SSC Hindi (Lokbharati) Full Solution 2025
Subject: Hindi (Course N 817) | Date: 03 March 2025 | Marks: 80
विभाग 1 – गद्य : 20 अंक
1. (अ) पठित गद्यांश (आँख खुली तो...)
2. दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी।
(2) शक्ल = चेहरा
1. (आ) पठित गद्यांश (हमने अपने जीवन में...)
(ii) लेखक के जन्म के समय बाबू जी उत्तर प्रदेश में — पुलिस मंत्री थे।
(ii) शब्दयुग्म : धीरे-धीरे, सोचते-विचारते
1. (इ) अपठित गद्यांश (परोपकार ही मानवता...)
| (1) परोपकार ही | मानवता |
| (2) केवल अपने सुख-दुख की चिंता करना | पशुता |
| (3) पागल अथवा रोगी की | सेवा-शुश्रूषा |
| (4) दुखी-निराश को | सांत्वना |
विभाग 2 – पद्य : 12 अंक
2. (अ) पठित पद्यांश (विजय केवल लोहे की...)
(ii) मूलशब्द :
- दयालु → दया
- प्राकृतिक → प्रकृति
2. (आ) पठित पद्यांश (घन घमंड नभ...)
(ii) चमकने वाली — दामिनि (बिजली)
(iii) बूँद के आघात सहने वाले — गिरि (पर्वत)
(iv) दुष्ट के वचन सहने वाले — संत
(ii) उपसर्गयुक्त शब्द : आघात, सद्गुण (सज्जन), निअराएँ (कोई दो)
विभाग 3 – पूरक पठन : 8 अंक
3. (अ) पठित गद्यांश (आज फिर उसे...)
3. (आ) पठित पद्यांश (हाइकु)
विभाग 4 – व्याकरण : 14 अंक
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | अधोरेखांकित शब्द भेद 'वे हलुवा-पूड़ी और ताजी दूध-मलाई खाते हैं।' |
ताजी — गुणवाचक विशेषण |
| 2 | अव्यय का वाक्य प्रयोग (i) और (ii) के पास |
(i) राम और श्याम मित्र हैं। (ii) मंदिर के पास एक तालाब है। |
| 3 | संधि (i) दिग्गज (ii) सदा + एव |
(i) दिक् + गज = व्यंजन संधि (ii) सदैव = स्वर (वृद्धि) संधि |
| 4 | सहायक क्रिया (i) रख सके (ii) चले गए |
(i) सके — सकना (ii) गए — जाना |
| 5 | प्रेरणार्थक रूप (i) देखना (ii) तोड़ना |
(i) दिखाना — दिखवाना (ii) तुड़ाना — तुड़वाना |
| 6 | मुहावरे (i) मुँह लाल होना (ii) टाँग अड़ाना अथवा (चयन) |
(i) क्रोधित होना। (ii) बाधा डालना। चयन: तिलमिला जाना (क्रोध में आना = तिलमिला जाना) |
| 7 | कारक (i) कमरे से (ii) समय के लिए |
(i) अपादान कारक (ii) संप्रदान कारक |
| 8 | विराम-चिह्न जल्दी जल्दी पैर बढ़ा |
"जल्दी-जल्दी पैर बढ़ा।" |
| 9 | काल परिवर्तन (i) आराम हराम हुआ है। (अपूर्ण वर्तमान) (ii) वे बाजार से... (पूर्ण भूत) (iii) मैंने खिड़की से... (सामान्य भविष्य) |
(i) आराम हराम हो रहा है। (ii) उन्होंने बाजार से नई पुस्तक खरीदी थी। (iii) मैं... झिड़की के स्वर में कहूँगा। |
| 10 | वाक्य भेद/परिवर्तन (i) भेद पहचानिए (ii) परिवर्तन |
(i) विधानार्थक वाक्य (ii)(1) मैं आज रात का खाना त्यागूँगा / नहीं खाऊँगा (निषेधार्थक है, विधानार्थक बनाना है तो 'नहीं' हटाना होगा, पर प्रश्न में 'नहीं खाऊँगा' ही विधानार्थक रूप में पूछा है तो यह 'निषेधार्थक' है।) सुधार: प्रश्न है "परिवर्तन कीजिए"। (1) मैं आज रात का खाना त्याग दूँगा। (विधानार्थक) (2) क्या मानू इतना ही बोल सकी? (प्रश्नार्थक) |
| 11 | वाक्य शुद्धिकरण | (i) लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी। (ii) घर में तख्ते के रखे जाने की आवाज आती है। (iii) ...यात्री के प्राण मानो मुरझा गए। |
विभाग 5 – उपयोजित लेखन : 26 अंक
5. (अ) (1) पत्रलेखन :
दिनांक: ३ मार्च २०२५
प्रिय भाई सोमेश,
सदा खुश रहो।
कल पिताजी का पत्र मिला, जिससे पता चला कि तुम आजकल पढ़ाई से ज्यादा ध्यान मोबाइल में लगा रहे हो। सोमेश, मोबाइल एक उपयोगी साधन है, लेकिन इसका लत की तरह उपयोग करना तुम्हारे भविष्य के लिए घातक है।
लगातार स्क्रीन देखने से तुम्हारी आँखों और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। यह पढ़ाई से तुम्हारा ध्यान भटकाएगा। मेरी सलाह है कि मोबाइल का उपयोग सीमित करो और मैदानी खेलों व पढ़ाई पर ध्यान दो।
तुम्हारा भाई,
रोहन चौगुले
४२, विठ्ठल नगर, पंढरपुर।
ईमेल: rohan@abc.com
5. (अ) (2) गद्यांश आकलन (प्रश्न निर्मिति) :
1. भारतीय वायुसेना की पहली महिला पैराट्रूपर (छतरीधारी) कौन हैं?
2. डॉ. गीता घोष ने प्रशिक्षण के दौरान कितनी छलाँगें लगाईं?
3. डॉ. गीता घोष के अनुसार उनकी कौन-सी शिक्षा इस अभियान में काम आई?
4. डॉ. गीता घोष का मन किस बात से रोमांचित होता है?
5. (आ) (1) वृत्तांत लेखन :
कोल्हापुर, ६ सितंबर: कल स्थानीय सरस्वती विद्यालय में ५ सितंबर को शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध शिक्षाविद श्री पाटील ने की।
कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना से हुआ। छात्रों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानाचार्य जी ने शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डाला। छात्रों ने शिक्षकों का सम्मान गुलाब का फूल देकर किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
5. (आ) (1) कहानी लेखन :
एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। एक रात उसके घर में चोर घुस आए। किसान और उसकी पत्नी जाग गए, लेकिन वे डर गए क्योंकि चोर हथियारबंद थे। तभी पत्नी को एक उपाय सूझा।
उसने जोर-जोर से अपने पति से कहा, "अजी सुनिए! चोरों का डर बढ़ गया है। मैंने अपने सारे गहने और रुपये घर के पिछवाड़े बंजर जमीन में गाड़ दिए हैं।" चोरों ने यह सुना और खुश हो गए। वे तुरंत पिछवाड़े गए और रात भर बंजर जमीन खोदते रहे। उन्हें कुछ नहीं मिला, लेकिन किसान का खेत जुत गया। सुबह चोर थककर भाग गए। किसान की पत्नी की सूझबूझ से धन भी बचा और खेत भी जुत गया।
सीख: संकट में सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
5. (आ) (2) विज्ञापन लेखन :
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5. (इ) निबंध लेखन :
सूचना: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए :
(1) किसान की आत्मकथा
मैं एक किसान हूँ, धरती का पुत्र और देश का अन्नदाता। मेरा जीवन संघर्ष और परिश्रम की अनवरत गाथा है। मेरा जन्म मिट्टी की गोद में हुआ और यही मेरी कर्मभूमि है।
मैं ब्रह्ममुहूर्त में उठता हूँ और सूर्योदय से पहले ही अपने हल-बैलों के साथ खेतों में पहुँच जाता हूँ। चाहे जेठ की तपती धूप हो, कड़ाके की ठंड हो या मूसलाधार बारिश, मैं कभी विश्राम नहीं करता। मेरा पसीना जब मिट्टी में मिलता है, तब जाकर फसल सोना बनकर लहलहाती है। जब खेत हरे-भरे होते हैं, तो मेरा मन गर्व से भर जाता है।
लेकिन मेरे जीवन में वेदना भी कम नहीं है। कभी सूखा तो कभी बाढ़ मेरी साल भर की मेहनत को नष्ट कर देती है। महंगाई और कर्ज का बोझ मेरी कमर तोड़ देता है। फिर भी, मैं अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता क्योंकि पूरा देश मेरे ही उगाए अनाज पर जीवित है। मेरी बस इतनी अभिलाषा है कि मुझे मेरे श्रम का उचित मूल्य और समाज में सम्मान मिले। जय जवान, जय किसान!
(2) भारत का चंद्रयान मिशन-3
२३ अगस्त २०२३ का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। यह वह गौरवशाली क्षण था जब भारत के 'चंद्रयान-३' ने चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की इस सफलता ने पूरे विश्व में भारत का मस्तक ऊँचा कर दिया।
चंद्रयान-३ का 'विक्रम लैंडर' चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा, जहाँ आज तक कोई भी देश नहीं पहुँच सका था। इस स्थान को अब 'शिवशक्ति पॉइंट' नाम दिया गया है। लैंडर से बाहर निकले 'प्रज्ञान रोवर' ने वहाँ की मिट्टी और खनिजों का अध्ययन कर दुनिया को नई जानकारी दी।
यह मिशन न केवल विज्ञान की जीत है, बल्कि यह हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और संकल्प का परिणाम है। इस सफलता ने भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बना दिया है और यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब किसी से पीछे नहीं है। यह मिशन विकसित भारत की ओर एक मजबूत कदम है।
(3) चाँदनी रात की सैर
प्रकृति का सौंदर्य मन को असीम शांति प्रदान करता है, और उसमें भी चाँदनी रात का सौंदर्य अद्भुत होता है। पिछले महीने की पूर्णिमा को मुझे चाँदनी रात में सैर करने का अवसर मिला, जो मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
रात के करीब १० बजे थे। आकाश में पूरा चाँद चाँदी की थाली जैसा चमक रहा था। उसकी शीतल किरणें धरती पर दूधिया चादर बिछा रही थीं। मैं अपने मित्रों के साथ नदी के किनारे टहलने निकला। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी जो दिन भर की थकान को मिटा रही थी। नदी के जल में चाँद का प्रतिबिंब लहरों के साथ खेलता हुआ प्रतीत हो रहा था।
वातावरण में एक अनोखी शांति थी। दूर कहीं झींगुरों की आवाज सन्नाटे को तोड़ रही थी। पेड़-पौधे भी चाँदनी में नहाकर शांत खड़े थे। उस समय मन की सारी चिंताएँ दूर हो गईं और एक अलौकिक खुशी का अनुभव हुआ। वह चाँदनी रात की सैर मेरे मन-मस्तिष्क पर एक अमिट छाप छोड़ गई।