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SSC Hindi (Lokbharati) Question Paper Solution 2024 | Maharashtra Board Class 10 Answer Key

SSC Hindi (Lokbharati) Full Solution 2024

Subject: Hindi (Course N 582) | Year: March 2024 | Marks: 80

विभाग 1 – गद्य : 20 अंक

1. (अ) पठित गद्यांश (टाँग से ज्यादा फिक्र...)

(1) निम्नलिखित वाक्य पूर्ण कीजिए :
(i) मरीज का आराम हराम तब हो जाता है जब — मिलने-जुलने वाले कई बार इतने अधिक आते हैं और परेशान करते हैं।
(ii) जब मिलने वालों का खयाल लेखक को आता है तब — उन्हें लगता है उनकी दूसरी टाँग भी टूट गई।
(2) उत्तर लिखिए :
(i) हमदर्दी जताने वालों की फिक्र करने वाला — लेखक
(ii) लेखक को परेशान करने वाले — मिलने-जुलने वाले लोग
(iii) मरीज को मिलने के संबंध में यहाँ समय का बंधन पाला जाता है — जनरल वार्ड
(iv) मरीज को इसके कारण नींद नहीं आती — दर्द के मारे
(3) भाषिक कृति :
(i) गद्यांश में आई हुई एक समानार्थी शब्द की जोड़ी : वक्त - समय
(ii) गद्यांश में प्रयुक्त दो उर्दू शब्द : फ़िक्र, हमदर्दी (अन्य: मरीज, अहसान)
(4) स्वमत अभिव्यक्ति : 'आराम हराम है'
'आराम हराम है' का नारा पंडित नेहरू ने दिया था। जीवन में सफलता पाने के लिए निरंतर परिश्रम आवश्यक है। जो व्यक्ति आलस्य में पड़कर आराम ढूंढता है, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता। मरीज के संदर्भ में भी, यदि उसे अनावश्यक आराम (मिलने वालों की वजह से बाधा) नहीं मिलता, तो स्वास्थ्य लाभ मुश्किल हो जाता है। अतः कर्म ही पूजा है और आलस्य शत्रु है।

1. (आ) पठित गद्यांश (अभी समाज में यह चल रहा है...)

(1) उत्तर लिखिए :
(i) समाज में अपनी आजीविका बहुत से लोग इससे चलाते हैं — शरीर श्रम से
(ii) समाज में अपनी आजीविका थोड़े लोग इससे चलाते हैं — बौद्धिक श्रम से
(iii) आराम में रहने वाले लोगों के पास यह अधिक है — संपत्ति
(iv) अनेक लोगों में इसकी आदत नहीं है — श्रम करने की
(2) कृति पूर्ण कीजिए :
गद्यांश में उल्लेखित यज्ञ:
संपत्ति दान यज्ञ
भूदान यज्ञ
धनिकों के दान से होने वाले सामाजिक कार्य:
अस्पताल
विद्यालय
(3) (i) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
उपसर्गयुक्त शब्द ← श्रम → प्रत्यययुक्त शब्द
उपसर्गयुक्त: परिश्रम / विश्राम
प्रत्यययुक्त: श्रमिक / श्रमजीवी
(3) (ii) गद्यांश में प्रयुक्त शब्दयुग्म :
साधन-सामग्री (वाक्य: आजीविका के लिए साधन-सामग्री आवश्यक है।)
(4) स्वमत : 'करोगे दान पाओगे समाधान'
दान देना भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है। जब हम अपनी कमाई का कुछ अंश जरूरतमंदों को देते हैं, तो उससे जो आत्मिक शांति और समाधान मिलता है, वह अनमोल है। दान केवल धन का ही नहीं, बल्कि विद्या, समय और श्रम का भी हो सकता है। परोपकार करने से मन का अहंकार मिटता है और हृदय में खुशी का संचार होता है।

1. (इ) अपठित गद्यांश (सन् 1911 में...)

(1) उत्तर लिखिए :
ढाका कॉलेज से परीक्षा में:
द्वितीय स्थान पाने वाले:
मेघनाथ साहा
तृतीय स्थान पाने वाले:
निखिल रंजन सेन
गद्यांश में उल्लेखित:
दल: सबूज पत्र
सदस्य: प्रमथा चौधरी
(2) स्वमत : 'ज्ञान देने से ज्ञान बढ़ता है'
ज्ञान एकमात्र ऐसा धन है जो खर्च करने से घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है। जब हम अपना ज्ञान दूसरों के साथ साझा करते हैं, तो हमारी अपनी समझ और गहरी होती है। सत्येंद्रनाथ बोस भी अपने खाली समय में अपने मित्रों को पढ़ाया करते थे, जिससे उन्हें स्वयं बहुत लाभ हुआ। अतः विद्यादान महादान है।

विभाग 2 – पद्य : 12 अंक

2. (अ) पठित पद्यांश (किसी का हमने छीना नहीं...)

(1) उत्तर लिखिए :
वचन में — सत्य
संचय में — दान
भुजा में — शक्ति
प्रतिज्ञा में — टेव
(2) (i) गद्यांश से विलोम शब्द की जोड़ी :
संचय × दान
(2) (ii) निम्नलिखित शब्दों के वचन पहचानकर लिखिए :
(i) भारत — एकवचन
(ii) भुजाएँ — बहुवचन
(3) अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ :
कवि कहते हैं कि भारतवासियों की नसों में आज भी वही पूर्वजों का रक्त बह रहा है। हमारे पास वही देश है, वही साहस है और वही ज्ञान है। हम वही शांति और शक्ति के पुजारी हैं, हम उसी ईश्वर की संतान हैं। हम इसी देश के लिए जीते हैं और हमें अभिमान है कि हम भारतीय हैं। आवश्यकता पड़ने पर हम अपने प्रिय भारतवर्ष पर अपना सब कुछ न्योछावर करने के लिए तैयार हैं।

2. (आ) पठित पद्यांश (घन घमंड नभ गरजत...)

(1) विधान सत्य अथवा असत्य पहचानिए :
(i) उपर्युक्त पद्यांश में शिशिर ऋतु का वर्णन किया है → असत्य (वर्षा ऋतु)
(ii) श्री राम जी का मन डर रहा है → सत्य
(iii) दुष्ट व्यक्ति का प्रेम स्थिर नहीं होता है → सत्य
(iv) सद्गुण एक-एक करके अपने आप सज्जन व्यक्ति के पास आ जाते हैं → सत्य
(2) (i) पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए :
(1) दुष्ट — खल
(2) विद्वान — बुध
(2) (ii) लिंग पहचानिए :
(1) बूँद → स्त्रीलिंग
(2) गिरि → पुल्लिंग
(3) किन्हीं दो पंक्तियों का सरल अर्थ :
"क्षुद्र नदी भरि चली तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई॥"
अर्थ: छोटी नदियाँ वर्षा का जल पाकर अपने किनारों को तोड़ती हुई बहने लगती हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे ओछे या दुष्ट लोग थोड़ा सा धन पाकर घमंड में इतराने लगते हैं।

विभाग 3 – पूरक पठन : 8 अंक

3. (अ) पठित गद्यांश (इस वर्ष बड़ी भीषण गर्मी...)

(1) संजाल पूर्ण कीजिए : लेखक के मन को सुकून देने वाले प्राकृतिक घटक
प्राकृतिक सौंदर्य
हरे-भरे पहाड़
पहाड़ों की नीरवता
हल्का-सा शोर (झरने)
(2) स्वमत : 'प्रकृति मन को प्रसन्न करती है'
प्रकृति मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र है। जब हम थकान या तनाव महसूस करते हैं, तो प्रकृति की गोद में जाने से मन को असीम शांति मिलती है। हरे-भरे पेड़, ठंडी हवा, झरनों का संगीत और पक्षियों की चहचहाहट हमारे मन से सारी चिंताएँ दूर कर देती है। प्रकृति का सानिध्य हमारे अंदर नई ऊर्जा और प्रसन्नता भर देता है।

3. (आ) पठित पद्यांश (काँटों के बीच...)

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए :
(i) खिलखिलाता फूलप्रेरणा
(ii) भीतरीकुंठा
(iii) खाराजल
(iv) पावनमन
(2) स्वमत : 'काँटों के बीच खिलनेवाला फूल प्रेरणा देता है'
गुलाब का फूल काँटों के बीच खिलकर भी अपनी सुंदरता और सुगंध बिखेरता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ या मुसीबतें (काँटे) क्यों न हों, हमें हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी विपरीत हों, हमें अपनी अच्छाई और सकारात्मकता नहीं छोड़नी चाहिए। संघर्षों के बीच ही व्यक्तित्व निखरता है।

विभाग 4 – भाषा अध्ययन (व्याकरण) : 14 अंक

क्र.प्रश्नउत्तर
1 शब्द भेद पहचानिए
'क्या तुम कॉलेज में पढ़ी हो ?'
तुम — पुरुषवाचक सर्वनाम
2 अव्यय का वाक्य प्रयोग
(i) धीरे-धीरे
(ii) लेकिन
(i) कछुआ धीरे-धीरे चलता है।
(ii) वह दौड़ा लेकिन बस छूट गई।
3 संधि विच्छेद/भेद
(i) महा + आत्मा
(ii) दुस्साहस
(i) महात्मा (स्वर संधि)
(ii) दुः + साहस (विसर्ग संधि)
4 सहायक क्रिया
(i) बढ़ गए
(ii) खोल दिया
(i) गए — जाना
(ii) दिया — देना
5 प्रेरणार्थक रूप
(i) चलना
(ii) मिलना
(i) चलाना — चलवाना
(ii) मिलाना — मिलवाना
6 मुहावरे
(i) टाँग अड़ाना
(ii) गला फाड़ना
अथवा चयन:
(i) बाधा डालना।
(ii) जोर से चिल्लाना।
चयन: रोते हुए बच्चे को गोद में उठाकर माँ हाथ फेरने लगी।
7 कारक
(i) मकान पर
(ii) इशारे के लिए
(i) अधिकरण कारक
(ii) संप्रदान कारक
8 विराम-चिह्न
हाँ मेरे पास बहुत से पत्र आते हैं
"हाँ, मेरे पास बहुत-से पत्र आते हैं।"
9 काल परिवर्तन
(i) मानू को... (सामान्य भविष्य)
(ii) दोनों ही... (अपूर्ण भूत)
(iii) वे पुस्तक... (पूर्ण वर्तमान)
(i) मानू को ससुराल पहुँचाने मैं ही जाऊँगा।
(ii) दोनों ही देर तक फूट-फूटकर रो रहे थे।
(iii) उन्होंने पुस्तक शांति से पढ़ी है।
10 वाक्य भेद/परिवर्तन
(i) भेद: मोटे तौर पर...
(ii) परिवर्तन
(i) विधानार्थक वाक्य
(ii)(1) परिचय के बिना किसी को दाखिल नहीं करना चाहिए। (निषेधार्थक)
(2) क्या थोड़ी बातें हुईं ? (प्रश्नार्थक)
11 वाक्य शुद्धिकरण (i) घर में तख्त के रखे जाने की आवाज आती है।
(ii) करामत अली की आँखों में आँसू उतर आए।
(iii) ठीक उसी समय रूपा की आँखें खुलीं।

विभाग 5 – उपयोजित लेखन : 26 अंक

5. (अ) (1) पत्रलेखन :

विषय: छोटे भाई सुयश को योग का महत्त्व समझाने हेतु पत्र।

दिनांक: ९ मार्च २०२४
प्रिय भाई सुयश,
सदा खुश रहो।
कल माँ का पत्र मिला। यह जानकर चिंता हुई कि तुम पढ़ाई के तनाव के कारण अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे रहे हो। सुयश, 'स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है'।
मैं तुम्हें योग का महत्त्व समझाना चाहता हूँ। प्रतिदिन सुबह ३० मिनट योग और प्राणायाम करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ती है। इससे स्मरण शक्ति तेज होती है और तनाव दूर होता है। मुझे उम्मीद है कि तुम अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करोगे।
तुम्हारा भाई,
राजेश शर्मा
मातोश्री छात्रावास, चिंचवड़, पुणे।
ईमेल: rajesh@abc.com

5. (अ) (2) गद्यांश आकलन (प्रश्न निर्मिति) :

गद्यांश (वाणी ईश्वर द्वारा...):
1. ईश्वर द्वारा मनुष्य को दी गई बड़ी देन कौन-सी है?
2. मनुष्य के सारे चिंतन-शास्त्र किस पर आधारित हैं?
3. गंभीर चिंतन करने वाले क्या खोज करते हैं?
4. पतंजलि ने चित्तशुद्धि के लिए क्या लिखा है?

5. (आ) (1) वृत्तांत लेखन :

गुरुकृपा विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
बीड, १६ अगस्त: स्थानीय गुरुकृपा विद्यालय में कल ७७वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह ७:३० बजे ध्वजारोहण समारोह हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने तिरंगा फहराया और सभी ने राष्ट्रगान गाया।
छात्रों ने देशभक्ति गीतों और भाषणों का सुंदर कार्यक्रम प्रस्तुत किया। प्रमुख अतिथि ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया और छात्रों को देश का जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी। अंत में मिठाई वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
--- अथवा ---

5. (आ) (1) कहानी लेखन :

शीर्षक: होशियार लड़कियाँ / समस्या का समाधान
एक गाँव में पानी की भारी समस्या थी। गाँव की लड़कियों को दूर से पानी लाना पड़ता था, जिससे उनकी पढ़ाई के लिए कम समय मिलता था। कुछ होशियार लड़कियों ने इस समस्या पर चर्चा की। उन्होंने सोचा कि केवल शिकायत करने से कुछ नहीं होगा।
उन्होंने गाँव के सरपंच और बड़ों से बात की और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का सुझाव दिया। लड़कियों के उत्साह को देखकर गाँव वालों ने श्रमदान करके एक तालाब खोदा और छतों का पानी इकट्ठा करने की व्यवस्था की। अगली बारिश में गाँव में पानी की समस्या हल हो गई। लड़कियों को पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा और उन्हें सफलता प्राप्त हुई।
सीख: दृढ़ निश्चय और सूझबूझ से बड़ी से बड़ी समस्या हल हो सकती है।

5. (आ) (2) विज्ञापन लेखन :

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क्या आप अपने खेल कौशल को निखारना चाहते हैं?

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5. (इ) निबंध लेखन :

सूचना: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए :

(1) किसान की आत्मकथा

मैं एक किसान हूँ, जिसे 'अन्नदाता' कहा जाता है। मेरा जीवन सादगी और परिश्रम की मूरत है। मैं सुबह सूरज निकलने से पहले ही अपने खेतों में पहुँच जाता हूँ और दिन भर कड़ी धूप, ठंड या बारिश की परवाह किए बिना काम करता हूँ। मेरी मेहनत से ही बंजर धरती पर फसल लहलहाती है।

जब फसल अच्छी होती है, तो मेरे परिवार और देश का पेट भरता है, जिससे मुझे बहुत खुशी मिलती है। लेकिन कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएँ, सूखा या बाढ़ मेरी सारी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। कर्ज का बोझ मुझे परेशान करता है। फिर भी, मैं हार नहीं मानता और अगली फसल के लिए फिर से जुट जाता हूँ। मेरी सरकार और समाज से बस यही उम्मीद है कि मेरे श्रम का सम्मान हो और मुझे अपनी उपज का उचित मूल्य मिले।

--- अथवा ---

(2) हमारी सैर

सैर-सपाटा जीवन में नई ताजगी और ऊर्जा भर देता है। पिछले महीने की छुट्टियों में, मैंने अपने परिवार के साथ महाबलेश्वर की सैर करने का निश्चय किया। हम सुबह जल्दी बस से निकले। रास्ते भर हरे-भरे पहाड़ और घुमावदार रास्ते मन को मोह रहे थे।

वहाँ पहुँचकर हमने सबसे पहले 'वेन्ना लेक' में नौकाविहार (Boating) का आनंद लिया। ठंडी हवा और पानी की लहरों ने सारी थकान मिटा दी। हमने वहाँ के प्रसिद्ध 'सनसेट पॉइंट' से डूबते हुए सूरज का अद्भुत दृश्य देखा। महाबलेश्वर की ताजी स्ट्रॉबेरी का स्वाद तो लाजवाब था।

दो दिन प्रकृति की गोद में बिताकर हम वापस लौटे। वह सैर न केवल मनोरंजक थी, बल्कि उसने हमें मानसिक शांति भी दी। उन पलों की यादें आज भी मेरे मन में तरोताजा हैं।

--- अथवा ---

(3) यदि पुस्तकें न होतीं...

पुस्तकें ज्ञान का भंडार और हमारी सच्ची मित्र होती हैं। कल्पना कीजिए, यदि पुस्तकें न होतीं तो क्या होता? यदि पुस्तकें न होतीं, तो मानव जाति का ज्ञान, विज्ञान और इतिहास सुरक्षित नहीं रह पाता। हमारे पूर्वजों के अनुभव और विचार हम तक कभी नहीं पहुँच पाते।

पुस्तकों के बिना शिक्षा का प्रसार असंभव हो जाता। हम रामायण, महाभारत जैसे महान ग्रंथों और न्यूटन, आइंस्टीन जैसे वैज्ञानिकों की खोजों से अनजान रह जाते। दुनिया अज्ञान के अंधकार में डूबी रहती। पुस्तकें हमें घर बैठे दुनिया की सैर कराती हैं और हमें सही राह दिखाती हैं।

सचमुच, पुस्तकों के बिना मनुष्य का विकास रुक जाता और जीवन नीरस हो जाता। पुस्तकें ही हैं जो एक पीढ़ी के ज्ञान को दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाती हैं, इसलिए इनका होना हमारे अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।

Question Paper Page No. 1 Question Paper Page No. 2 Question Paper Page No. 3 Question Paper Page No. 4 Question Paper Page No. 5 Question Paper Page No. 6 Question Paper Page No. 7 Question Paper Page No. 8 Question Paper Page No. 9 Question Paper Page No. 10 Question Paper Page No. 11 Question Paper Page No. 12 Question Paper Page No. 13 Question Paper Page No. 14 Question Paper Page No. 15 Question Paper Page No. 16 Question Paper Page No. 17 Question Paper Page No. 18 Question Paper Page No. 19 Question Paper Page No. 20 SSC Hindi March 2024 Solution

SSC Hindi (Lokbharati) Question Paper Solution 2025 | Maharashtra Board Class 10 Answer Key

SSC Hindi (Lokbharati) Full Solution 2025

Subject: Hindi (Course N 817) | Date: 03 March 2025 | Marks: 80

विभाग 1 – गद्य : 20 अंक

1. (अ) पठित गद्यांश (आँख खुली तो...)

(1) उत्तर लिखिए :
(i) गद्यांश में उल्लेखित शरीर के अंग:
टाँग
आँख / चेहरा
(ii) सार्वजनिक अस्पताल में भर्ती होना इनके मिलन जैसा है:
आत्मा
परमात्मा
(2) उत्तर लिखिए : दुर्घटना के बाद लेखक की टाँगों की अवस्था
1. एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी।
2. दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी।
(3) (i) गद्यांश में उल्लेखित अंग्रेजी शब्द लिखिए :
वार्ड, एक्सिडेंट, फ्रैक्चर, प्राइवेट (कोई दो)
(3) (ii) गद्यांश में उल्लेखित समानार्थी शब्द :
(1) रुग्णालय = अस्पताल
(2) शक्ल = चेहरा
(4) स्वमत अभिव्यक्ति : 'सार्वजनिक रुग्णालयों की स्थिति'
सार्वजनिक अस्पतालों में अक्सर भारी भीड़ और संसाधनों की कमी देखी जाती है। वहाँ साफ-सफाई का अभाव रहता है और डॉक्टर तथा कर्मचारियों की संख्या मरीजों के अनुपात में कम होती है। फिर भी, गरीब जनता के लिए ये अस्पताल जीवन की आशा होते हैं। सरकार को सुविधाओं को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

1. (आ) पठित गद्यांश (हमने अपने जीवन में...)

(1) कृति पूर्ण कीजिए :
(i) लेखक ने चाभी माँगकर ड्राइवर से कहा:
तुम बैठो, आराम करो
हम लोग वापस आते हैं अभी
(ii) लेखक के जीवन पर हुआ परिणाम:
बाबू जी के रहते: अभाव नहीं देखा
बाबू जी के न रहते: बैंक की नौकरी करनी पड़ी
(2) उत्तर लिखिए :
(i) लेखक यह कल्पना किया करते थे — कि हमारे पास छोटी नहीं, बड़ी आलीशान गाड़ी होनी चाहिए।
(ii) लेखक के जन्म के समय बाबू जी उत्तर प्रदेश में — पुलिस मंत्री थे।
(3) भाषिक कृति :
(i) विलोम शब्द की जोड़ी : छोटी × बड़ी
(ii) शब्दयुग्म : धीरे-धीरे, सोचते-विचारते
(4) स्वमत : 'सादा जीवन, उच्च विचार'
'सादा जीवन, उच्च विचार' जीवन जीने की सर्वोत्तम कला है। इसका अर्थ है कि मनुष्य को दिखावे और विलासिता से दूर रहकर अपने चरित्र और विचारों को महान बनाना चाहिए। गांधीजी और शास्त्रीजी जैसे महापुरुषों ने इसी सिद्धांत को अपनाया। सादगी हमें तनावमुक्त रखती है और उच्च विचार समाज के कल्याण की प्रेरणा देते हैं।

1. (इ) अपठित गद्यांश (परोपकार ही मानवता...)

(1) उचित शब्द चुनकर तालिका पूर्ण कीजिए :
(1) परोपकार हीमानवता
(2) केवल अपने सुख-दुख की चिंता करनापशुता
(3) पागल अथवा रोगी कीसेवा-शुश्रूषा
(4) दुखी-निराश कोसांत्वना
(2) स्वमत : 'मानवता ही सच्चा धर्म है'
संसार में मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर जाने से ज्यादा पुण्य किसी दुखी के आँसू पोंछने में है। जब हम जाति-पाति के भेद भूलकर निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, तभी हम सच्चे मनुष्य कहलाते हैं। दया और करुणा ही ईश्वर तक पहुँचने का सच्चा मार्ग है।

विभाग 2 – पद्य : 12 अंक

2. (अ) पठित पद्यांश (विजय केवल लोहे की...)

(1) कृति पूर्ण कीजिए :
चरित थे — पूत
भुजा में — शक्ति
नम्रता रही — सदा संपन्न
हृदय के गौरव में — था गर्व
(2) उत्तर लिखिए :
(i) लय-ताल युक्त शब्द : धूम - घूम, दृष्टि - सृष्टि
(ii) मूलशब्द :
  • दयालु → दया
  • प्राकृतिक → प्रकृति
(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ :
कवि कहते हैं कि भारतवासियों ने कभी शस्त्रों (लोहे) के बल पर विजय प्राप्त नहीं की, बल्कि धर्म और सत्य के बल पर दुनिया को जीता है। इसी धर्म की गूँज पूरी दुनिया में सुनाई दी। हमारे देश के प्रभाव से ही सम्राट अशोक जैसे राजाओं ने शस्त्र त्यागकर भिक्षु का वेश धारण किया और घर-घर जाकर प्रेम व दया का संदेश फैलाया।

2. (आ) पठित पद्यांश (घन घमंड नभ...)

(1) उत्तर लिखिए :
(i) गरजने वाले — घन (बादल)
(ii) चमकने वाली — दामिनि (बिजली)
(iii) बूँद के आघात सहने वाले — गिरि (पर्वत)
(iv) दुष्ट के वचन सहने वाले — संत
(2) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) शब्द अर्थ : 1. झुकना = नवहिं, 2. मटमैला = ढाबर
(ii) उपसर्गयुक्त शब्द : आघात, सद्गुण (सज्जन), निअराएँ (कोई दो)
(3) अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ :
कवि कहते हैं कि क्षुद्र नदियाँ वर्षा का जल पाकर वैसे ही इतराने लगती हैं, जैसे थोड़ा धन पाकर दुष्ट लोग घमंड करते हैं। वर्षा का जल पृथ्वी पर गिरते ही गंदा (मटमैला) हो जाता है, जैसे माया के प्रभाव से जीव (आत्मा) मलिन हो जाता है। वर्षा का जल तालाब में वैसे ही स्थिर हो जाता है, जैसे सज्जन के पास सद्गुण। नदी समुद्र में मिलकर वैसे ही स्थिर (अचल) हो जाती है, जैसे जीव ईश्वर को पाकर मोक्ष प्राप्त कर लेता है।

विभाग 3 – पूरक पठन : 8 अंक

3. (अ) पठित गद्यांश (आज फिर उसे...)

(1) कृति पूर्ण कीजिए : युवक के तर्कपूर्ण विचारों के विषय
देशप्रेम
नैतिकता
शिष्टाचार
ईमानदारी
(2) स्वमत : 'भ्रष्टाचार एक कलंक'
भ्रष्टाचार समाज के लिए एक अभिशाप है जो दीमक की तरह देश की जड़ों को खोखला कर रहा है। इससे प्रतिभावान लोगों का हक मारा जाता है और अमीर-गरीब की खाई चौड़ी होती है। यह नैतिक मूल्यों का पतन है। यदि हम एक विकसित राष्ट्र चाहते हैं, तो हमें स्वयं ईमानदार बनकर इस कलंक को मिटाना होगा।

3. (आ) पठित पद्यांश (हाइकु)

(1) आकृति पूर्ण कीजिए :
(i) हाइकु में उल्लेखित :
महीना: फागुन
त्योहार: होली (रंग-बिरंगे)
(ii) फूल की विशेषताएँ :
खिलखिलाता है
प्रेरणा देता है
(2) स्वमत : 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती'
सफलता का मूलमंत्र निरंतर प्रयास है। एक नन्हीं चींटी भी बार-बार गिरने के बाद दीवार पर चढ़ जाती है। जो व्यक्ति असफलताओं से डरकर बैठ जाता है, वह कभी सफल नहीं होता। लेकिन जो गिरकर संभलता है और दुगुने उत्साह से प्रयास करता है, जीत उसी के कदम चूमती है। कोशिश ही सफलता की कुंजी है।

विभाग 4 – व्याकरण : 14 अंक

क्र.प्रश्नउत्तर
1 अधोरेखांकित शब्द भेद
'वे हलुवा-पूड़ी और ताजी दूध-मलाई खाते हैं।'
ताजी — गुणवाचक विशेषण
2 अव्यय का वाक्य प्रयोग
(i) और (ii) के पास
(i) राम और श्याम मित्र हैं।
(ii) मंदिर के पास एक तालाब है।
3 संधि
(i) दिग्गज
(ii) सदा + एव
(i) दिक् + गज = व्यंजन संधि
(ii) सदैव = स्वर (वृद्धि) संधि
4 सहायक क्रिया
(i) रख सके
(ii) चले गए
(i) सके — सकना
(ii) गए — जाना
5 प्रेरणार्थक रूप
(i) देखना
(ii) तोड़ना
(i) दिखाना — दिखवाना
(ii) तुड़ाना — तुड़वाना
6 मुहावरे
(i) मुँह लाल होना
(ii) टाँग अड़ाना
अथवा (चयन)
(i) क्रोधित होना।
(ii) बाधा डालना।
चयन: तिलमिला जाना (क्रोध में आना = तिलमिला जाना)
7 कारक
(i) कमरे से
(ii) समय के लिए
(i) अपादान कारक
(ii) संप्रदान कारक
8 विराम-चिह्न
जल्दी जल्दी पैर बढ़ा
"जल्दी-जल्दी पैर बढ़ा।"
9 काल परिवर्तन
(i) आराम हराम हुआ है। (अपूर्ण वर्तमान)
(ii) वे बाजार से... (पूर्ण भूत)
(iii) मैंने खिड़की से... (सामान्य भविष्य)
(i) आराम हराम हो रहा है।
(ii) उन्होंने बाजार से नई पुस्तक खरीदी थी।
(iii) मैं... झिड़की के स्वर में कहूँगा।
10 वाक्य भेद/परिवर्तन
(i) भेद पहचानिए
(ii) परिवर्तन
(i) विधानार्थक वाक्य
(ii)(1) मैं आज रात का खाना त्यागूँगा / नहीं खाऊँगा (निषेधार्थक है, विधानार्थक बनाना है तो 'नहीं' हटाना होगा, पर प्रश्न में 'नहीं खाऊँगा' ही विधानार्थक रूप में पूछा है तो यह 'निषेधार्थक' है।)
सुधार: प्रश्न है "परिवर्तन कीजिए"।
(1) मैं आज रात का खाना त्याग दूँगा। (विधानार्थक)
(2) क्या मानू इतना ही बोल सकी? (प्रश्नार्थक)
11 वाक्य शुद्धिकरण (i) लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी।
(ii) घर में तख्ते के रखे जाने की आवाज आती है।
(iii) ...यात्री के प्राण मानो मुरझा गए।

विभाग 5 – उपयोजित लेखन : 26 अंक

5. (अ) (1) पत्रलेखन :

विषय: छोटे भाई सोमेश को मोबाइल के दुष्परिणाम समझाते हुए पत्र।

दिनांक: ३ मार्च २०२५
प्रिय भाई सोमेश,
सदा खुश रहो।
कल पिताजी का पत्र मिला, जिससे पता चला कि तुम आजकल पढ़ाई से ज्यादा ध्यान मोबाइल में लगा रहे हो। सोमेश, मोबाइल एक उपयोगी साधन है, लेकिन इसका लत की तरह उपयोग करना तुम्हारे भविष्य के लिए घातक है।
लगातार स्क्रीन देखने से तुम्हारी आँखों और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। यह पढ़ाई से तुम्हारा ध्यान भटकाएगा। मेरी सलाह है कि मोबाइल का उपयोग सीमित करो और मैदानी खेलों व पढ़ाई पर ध्यान दो।
तुम्हारा भाई,
रोहन चौगुले
४२, विठ्ठल नगर, पंढरपुर।
ईमेल: rohan@abc.com

5. (अ) (2) गद्यांश आकलन (प्रश्न निर्मिति) :

परिच्छेद (भारतीय वायुसेना... डॉ. गीता घोष):
1. भारतीय वायुसेना की पहली महिला पैराट्रूपर (छतरीधारी) कौन हैं?
2. डॉ. गीता घोष ने प्रशिक्षण के दौरान कितनी छलाँगें लगाईं?
3. डॉ. गीता घोष के अनुसार उनकी कौन-सी शिक्षा इस अभियान में काम आई?
4. डॉ. गीता घोष का मन किस बात से रोमांचित होता है?

5. (आ) (1) वृत्तांत लेखन :

सरस्वती विद्यालय में 'शिक्षक दिवस' समारोह संपन्न
कोल्हापुर, ६ सितंबर: कल स्थानीय सरस्वती विद्यालय में ५ सितंबर को शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध शिक्षाविद श्री पाटील ने की।
कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना से हुआ। छात्रों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानाचार्य जी ने शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डाला। छात्रों ने शिक्षकों का सम्मान गुलाब का फूल देकर किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
--- अथवा ---

5. (आ) (1) कहानी लेखन :

शीर्षक: चतुर पत्नी / किसान और चोर

एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। एक रात उसके घर में चोर घुस आए। किसान और उसकी पत्नी जाग गए, लेकिन वे डर गए क्योंकि चोर हथियारबंद थे। तभी पत्नी को एक उपाय सूझा।
उसने जोर-जोर से अपने पति से कहा, "अजी सुनिए! चोरों का डर बढ़ गया है। मैंने अपने सारे गहने और रुपये घर के पिछवाड़े बंजर जमीन में गाड़ दिए हैं।" चोरों ने यह सुना और खुश हो गए। वे तुरंत पिछवाड़े गए और रात भर बंजर जमीन खोदते रहे। उन्हें कुछ नहीं मिला, लेकिन किसान का खेत जुत गया। सुबह चोर थककर भाग गए। किसान की पत्नी की सूझबूझ से धन भी बचा और खेत भी जुत गया।
सीख: संकट में सूझबूझ से काम लेना चाहिए।

5. (आ) (2) विज्ञापन लेखन :

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5. (इ) निबंध लेखन :

सूचना: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए :

(1) किसान की आत्मकथा

मैं एक किसान हूँ, धरती का पुत्र और देश का अन्नदाता। मेरा जीवन संघर्ष और परिश्रम की अनवरत गाथा है। मेरा जन्म मिट्टी की गोद में हुआ और यही मेरी कर्मभूमि है।

मैं ब्रह्ममुहूर्त में उठता हूँ और सूर्योदय से पहले ही अपने हल-बैलों के साथ खेतों में पहुँच जाता हूँ। चाहे जेठ की तपती धूप हो, कड़ाके की ठंड हो या मूसलाधार बारिश, मैं कभी विश्राम नहीं करता। मेरा पसीना जब मिट्टी में मिलता है, तब जाकर फसल सोना बनकर लहलहाती है। जब खेत हरे-भरे होते हैं, तो मेरा मन गर्व से भर जाता है।

लेकिन मेरे जीवन में वेदना भी कम नहीं है। कभी सूखा तो कभी बाढ़ मेरी साल भर की मेहनत को नष्ट कर देती है। महंगाई और कर्ज का बोझ मेरी कमर तोड़ देता है। फिर भी, मैं अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता क्योंकि पूरा देश मेरे ही उगाए अनाज पर जीवित है। मेरी बस इतनी अभिलाषा है कि मुझे मेरे श्रम का उचित मूल्य और समाज में सम्मान मिले। जय जवान, जय किसान!

--- अथवा ---

(2) भारत का चंद्रयान मिशन-3

२३ अगस्त २०२३ का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। यह वह गौरवशाली क्षण था जब भारत के 'चंद्रयान-३' ने चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की इस सफलता ने पूरे विश्व में भारत का मस्तक ऊँचा कर दिया।

चंद्रयान-३ का 'विक्रम लैंडर' चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा, जहाँ आज तक कोई भी देश नहीं पहुँच सका था। इस स्थान को अब 'शिवशक्ति पॉइंट' नाम दिया गया है। लैंडर से बाहर निकले 'प्रज्ञान रोवर' ने वहाँ की मिट्टी और खनिजों का अध्ययन कर दुनिया को नई जानकारी दी।

यह मिशन न केवल विज्ञान की जीत है, बल्कि यह हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और संकल्प का परिणाम है। इस सफलता ने भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बना दिया है और यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब किसी से पीछे नहीं है। यह मिशन विकसित भारत की ओर एक मजबूत कदम है।

--- अथवा ---

(3) चाँदनी रात की सैर

प्रकृति का सौंदर्य मन को असीम शांति प्रदान करता है, और उसमें भी चाँदनी रात का सौंदर्य अद्भुत होता है। पिछले महीने की पूर्णिमा को मुझे चाँदनी रात में सैर करने का अवसर मिला, जो मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

रात के करीब १० बजे थे। आकाश में पूरा चाँद चाँदी की थाली जैसा चमक रहा था। उसकी शीतल किरणें धरती पर दूधिया चादर बिछा रही थीं। मैं अपने मित्रों के साथ नदी के किनारे टहलने निकला। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी जो दिन भर की थकान को मिटा रही थी। नदी के जल में चाँद का प्रतिबिंब लहरों के साथ खेलता हुआ प्रतीत हो रहा था।

वातावरण में एक अनोखी शांति थी। दूर कहीं झींगुरों की आवाज सन्नाटे को तोड़ रही थी। पेड़-पौधे भी चाँदनी में नहाकर शांत खड़े थे। उस समय मन की सारी चिंताएँ दूर हो गईं और एक अलौकिक खुशी का अनुभव हुआ। वह चाँदनी रात की सैर मेरे मन-मस्तिष्क पर एक अमिट छाप छोड़ गई।

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