन (एलील) का स्थानांतरण जीन प्रवाह कहलाता है।
(ब) गुणसूत्री विपधन: गुणसूत्र की संरचना में होने वाले परिवर्तन (जैसे विलोपन, द्विगुणन, प्रतिलोमन) जो जीन की व्यवस्था को बदल देते हैं, गुणसूत्री विपधन कहलाते हैं।
- इसके परिणामस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है जो भ्रूण में विकसित होता है।
- त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) बनता है, जो विकासशील भ्रूण को पोषण देने के लिए भ्रूणपोष (endosperm) में विकसित होता है।
- यह पौधे के जीवन चक्र में द्विगुणित स्थिति को बहाल करता है।
- यह ऊर्जा की बर्बादी को रोकता है क्योंकि भ्रूणपोष का निर्माण निषेचन के बाद ही होता है।
A - एपोप्लास्ट पथ (Apoplast pathway): यह कोशिका भित्ति और अंतरकोशिकीय स्थानों के माध्यम से पानी का संचलन है, बिना किसी झिल्ली को पार किए।
B - सिमप्लास्ट पथ (Symplast pathway): यह कोशिका द्रव्य (cytoplasm) और प्लाज्मोडेस्मेटा (plasmodesmata) के माध्यम से एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पानी का संचलन है।
उदाहरण: लाइकेन (शैवाल और कवक के बीच संबंध), माइकोराइजा (कवक और उच्च पौधों की जड़ों के बीच संबंध)।
- उपलब्ध मृदा जल: केशिका जल (capillary water) होने पर अवशोषण अधिकतम होता है।
- मृदा विलयन की सांद्रता: मिट्टी में लवणों की अधिक सांद्रता अवशोषण को कम करती है।
- मृदा वातन (Aeration): खराब वातन वाली मिट्टी अवशोषण को कम करती है क्योंकि जड़ों को श्वसन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
- तापमान: अनुकूल तापमान (20°C से 30°C) पर अवशोषण अधिकतम होता है।
- वाष्पोत्सर्जन: वाष्पोत्सर्जन की उच्च दर जल अवशोषण की दर को बढ़ाती है।
विभेदन: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा मेरिस्टेमेटिक कोशिकाएं (विभज्योतक) परिपक्व होती हैं और विशिष्ट कार्य करने के लिए विशिष्ट संरचना प्राप्त करती हैं।
पुनर्विभेदन: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा निर्विभेदित (dedifferentiated) कोशिकाएं (जिन्होंने विभाजन की क्षमता पुनः प्राप्त कर ली थी) अपनी विभाजन क्षमता खो देती हैं और फिर से विशिष्ट कार्य करने के लिए परिपक्व हो जाती हैं (जैसे, द्वितीयक जाइलम/फ्लोएम का बनना)।
[ शिरानालशोथ (sinusitis), वातस्फीति (emphysema), सिलिकामयता (silicosis) तथा ऐस्बेस्टॉसिस (asbestosis), कंठशोथ (laryngitis) ]
(अ) वायुकोष (alveoli) का टूटना तथा साँस लेने में कठिनाई।
(ब) साइनस (sinuses) में सूजन, बलगम रिसाव (mucous discharge)।
(क) कंठनली (larynx) में सूजन, स्वररज्जु (vocal cord) तथा गलशोथ (sore throat), आवाज में कर्कशता (hoarseness of voice), बलगम का निर्माण तथा खांसी (cough)।
(ड) तंतुमयता (fibrosis) की सूजन, फेफड़ों में क्षति (lung damage)।
- छानना (Screening): तैरते हुए मलबे जैसे प्लास्टिक, कपड़े आदि को हटाने के लिए सीवेज को जाली से गुजारा जाता है।
- ग्रिट चेंबर (Grit Chamber): सीवेज को ग्रिट चेंबर में भेजा जाता है जहाँ प्रवाह की गति कम कर दी जाती है। इससे भारी ठोस कण जैसे रेत, कंकड़ आदि नीचे बैठ जाते हैं।
विभाग - क (SECTION – C)
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [24]
- स्प्लिसिंग (Splicing): इसमें इंट्रॉन (अक्रियाशील भाग) को हटा दिया जाता है और एक्सॉन (क्रियाशील भाग) को एक निश्चित क्रम में जोड़ा जाता है।
- कैपिंग (Capping): hn-RNA के 5'-सिरे पर मिथाइल ग्वानोसिन ट्राइफॉस्फेट जोड़ा जाता है।
- टेलिंग (Tailing): 3'-सिरे पर एडेनाइलेट अवशेष (200-300) जोड़े जाते हैं।
प्रजनन अलगाव: यह वह तंत्र है जो दो अलग-अलग प्रजातियों की आबादी के बीच अंतःप्रजनन को रोकता है।
पूर्व युग्मन तंत्र (निषेचन को रोकते हैं):
- कालिक अलगाव (Temporal Isolation): प्रजातियां दिन या साल के अलग-अलग समय पर प्रजनन करती हैं।
- पारिस्थितिक अलगाव (Habitat Isolation): प्रजातियां एक ही क्षेत्र में अलग-अलग आवासों में रहती हैं।
युग्मन पश्चात तंत्र (संकर के अस्तित्व को रोकते हैं):
- संकर बंध्यता (Hybrid Sterility): संकर बनते हैं लेकिन वे बाँझ होते हैं (उदा. खच्चर)।
- युग्मनज मृत्यु (Zygote Mortality): निषेचन होता है, लेकिन युग्मनज विकसित होने से पहले मर जाता है।
- विशिष्टता (Specificity): यह एक विशिष्ट रोगजनक के लिए विशिष्ट होती है।
- विविधता (Diversity): यह विभिन्न प्रकार के रोगजनकों को पहचान सकती है।
- स्व और पर में भेद (Discrimination between Self and Non-self): यह शरीर की अपनी कोशिकाओं और विदेशी अणुओं के बीच अंतर कर सकती है।
- स्मृति (Memory): जब प्रतिरक्षा प्रणाली पहली बार किसी रोगजनक का सामना करती है, तो वह एक स्मृति बना लेती है। दूसरी बार उसी रोगजनक के हमले पर प्रतिक्रिया तेज और मजबूत होती है।
- एस्ट्रोजन (Estrogen): यह विकसित हो रहे पुटकों (follicles) द्वारा स्रावित होता है। यह मादा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है।
- प्रोजेस्टेरोन (Progesterone): यह कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा स्रावित होता है। यह गर्भावस्था को बनाए रखने और एंडोमेट्रियम को मोटा करने के लिए आवश्यक है।
- रिलैक्सिन (Relaxin): यह प्रसव के समय श्रोणि स्नायुबंधन (pelvic ligaments) को शिथिल करता है।
- इन्हिबिन (Inhibin): यह FSH के स्राव को रोकता है।
- निष्क्रियकरण (Denaturation) (94-98°C): डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए को गर्म करके दोनों लड़ों को अलग किया जाता है।
- तापानुशीलन (Annealing) (40-60°C): प्राइमर्स (छोटे डीएनए अनुक्रम) डीएनए टेम्प्लेट के पूरक अनुक्रमों से जुड़ते हैं।
- विस्तारण (Extension) (72°C): एंजाइम टैक पोलीमरेज़ (Taq polymerase) प्राइमर्स का विस्तार करता है और नए डीएनए स्ट्रैंड को संश्लेषित करता है।
- A: न्यूट्रोफिल (Neutrophil) (बहु-लूबित केंद्रक)।
कार्य: फागोसाइटोसिस (रोगाणुओं को खाना और नष्ट करना)। - B: ईओसिनोफिल (Eosinophil) (द्वि-लूबित केंद्रक)।
कार्य: एलर्जी प्रतिक्रियाओं और परजीवी संक्रमण में भूमिका; हिस्टामिनेज का स्राव। - C: मोनोसाइट (Monocyte) (किडनी के आकार का केंद्रक)।
कार्य: फागोसाइटोसिस; ये ऊतकों में जाकर मैक्रोफेज में बदल जाते हैं।
- यह सभी पौधों में नहीं पाया जाता (उदा. जिम्नोस्पर्म/अनावृतबीजी में अनुपस्थित)।
- मूल दाब का मान कम (आमतौर पर 1-2 बार) होता है, जो ऊंचे पेड़ों में पानी चढ़ाने के लिए अपर्याप्त है।
- दिन के समय जब वाष्पोत्सर्जन अधिक होता है, मूल दाब अक्सर नहीं देखा जाता।
- यह एक धीमी प्रक्रिया है।
ग्रीन हाउस प्रभाव: यह वह प्राकृतिक घटना है जिसमें वायुमंडल की कुछ गैसें पृथ्वी की सतह से निकलने वाली ऊष्मा (अवरक्त विकिरण) को रोक लेती हैं, जिससे पृथ्वी गर्म रहती है।
जिम्मेदार गैसें और स्रोत:
- कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)): जीवाश्म ईंधन का जलना, वनों की कटाई।
- मीथेन (\( CH_4 \)): धान के खेत, जुगाली करने वाले पशु।
- CFCs: रेफ्रिजरेटर, एरोसोल।
- नाइट्रस ऑक्साइड (\( N_2O \)): रासायनिक उर्वरक।
क्रियात्मक प्रभाव:
- फलों को पकाना (climacteric fruits)।
- पत्तियों और फूलों के विलगन (abscission) को प्रेरित करना।
- बीज और कली की प्रसुप्ति (dormancy) को तोड़ना।
उपयोग:
- केला, आम जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए (Ethephon)।
- अनानास में पुष्पन शुरू करने के लिए।
- ककड़ी में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाने के लिए।
- I (पहली) कपालीय तंत्रिका: Olfactory (घ्राण तंत्रिका)। प्रकार: संवेदी (Sensory)।
- IV (चौथी) कपालीय तंत्रिका: Trochlear (ट्रोकलियर)। प्रकार: प्रेरक (Motor)।
- VII (सातवीं) कपालीय तंत्रिका: Facial (चेहरे की तंत्रिका)। प्रकार: मिश्रित (Mixed)।
ऊर्जा का पिरामिड एक पारिस्थितिकी तंत्र में प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का चित्रमय निरूपण है। यह हमेशा सीधा (upright) होता है क्योंकि प्रत्येक स्थानांतरण पर ऊष्मा के रूप में ऊर्जा की हानि होती है (10% नियम के अनुसार)।
- आधार (उत्पादक): सर्वाधिक ऊर्जा।
- प्राथमिक उपभोक्ता: उत्पादकों से कम ऊर्जा।
- शीर्ष उपभोक्ता: सबसे कम ऊर्जा।
लाख: यह मादा लाख कीट (Tacchardia lacca) की त्वचा ग्रंथियों द्वारा स्रावित एक राल जैसा पदार्थ है।
आर्थिक महत्त्व:
- चूड़ियाँ, खिलौने और गहने बनाने में।
- सीलिंग वैक्स (लाख), पॉलिश और वार्निश में।
- विद्युत रोधी सामग्री (insulation) में।
- स्याही और दर्पण बनाने में।
विभाग - ड (SECTION – D)
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [12]
वृषण की औतिकीय संरचना में संयोजी ऊतक में धंसी हुई अनेक शुक्रजनक नलिकाएं (seminiferous tubules) होती हैं।
- शुक्रजनक नलिकाएं: प्रत्येक नलिका जनन उपकला (Germinal Epithelium) द्वारा आस्तरित होती है जिसमें दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं:
- जनन कोशिकाएं (Spermatogonia): ये शुक्राणुजनन (spermatogenesis) द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।
- सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli cells): ये विकसित हो रहे शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
- अंतराली ऊतक: नलिकाओं के बीच के स्थान में रक्त वाहिकाएं और लीडिग कोशिकाएं (Leydig cells) होती हैं जो नर हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्राव करती हैं।
गुणसूत्री विकार: गुणसूत्रों की संख्या में कमी या अधिकता या उनकी असामान्य व्यवस्था के कारण होने वाले विकार।
टर्नर सिंड्रोम (45, X0):
- कारण: मादाओं में एक X गुणसूत्र की अनुपस्थिति (Monosomy)।
- लक्षण: बाँझ महिलाएं, अविकसित अंडाशय, द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का अभाव, छोटा कद।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (47, XXY):
- कारण: पुरुषों में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र की उपस्थिति (Trisomy)।
- लक्षण: बाँझ पुरुष, लंबा कद, स्तनों का विकास (Gynecomastia), अविकसित वृषण।
प्लेनेरिया में सीढ़ीनुमा (ladder-type) तंत्रिका तंत्र पाया जाता है।
- गुच्छिका (Ganglia): सिर क्षेत्र में एक जोड़ी सेरेब्रल गैन्ग्लिया (मस्तिष्क) मौजूद होता है।
- तंत्रिका रज्जु (Nerve Cords): गैन्ग्लिया से दो अनुदैर्ध्य तंत्रिका रज्जु निकलकर शरीर के पीछे तक जाती हैं।
- अनुप्रस्थ कमिसर: अनुदैर्ध्य तंत्रिका रज्जु अनुप्रस्थ तंत्रिकाओं द्वारा जुड़ी होती हैं, जिससे यह सीढ़ी जैसा दिखता है।
- संवेदी अंग: सिर में नेत्र बिंदु (Eye spots) पाए जाते हैं।
(अ) रोपण (grafting)
(ब) असंगजनन (apomixis)
(क) बहुभ्रूणता (polyembryony)
(ड) अनिषेक फलन (parthenocarpy)
(अ) रोपण (Grafting): यह कायिक प्रवर्धन की एक विधि है जिसमें दो पौधों के हिस्सों को इस तरह जोड़ा जाता है कि वे एक पौधे के रूप में बढ़ें। जड़ वाले भाग को 'स्टॉक' और तने वाले भाग को 'सियन' (Scion) कहते हैं।
(ब) असंगजनन (Apomixis): बिना निषेचन के बीज बनने की प्रक्रिया। यह अलैंगिक प्रजनन है जो लैंगिक प्रजनन की नकल करता है।
(क) बहुभ्रूणता (Polyembryony): एक बीज में एक से अधिक भ्रूणों का होना। (उदा. नींबू, आम)।
(ड) अनिषेक फलन (Parthenocarpy): बिना निषेचन के फल बनने की प्रक्रिया। ऐसे फल बीजरहित होते हैं (उदा. केला, अंगूर)।
व्याख्या:
- आकृति A: उच्छ्वसन (साँस छोड़ना) को दर्शाती है।
- आकृति B: अंतः श्वसन (साँस लेना) को दर्शाती है।
होने वाले परिवर्तन:
| अंतः श्वसन (आकृति B) | उच्छ्वसन (आकृति A) |
|---|---|
| पसलियां और स्टर्नम ऊपर और बाहर की ओर बढ़ते हैं। | पसलियां और स्टर्नम नीचे और अंदर की ओर बढ़ते हैं। |
| डायाफ्राम (Diaphragm) सिकुड़ता है और चपटा हो जाता है। | डायाफ्राम शिथिल होता है और गुंबद के आकार का हो जाता है। |
| वक्षीय आयतन बढ़ता है, दबाव कम होता है। | वक्षीय आयतन कम होता है, दबाव बढ़ता है। |
| हवा फेफड़ों में भर जाती है। | हवा फेफड़ों से बाहर निकल जाती है। |