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Maharashtra Board Class 12 Biology Question Paper Solution 2024 (Hindi Medium)

महाराष्ट्र बोर्ड कक्षा 12 जीवविज्ञान प्रश्न पत्र समाधान 2024 (Hindi Medium)
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जीवविज्ञान (56) - 2024 समाधान

अधिकतम अंक : 70 | समय : 3 घंटे

विभाग - अ (SECTION – A)

प्र. १. निम्नलिखित प्रश्नों के सही पर्याय चुनकर लिखिए : [10]

(i) पौधों में उस वृद्धि हॉर्मोन (growth hormone) की पहचान कीजिए जो निरोधात्मक प्रभाव (inhibitory effect) का कारण होता है।

  • (अ) साइटोकाइनिन (cytokinins)
  • (ब) एब्सिसिक अम्ल (abscissic acid)
  • (क) जिब्बरेलिन (gibberellin)
  • (ड) एथिलीन (ethylene)
उत्तर: (ब) एब्सिसिक अम्ल (abscissic acid)

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा लैक ओपेरॉन (lac operon) का हिस्सा नहीं है?

  • (अ) प्रोत्साहक (promoter)
  • (ब) नियामक (regulator)
  • (क) प्रेरक (inducer)
  • (ड) संचालक (operator)
उत्तर: (क) प्रेरक (inducer)

(iii) निषेचन की अनुपस्थिति में कॉर्पस ल्यूटियम (corpus luteum) ......... में विकृत (degenerate) हो जाता है।

  • (अ) आवरण झिल्ली धवल (tunica albugenia)
  • (ब) कणिकामय झिल्ली (membrana granulosa)
  • (क) स्वच्छ अस्तर (zona pellucida)
  • (ड) श्वेत पिण्ड (corpus albicans)
उत्तर: (ड) श्वेत पिण्ड (corpus albicans)

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा नासा गुहा (nasal cavity) को विभाजित करता है?

  • (अ) काचाभ उपास्थि (hyaline cartilage)
  • (ब) मेसेथमॉइड उपास्थि (mesethmoid cartilage)
  • (क) धमनी स्नायु (ligamentum arteriosum)
  • (ड) स्वरयंत्र ग्रसनी (laryngopharynx)
उत्तर: (ब) मेसेथमॉइड उपास्थि (mesethmoid cartilage)

(v) निम्नलिखित में से कौन सा रोग संक्रमित सुई (unsterilized needle) के कारण होता है?

  • (अ) हाथी पाँव (elephantiasis)
  • (ब) एड्स (AIDS)
  • (क) मलेरिया (malaria)
  • (ड) डेंगू (dengue)
उत्तर: (ब) एड्स (AIDS)

(vi) निवर्धन एंजाइम (restriction enzyme) का अभिज्ञान क्रम (recognition sequence) साधारणतया ......... न्यूक्लियोटाइड लम्बा होता है।

  • (अ) 2 से 4
  • (ब) 4 से 8
  • (क) 8 से 10
  • (ड) 14 से 18
उत्तर: (ब) 4 से 8

(vii) निम्नलिखित में से कौन से प्रकार को परागणकारी (pollinator) की आवश्यकता होती है, लेकिन उसका परिणाम आनुवंशिक रूप से स्वयुग्मन (autogamy) के समान होता है?

  • (अ) सजात पुष्पी परागण (geitonogamy)
  • (ब) जीनोगैमी (xenogamy)
  • (क) एपोगैमी (apogamy)
  • (ड) अनुन्मील्य परागण (cleistogamy)
उत्तर: (अ) सजात पुष्पी परागण (geitonogamy)

(viii) निम्नलिखित में से कौन सा आगे विकसित नहीं होता?

  • (अ) चरमोत्कर्ष समुदाय (climax community)
  • (ब) प्राथमिक अनुक्रमण (primary succession)
  • (क) पुरोगामी प्रजाति (pioneer species)
  • (ड) क्रमकी समुदाय (seral community)
उत्तर: (अ) चरमोत्कर्ष समुदाय (climax community)

(ix) आदर्श स्थिति के तहत जन्म की संख्या के लिए उपयुक्त पद (term) की पहचान कीजिए।

  • (अ) पूर्णतया मृत्युदर (absolute mortality)
  • (ब) वास्तविक जन्मदर (realized natality)
  • (क) वास्तविक मृत्युदर (realized mortality)
  • (ड) पूर्णतया जन्मदर (absolute natality)
उत्तर: (ड) पूर्णतया जन्मदर (absolute natality)

(x) लेखाचित्र (graph) को देखिए तथा सही विकल्प चुनिए :

[ग्राफ: प्रजाति समृद्धि बनाम क्षेत्र]
वक्र A और सीधी रेखा B
  • (अ) रेखा ‘A’ दर्शाती है \( S-CA^2 \)
  • (ब) रेखा ‘B’ दर्शाती है \( \log C = \log A + Z \log S \)
  • (क) रेखा ‘A’ दर्शाती है \( S = CA^Z \)
  • (ड) रेखा ‘B’ दर्शाती है \( \log S = \log Z + C \log A \)
उत्तर: (क) रेखा ‘A’ दर्शाती है \( S = CA^Z \)

HSC Biology

प्र. २. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [8]

(i) अवशेषी अंग (vestigial organs) क्या हैं?

उत्तर: जीवों में पाए जाने वाले वे अंग जो अविकसित, निष्क्रिय या अक्रियाशील होते हैं, लेकिन उनके पूर्वजों में क्रियाशील थे, अवशेषी अंग कहलाते हैं। (उदाहरण: मनुष्यों में कृमिरूप परिशेषिका/Appendix)।

(ii) ZIFT पद का विस्तृत रूप लिखिए।

उत्तर: Zygote Intrafallopian Transfer (युग्मनज अंतःडिंबवाहिनी स्थानांतरण)।

(iii) अंतःस्रावी ग्रंथि (endocrine gland) का नाम लिखिए, जो जन्म के समय प्रमुख (prominent) होती है लेकिन धीरे-धीरे वयस्क अवस्था में कमज़ोर (atrophied) हो जाती है।

उत्तर: थाइमस ग्रंथि (Thymus gland)।

(iv) IAA का पूर्ण रूप (full form) क्या है?

उत्तर: Indole-3-Acetic Acid (इंडोल-3-एसिटिक एसिड)।

(v) प्रतिजैविक क्लो रोमाइसिटिन (antibiotic chloromycetin) के सूक्ष्मजीवी स्रोत (microbial source) का नाम दीजिए।

उत्तर: Streptomyces venezuelae.

(vi) लैंगरहेंस कोशिका गुच्छ (islets of langerhans) की कौन सी कोशिकाएँ हॉर्मोन इंसुलिन का उत्पादन करती हैं?

उत्तर: बीटा कोशिकाएँ (\( \beta \)-cells)।

(vii) आवृतबीजी (angiosperm) में 300 बीजों के निर्माण के लिए कितने अर्धसूत्री विभाजन (meiotic divisions) की आवश्यकता होती है?

उत्तर: 375 अर्धसूत्री विभाजन।
स्पष्टीकरण: 300 बीजों के लिए 300 परागकण और 300 भ्रूणकोष की आवश्यकता होती है।
- 300 परागकणों के लिए: \( 300/4 = 75 \) विभाजन।
- 300 भ्रूणकोष (eggs) के लिए: \( 300/1 = 300 \) विभाजन।
- कुल = 75 + 300 = 375.

(viii) उत्प्रवास (emigration) शब्द की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: उत्प्रवास (Emigration) वह प्रक्रिया है जिसमें आबादी के कुछ व्यक्ति अपने आवास को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर चले जाते हैं।

विभाग - ब (SECTION – B)

निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [16]

प्र. ३. मेण्डल (Mendel) की सफलता के क्या कारण हैं?
उत्तर: मेण्डल की सफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
  1. उन्होंने अपने प्रयोगों के लिए उद्यान मटर (Pisum sativum) का चयन किया जो उगाने में आसान और स्व-परागित था।
  2. उन्होंने एक समय में केवल एक ही लक्षण की वंशागति का अध्ययन किया।
  3. उन्होंने अपने प्रयोगों के आँकड़ों का सटीक सांख्यिकीय रिकॉर्ड रखा।
  4. भाग्यवश उन्होंने जिन लक्षणों को चुना वे अलग-अलग गुणसूत्रों पर स्थित थे या उनमें सहलग्नता (linkage) नहीं थी।
प्र. ४. डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग (DNA fingerprinting) के निम्नलिखित चरणों (steps) को क्रमिक रूप से व्यवस्थित कीजिए :
  • (अ) जेल वैद्युतकर्णसंचलन (gel electrophoresis)
  • (ब) डी.एन.ए. का अलगाव (isolation of DNA)
  • (क) सदर्न ब्लॉटिंग (southern blotting)
  • (ड) प्रतिबंध पाचन (restriction digestion)
उत्तर: सही क्रम है: (ब) → (ड) → (अ) → (क)
1. डी.एन.ए. का अलगाव
2. प्रतिबंध पाचन
3. जेल वैद्युतकर्णसंचलन
4. सदर्न ब्लॉटिंग
प्र. ५. मानव शुक्राणु (sperm) तथा अंडाणु (ovum) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव शुक्राणु (Sperm) मानव अंडाणु (Ovum)
यह चल (motile) और सक्रिय होता है। यह अचल (non-motile) और निष्क्रिय होता है।
आकार में बहुत छोटा होता है। कोशिका द्रव्य के कारण आकार में बड़ा होता है।
माइटोकॉन्ड्रिया मध्य भाग में सर्पिल रूप में व्यवस्थित होते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं।
X या Y गुणसूत्र होता है। केवल X गुणसूत्र होता है।
प्र. ६. जीन चिकित्सा (gene therapy) के उपयोग लिखिए।
उत्तर: जीन चिकित्सा के उपयोग:
  • दोषपूर्ण जीन का प्रतिस्थापन: जैसे, ADA की कमी के कारण SCID का उपचार।
  • कैंसर कोशिकाओं का विनाश: ऐसे जीन डालना जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर सकें।
  • आनुवंशिक रोगों जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस, हीमोफिलिया आदि का उपचार।
  • उपचारात्मक प्रोटीन बनाने वाले जीनों को शरीर में पहुंचाना।
प्र. ७. निम्नलिखित पदों को परिभाषित कीजिए :
(अ) जीन प्रवाह (gene flow)
(ब) गुणसूत्री विपधन (chromosomal aberrations)
उत्तर:

(अ) जीन प्रवाह: किसी आबादी (population) में नए जीवों या युग्मकों के आगमन से जीन (एलील) का स्थानांतरण जीन प्रवाह कहलाता है।

(ब) गुणसूत्री विपधन: गुणसूत्र की संरचना में होने वाले परिवर्तन (जैसे विलोपन, द्विगुणन, प्रतिलोमन) जो जीन की व्यवस्था को बदल देते हैं, गुणसूत्री विपधन कहलाते हैं।

प्र. ८. द्विनिषेचन (double fertilization) का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
  • इसके परिणामस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है जो भ्रूण में विकसित होता है।
  • त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) बनता है, जो विकासशील भ्रूण को पोषण देने के लिए भ्रूणपोष (endosperm) में विकसित होता है।
  • यह पौधे के जीवन चक्र में द्विगुणित स्थिति को बहाल करता है।
  • यह ऊर्जा की बर्बादी को रोकता है क्योंकि भ्रूणपोष का निर्माण निषेचन के बाद ही होता है।
प्र. ९. जड़ों द्वारा पानी के उदग्रहण (uptake) के संबंध में ‘A’ तथा ‘B’ की पहचान कीजिए तथा परिभाषित कीजिए :
[जड़ कोशिकाओं में जल मार्ग का आरेख]
उत्तर:

A - एपोप्लास्ट पथ (Apoplast pathway): यह कोशिका भित्ति और अंतरकोशिकीय स्थानों के माध्यम से पानी का संचलन है, बिना किसी झिल्ली को पार किए।

B - सिमप्लास्ट पथ (Symplast pathway): यह कोशिका द्रव्य (cytoplasm) और प्लाज्मोडेस्मेटा (plasmodesmata) के माध्यम से एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पानी का संचलन है।

प्र. १०. सहजीविता (mutualism) का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सहजीविता दो अलग-अलग प्रजातियों के बीच एक जैविक अंतःक्रिया है जिसमें दोनों जीवों को लाभ होता है। प्राकृतिक परिस्थितियों में एक दूसरे के बिना उनका जीवित रहना कठिन होता है।
उदाहरण: लाइकेन (शैवाल और कवक के बीच संबंध), माइकोराइजा (कवक और उच्च पौधों की जड़ों के बीच संबंध)।
प्र. ११. जल अवशोषण (water absorption) को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले कारक:
  • उपलब्ध मृदा जल: केशिका जल (capillary water) होने पर अवशोषण अधिकतम होता है।
  • मृदा विलयन की सांद्रता: मिट्टी में लवणों की अधिक सांद्रता अवशोषण को कम करती है।
  • मृदा वातन (Aeration): खराब वातन वाली मिट्टी अवशोषण को कम करती है क्योंकि जड़ों को श्वसन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
  • तापमान: अनुकूल तापमान (20°C से 30°C) पर अवशोषण अधिकतम होता है।
  • वाष्पोत्सर्जन: वाष्पोत्सर्जन की उच्च दर जल अवशोषण की दर को बढ़ाती है।
प्र. १२. विभेदन (differentiation) तथा पुनर्विभेदन (redifferentiation) क्या है?
उत्तर:

विभेदन: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा मेरिस्टेमेटिक कोशिकाएं (विभज्योतक) परिपक्व होती हैं और विशिष्ट कार्य करने के लिए विशिष्ट संरचना प्राप्त करती हैं।

पुनर्विभेदन: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा निर्विभेदित (dedifferentiated) कोशिकाएं (जिन्होंने विभाजन की क्षमता पुनः प्राप्त कर ली थी) अपनी विभाजन क्षमता खो देती हैं और फिर से विशिष्ट कार्य करने के लिए परिपक्व हो जाती हैं (जैसे, द्वितीयक जाइलम/फ्लोएम का बनना)।

प्र. १३. श्वसन तंत्र (respiratory system) से संबंधित दिए गए लक्षणों द्वारा उचित विकार (disorder) का चयन कीजिए तथा पुनः लिखिए :
[ शिरानालशोथ (sinusitis), वातस्फीति (emphysema), सिलिकामयता (silicosis) तथा ऐस्बेस्टॉसिस (asbestosis), कंठशोथ (laryngitis) ]

(अ) वायुकोष (alveoli) का टूटना तथा साँस लेने में कठिनाई।

उत्तर: वातस्फीति (Emphysema)

(ब) साइनस (sinuses) में सूजन, बलगम रिसाव (mucous discharge)।

उत्तर: शिरानालशोथ (Sinusitis)

(क) कंठनली (larynx) में सूजन, स्वररज्जु (vocal cord) तथा गलशोथ (sore throat), आवाज में कर्कशता (hoarseness of voice), बलगम का निर्माण तथा खांसी (cough)।

उत्तर: कंठशोथ (Laryngitis)

(ड) तंतुमयता (fibrosis) की सूजन, फेफड़ों में क्षति (lung damage)।

उत्तर: सिलिकामयता (Silicosis) तथा ऐस्बेस्टॉसिस (Asbestosis)
प्र. १४. प्राथमिक वहितमल उपचार (preliminary treatment of sewage) में आवेष्टित चरणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: प्राथमिक उपचार में सीवेज से बड़े और छोटे कणों को भौतिक रूप से हटाया जाता है। इसके चरण हैं:
  1. छानना (Screening): तैरते हुए मलबे जैसे प्लास्टिक, कपड़े आदि को हटाने के लिए सीवेज को जाली से गुजारा जाता है।
  2. ग्रिट चेंबर (Grit Chamber): सीवेज को ग्रिट चेंबर में भेजा जाता है जहाँ प्रवाह की गति कम कर दी जाती है। इससे भारी ठोस कण जैसे रेत, कंकड़ आदि नीचे बैठ जाते हैं।

विभाग - क (SECTION – C)

निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [24]

प्र. १५. hn-RNA से m-RNA के निर्माण में आवेष्टित विभिन्न चरणों को लिखिए।
उत्तर: यूकैरियोट्स में hn-RNA को क्रियाशील m-RNA में बदलने की प्रक्रिया में शामिल चरण:
  1. स्प्लिसिंग (Splicing): इसमें इंट्रॉन (अक्रियाशील भाग) को हटा दिया जाता है और एक्सॉन (क्रियाशील भाग) को एक निश्चित क्रम में जोड़ा जाता है।
  2. कैपिंग (Capping): hn-RNA के 5'-सिरे पर मिथाइल ग्वानोसिन ट्राइफॉस्फेट जोड़ा जाता है।
  3. टेलिंग (Tailing): 3'-सिरे पर एडेनाइलेट अवशेष (200-300) जोड़े जाते हैं।
पूर्ण संसाधित hn-RNA को अब m-RNA कहा जाता है जो केंद्रक से बाहर आता है।
प्र. १६. प्रजनन अलगाव (reproductive isolation) क्या है? पूर्व युग्मन (premating) तथा युग्मन के बाद (post mating) की विलगन क्रियाविधि (isolating mechanism) प्रत्येक के किन्हीं दो प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

प्रजनन अलगाव: यह वह तंत्र है जो दो अलग-अलग प्रजातियों की आबादी के बीच अंतःप्रजनन को रोकता है।

पूर्व युग्मन तंत्र (निषेचन को रोकते हैं):

  • कालिक अलगाव (Temporal Isolation): प्रजातियां दिन या साल के अलग-अलग समय पर प्रजनन करती हैं।
  • पारिस्थितिक अलगाव (Habitat Isolation): प्रजातियां एक ही क्षेत्र में अलग-अलग आवासों में रहती हैं।

युग्मन पश्चात तंत्र (संकर के अस्तित्व को रोकते हैं):

  • संकर बंध्यता (Hybrid Sterility): संकर बनते हैं लेकिन वे बाँझ होते हैं (उदा. खच्चर)।
  • युग्मनज मृत्यु (Zygote Mortality): निषेचन होता है, लेकिन युग्मनज विकसित होने से पहले मर जाता है।
प्र. १७. उपार्जित प्रतिरक्षण (acquired immunity) के विशिष्ट लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: उपार्जित प्रतिरक्षा के विशिष्ट लक्षण:
  1. विशिष्टता (Specificity): यह एक विशिष्ट रोगजनक के लिए विशिष्ट होती है।
  2. विविधता (Diversity): यह विभिन्न प्रकार के रोगजनकों को पहचान सकती है।
  3. स्व और पर में भेद (Discrimination between Self and Non-self): यह शरीर की अपनी कोशिकाओं और विदेशी अणुओं के बीच अंतर कर सकती है।
  4. स्मृति (Memory): जब प्रतिरक्षा प्रणाली पहली बार किसी रोगजनक का सामना करती है, तो वह एक स्मृति बना लेती है। दूसरी बार उसी रोगजनक के हमले पर प्रतिक्रिया तेज और मजबूत होती है।
प्र. १८. अण्डाशय (ovaries) से स्रावित होने वाले हॉर्मोन्स का नाम लिखिए तथा उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर: अंडाशय द्वारा स्रावित हार्मोन:
  • एस्ट्रोजन (Estrogen): यह विकसित हो रहे पुटकों (follicles) द्वारा स्रावित होता है। यह मादा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है।
  • प्रोजेस्टेरोन (Progesterone): यह कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा स्रावित होता है। यह गर्भावस्था को बनाए रखने और एंडोमेट्रियम को मोटा करने के लिए आवश्यक है।
  • रिलैक्सिन (Relaxin): यह प्रसव के समय श्रोणि स्नायुबंधन (pelvic ligaments) को शिथिल करता है।
  • इन्हिबिन (Inhibin): यह FSH के स्राव को रोकता है।
प्र. १९. पी.सी.आर. तकनीक (PCR technique) में आवेष्टित विभिन्न चरणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: PCR (पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन) में तीन मुख्य चरण होते हैं:
  1. निष्क्रियकरण (Denaturation) (94-98°C): डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए को गर्म करके दोनों लड़ों को अलग किया जाता है।
  2. तापानुशीलन (Annealing) (40-60°C): प्राइमर्स (छोटे डीएनए अनुक्रम) डीएनए टेम्प्लेट के पूरक अनुक्रमों से जुड़ते हैं।
  3. विस्तारण (Extension) (72°C): एंजाइम टैक पोलीमरेज़ (Taq polymerase) प्राइमर्स का विस्तार करता है और नए डीएनए स्ट्रैंड को संश्लेषित करता है।
प्र. २०. उपरोक्त चित्र में A, B तथा C की पहचान कीजिए तथा उनके कार्य लिखिए।
[रक्त कोशिकाओं का चित्र: A (न्यूट्रोफिल), B (ईओसिनोफिल), C (मोनोसाइट)]
उत्तर:
  • A: न्यूट्रोफिल (Neutrophil) (बहु-लूबित केंद्रक)।
    कार्य: फागोसाइटोसिस (रोगाणुओं को खाना और नष्ट करना)।
  • B: ईओसिनोफिल (Eosinophil) (द्वि-लूबित केंद्रक)।
    कार्य: एलर्जी प्रतिक्रियाओं और परजीवी संक्रमण में भूमिका; हिस्टामिनेज का स्राव।
  • C: मोनोसाइट (Monocyte) (किडनी के आकार का केंद्रक)।
    कार्य: फागोसाइटोसिस; ये ऊतकों में जाकर मैक्रोफेज में बदल जाते हैं।
प्र. २१. मूल दाब सिद्धांत (root pressure theory) की सीमाएँ (limitations) क्या हैं?
उत्तर: मूल दाब सिद्धांत की सीमाएँ:
  • यह सभी पौधों में नहीं पाया जाता (उदा. जिम्नोस्पर्म/अनावृतबीजी में अनुपस्थित)।
  • मूल दाब का मान कम (आमतौर पर 1-2 बार) होता है, जो ऊंचे पेड़ों में पानी चढ़ाने के लिए अपर्याप्त है।
  • दिन के समय जब वाष्पोत्सर्जन अधिक होता है, मूल दाब अक्सर नहीं देखा जाता।
  • यह एक धीमी प्रक्रिया है।
प्र. २२. ग्रीन हाउस प्रभाव (green house effect) की व्याख्या इसके लिए जिम्मेदार गैसों तथा उनके स्रोतों (sources) के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

ग्रीन हाउस प्रभाव: यह वह प्राकृतिक घटना है जिसमें वायुमंडल की कुछ गैसें पृथ्वी की सतह से निकलने वाली ऊष्मा (अवरक्त विकिरण) को रोक लेती हैं, जिससे पृथ्वी गर्म रहती है।

जिम्मेदार गैसें और स्रोत:

  • कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)): जीवाश्म ईंधन का जलना, वनों की कटाई।
  • मीथेन (\( CH_4 \)): धान के खेत, जुगाली करने वाले पशु।
  • CFCs: रेफ्रिजरेटर, एरोसोल।
  • नाइट्रस ऑक्साइड (\( N_2O \)): रासायनिक उर्वरक।
प्र. २३. एथिलीन के क्रियात्मक प्रभाव (physiological effects) तथा उपयोगों (application) का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

क्रियात्मक प्रभाव:

  • फलों को पकाना (climacteric fruits)।
  • पत्तियों और फूलों के विलगन (abscission) को प्रेरित करना।
  • बीज और कली की प्रसुप्ति (dormancy) को तोड़ना।

उपयोग:

  • केला, आम जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए (Ethephon)।
  • अनानास में पुष्पन शुरू करने के लिए।
  • ककड़ी में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाने के लिए।
प्र. २४. I, IV तथा VII कपालीय तंत्रिकाओं (cranial nerves) के नाम तथा प्रकार (type) लिखिए।
उत्तर:
  • I (पहली) कपालीय तंत्रिका: Olfactory (घ्राण तंत्रिका)। प्रकार: संवेदी (Sensory)।
  • IV (चौथी) कपालीय तंत्रिका: Trochlear (ट्रोकलियर)। प्रकार: प्रेरक (Motor)।
  • VII (सातवीं) कपालीय तंत्रिका: Facial (चेहरे की तंत्रिका)। प्रकार: मिश्रित (Mixed)।
प्र. २५. ऊर्जा के पिरामिड (pyramid of energy) का वर्णन चित्र की सहायता से कीजिए।
उत्तर:

ऊर्जा का पिरामिड एक पारिस्थितिकी तंत्र में प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का चित्रमय निरूपण है। यह हमेशा सीधा (upright) होता है क्योंकि प्रत्येक स्थानांतरण पर ऊष्मा के रूप में ऊर्जा की हानि होती है (10% नियम के अनुसार)।

  • आधार (उत्पादक): सर्वाधिक ऊर्जा।
  • प्राथमिक उपभोक्ता: उत्पादकों से कम ऊर्जा।
  • शीर्ष उपभोक्ता: सबसे कम ऊर्जा।
[चित्र: सीधा पिरामिड - उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी]
प्र. २६. लाख (lac) क्या है? लाख का आर्थिक महत्त्व लिखिए।
उत्तर:

लाख: यह मादा लाख कीट (Tacchardia lacca) की त्वचा ग्रंथियों द्वारा स्रावित एक राल जैसा पदार्थ है।

आर्थिक महत्त्व:

  • चूड़ियाँ, खिलौने और गहने बनाने में।
  • सीलिंग वैक्स (लाख), पॉलिश और वार्निश में।
  • विद्युत रोधी सामग्री (insulation) में।
  • स्याही और दर्पण बनाने में।

विभाग - ड (SECTION – D)

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [12]

प्र. २७. वृषण की औतिकीय संरचना (histological structure of Testis) का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र द्वारा वर्णन कीजिए।
उत्तर:

वृषण की औतिकीय संरचना में संयोजी ऊतक में धंसी हुई अनेक शुक्रजनक नलिकाएं (seminiferous tubules) होती हैं।

  • शुक्रजनक नलिकाएं: प्रत्येक नलिका जनन उपकला (Germinal Epithelium) द्वारा आस्तरित होती है जिसमें दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं:
    1. जनन कोशिकाएं (Spermatogonia): ये शुक्राणुजनन (spermatogenesis) द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।
    2. सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli cells): ये विकसित हो रहे शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
  • अंतराली ऊतक: नलिकाओं के बीच के स्थान में रक्त वाहिकाएं और लीडिग कोशिकाएं (Leydig cells) होती हैं जो नर हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्राव करती हैं।
[चित्र: वृषण की अनुप्रस्थ काट - शुक्रजनक नलिकाएं, शुक्राणु, सर्टोली कोशिकाएं, लीडिग कोशिकाएं]
प्र. २८. गुणसूत्री विकार (chromosomal disorder) क्या है? टर्नर सिंड्रोम (Turner’s syndrome) तथा क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter’s syndrome) का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

गुणसूत्री विकार: गुणसूत्रों की संख्या में कमी या अधिकता या उनकी असामान्य व्यवस्था के कारण होने वाले विकार।

टर्नर सिंड्रोम (45, X0):

  • कारण: मादाओं में एक X गुणसूत्र की अनुपस्थिति (Monosomy)।
  • लक्षण: बाँझ महिलाएं, अविकसित अंडाशय, द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का अभाव, छोटा कद।

क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (47, XXY):

  • कारण: पुरुषों में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र की उपस्थिति (Trisomy)।
  • लक्षण: बाँझ पुरुष, लंबा कद, स्तनों का विकास (Gynecomastia), अविकसित वृषण।
प्र. २९. प्लेनेरिया (planaria) में तंत्रिका तंत्र (nervous system) का स्वच्छ एवं नामांकित आकृति द्वारा वर्णन कीजिए।
उत्तर:

प्लेनेरिया में सीढ़ीनुमा (ladder-type) तंत्रिका तंत्र पाया जाता है।

  • गुच्छिका (Ganglia): सिर क्षेत्र में एक जोड़ी सेरेब्रल गैन्ग्लिया (मस्तिष्क) मौजूद होता है।
  • तंत्रिका रज्जु (Nerve Cords): गैन्ग्लिया से दो अनुदैर्ध्य तंत्रिका रज्जु निकलकर शरीर के पीछे तक जाती हैं।
  • अनुप्रस्थ कमिसर: अनुदैर्ध्य तंत्रिका रज्जु अनुप्रस्थ तंत्रिकाओं द्वारा जुड़ी होती हैं, जिससे यह सीढ़ी जैसा दिखता है।
  • संवेदी अंग: सिर में नेत्र बिंदु (Eye spots) पाए जाते हैं।
[चित्र: प्लेनेरिया - नेत्र बिंदु, गैन्ग्लिया, और सीढ़ीनुमा तंत्रिका तंत्र]
प्र. ३०. निम्नलिखित पदों (terms) की व्याख्या कीजिए :
(अ) रोपण (grafting)
(ब) असंगजनन (apomixis)
(क) बहुभ्रूणता (polyembryony)
(ड) अनिषेक फलन (parthenocarpy)
उत्तर:

(अ) रोपण (Grafting): यह कायिक प्रवर्धन की एक विधि है जिसमें दो पौधों के हिस्सों को इस तरह जोड़ा जाता है कि वे एक पौधे के रूप में बढ़ें। जड़ वाले भाग को 'स्टॉक' और तने वाले भाग को 'सियन' (Scion) कहते हैं।

(ब) असंगजनन (Apomixis): बिना निषेचन के बीज बनने की प्रक्रिया। यह अलैंगिक प्रजनन है जो लैंगिक प्रजनन की नकल करता है।

(क) बहुभ्रूणता (Polyembryony): एक बीज में एक से अधिक भ्रूणों का होना। (उदा. नींबू, आम)।

(ड) अनिषेक फलन (Parthenocarpy): बिना निषेचन के फल बनने की प्रक्रिया। ऐसे फल बीजरहित होते हैं (उदा. केला, अंगूर)।

प्र. ३१. दी गई आकृति A तथा B की व्याख्या कीजिए। अंतः श्वसन (inspiration) तथा उच्छ्वसन (expiration) के दौरान होने वाले परिवर्तनों को लिखिए।
[आकृति A: उच्छ्वसन (Expiration)]    [आकृति B: अंतः श्वसन (Inspiration)]
उत्तर:

व्याख्या:

  • आकृति A: उच्छ्वसन (साँस छोड़ना) को दर्शाती है।
  • आकृति B: अंतः श्वसन (साँस लेना) को दर्शाती है।

होने वाले परिवर्तन:

अंतः श्वसन (आकृति B) उच्छ्वसन (आकृति A)
पसलियां और स्टर्नम ऊपर और बाहर की ओर बढ़ते हैं। पसलियां और स्टर्नम नीचे और अंदर की ओर बढ़ते हैं।
डायाफ्राम (Diaphragm) सिकुड़ता है और चपटा हो जाता है। डायाफ्राम शिथिल होता है और गुंबद के आकार का हो जाता है।
वक्षीय आयतन बढ़ता है, दबाव कम होता है। वक्षीय आयतन कम होता है, दबाव बढ़ता है।
हवा फेफड़ों में भर जाती है। हवा फेफड़ों से बाहर निकल जाती है।