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SSC Hindi (Lokbharati) Question Paper Solution 2025 | Maharashtra Board Class 10 Answer Key

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SSC Hindi (Lokbharati) Full Solution 2025

Subject: Hindi (Course N 817) | Date: 03 March 2025 | Marks: 80

विभाग 1 – गद्य : 20 अंक

1. (अ) पठित गद्यांश (आँख खुली तो...)

(1) उत्तर लिखिए :
(i) गद्यांश में उल्लेखित शरीर के अंग:
टाँग
आँख / चेहरा
(ii) सार्वजनिक अस्पताल में भर्ती होना इनके मिलन जैसा है:
आत्मा
परमात्मा
(2) उत्तर लिखिए : दुर्घटना के बाद लेखक की टाँगों की अवस्था
1. एक टाँग अपनी जगह पर सही-सलामत थी।
2. दूसरी टाँग रेत की थैली के सहारे एक स्टैंड पर लटक रही थी।
(3) (i) गद्यांश में उल्लेखित अंग्रेजी शब्द लिखिए :
वार्ड, एक्सिडेंट, फ्रैक्चर, प्राइवेट (कोई दो)
(3) (ii) गद्यांश में उल्लेखित समानार्थी शब्द :
(1) रुग्णालय = अस्पताल
(2) शक्ल = चेहरा
(4) स्वमत अभिव्यक्ति : 'सार्वजनिक रुग्णालयों की स्थिति'
सार्वजनिक अस्पतालों में अक्सर भारी भीड़ और संसाधनों की कमी देखी जाती है। वहाँ साफ-सफाई का अभाव रहता है और डॉक्टर तथा कर्मचारियों की संख्या मरीजों के अनुपात में कम होती है। फिर भी, गरीब जनता के लिए ये अस्पताल जीवन की आशा होते हैं। सरकार को सुविधाओं को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

1. (आ) पठित गद्यांश (हमने अपने जीवन में...)

(1) कृति पूर्ण कीजिए :
(i) लेखक ने चाभी माँगकर ड्राइवर से कहा:
तुम बैठो, आराम करो
हम लोग वापस आते हैं अभी
(ii) लेखक के जीवन पर हुआ परिणाम:
बाबू जी के रहते: अभाव नहीं देखा
बाबू जी के न रहते: बैंक की नौकरी करनी पड़ी
(2) उत्तर लिखिए :
(i) लेखक यह कल्पना किया करते थे — कि हमारे पास छोटी नहीं, बड़ी आलीशान गाड़ी होनी चाहिए।
(ii) लेखक के जन्म के समय बाबू जी उत्तर प्रदेश में — पुलिस मंत्री थे।
(3) भाषिक कृति :
(i) विलोम शब्द की जोड़ी : छोटी × बड़ी
(ii) शब्दयुग्म : धीरे-धीरे, सोचते-विचारते
(4) स्वमत : 'सादा जीवन, उच्च विचार'
'सादा जीवन, उच्च विचार' जीवन जीने की सर्वोत्तम कला है। इसका अर्थ है कि मनुष्य को दिखावे और विलासिता से दूर रहकर अपने चरित्र और विचारों को महान बनाना चाहिए। गांधीजी और शास्त्रीजी जैसे महापुरुषों ने इसी सिद्धांत को अपनाया। सादगी हमें तनावमुक्त रखती है और उच्च विचार समाज के कल्याण की प्रेरणा देते हैं।

1. (इ) अपठित गद्यांश (परोपकार ही मानवता...)

(1) उचित शब्द चुनकर तालिका पूर्ण कीजिए :
(1) परोपकार हीमानवता
(2) केवल अपने सुख-दुख की चिंता करनापशुता
(3) पागल अथवा रोगी कीसेवा-शुश्रूषा
(4) दुखी-निराश कोसांत्वना
(2) स्वमत : 'मानवता ही सच्चा धर्म है'
संसार में मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर जाने से ज्यादा पुण्य किसी दुखी के आँसू पोंछने में है। जब हम जाति-पाति के भेद भूलकर निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, तभी हम सच्चे मनुष्य कहलाते हैं। दया और करुणा ही ईश्वर तक पहुँचने का सच्चा मार्ग है।

विभाग 2 – पद्य : 12 अंक

2. (अ) पठित पद्यांश (विजय केवल लोहे की...)

(1) कृति पूर्ण कीजिए :
चरित थे — पूत
भुजा में — शक्ति
नम्रता रही — सदा संपन्न
हृदय के गौरव में — था गर्व
(2) उत्तर लिखिए :
(i) लय-ताल युक्त शब्द : धूम - घूम, दृष्टि - सृष्टि
(ii) मूलशब्द :
  • दयालु → दया
  • प्राकृतिक → प्रकृति
(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ :
कवि कहते हैं कि भारतवासियों ने कभी शस्त्रों (लोहे) के बल पर विजय प्राप्त नहीं की, बल्कि धर्म और सत्य के बल पर दुनिया को जीता है। इसी धर्म की गूँज पूरी दुनिया में सुनाई दी। हमारे देश के प्रभाव से ही सम्राट अशोक जैसे राजाओं ने शस्त्र त्यागकर भिक्षु का वेश धारण किया और घर-घर जाकर प्रेम व दया का संदेश फैलाया।

2. (आ) पठित पद्यांश (घन घमंड नभ...)

(1) उत्तर लिखिए :
(i) गरजने वाले — घन (बादल)
(ii) चमकने वाली — दामिनि (बिजली)
(iii) बूँद के आघात सहने वाले — गिरि (पर्वत)
(iv) दुष्ट के वचन सहने वाले — संत
(2) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) शब्द अर्थ : 1. झुकना = नवहिं, 2. मटमैला = ढाबर
(ii) उपसर्गयुक्त शब्द : आघात, सद्गुण (सज्जन), निअराएँ (कोई दो)
(3) अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ :
कवि कहते हैं कि क्षुद्र नदियाँ वर्षा का जल पाकर वैसे ही इतराने लगती हैं, जैसे थोड़ा धन पाकर दुष्ट लोग घमंड करते हैं। वर्षा का जल पृथ्वी पर गिरते ही गंदा (मटमैला) हो जाता है, जैसे माया के प्रभाव से जीव (आत्मा) मलिन हो जाता है। वर्षा का जल तालाब में वैसे ही स्थिर हो जाता है, जैसे सज्जन के पास सद्गुण। नदी समुद्र में मिलकर वैसे ही स्थिर (अचल) हो जाती है, जैसे जीव ईश्वर को पाकर मोक्ष प्राप्त कर लेता है।

विभाग 3 – पूरक पठन : 8 अंक

3. (अ) पठित गद्यांश (आज फिर उसे...)

(1) कृति पूर्ण कीजिए : युवक के तर्कपूर्ण विचारों के विषय
देशप्रेम
नैतिकता
शिष्टाचार
ईमानदारी
(2) स्वमत : 'भ्रष्टाचार एक कलंक'
भ्रष्टाचार समाज के लिए एक अभिशाप है जो दीमक की तरह देश की जड़ों को खोखला कर रहा है। इससे प्रतिभावान लोगों का हक मारा जाता है और अमीर-गरीब की खाई चौड़ी होती है। यह नैतिक मूल्यों का पतन है। यदि हम एक विकसित राष्ट्र चाहते हैं, तो हमें स्वयं ईमानदार बनकर इस कलंक को मिटाना होगा।

3. (आ) पठित पद्यांश (हाइकु)

(1) आकृति पूर्ण कीजिए :
(i) हाइकु में उल्लेखित :
महीना: फागुन
त्योहार: होली (रंग-बिरंगे)
(ii) फूल की विशेषताएँ :
खिलखिलाता है
प्रेरणा देता है
(2) स्वमत : 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती'
सफलता का मूलमंत्र निरंतर प्रयास है। एक नन्हीं चींटी भी बार-बार गिरने के बाद दीवार पर चढ़ जाती है। जो व्यक्ति असफलताओं से डरकर बैठ जाता है, वह कभी सफल नहीं होता। लेकिन जो गिरकर संभलता है और दुगुने उत्साह से प्रयास करता है, जीत उसी के कदम चूमती है। कोशिश ही सफलता की कुंजी है।

विभाग 4 – व्याकरण : 14 अंक

क्र.प्रश्नउत्तर
1 अधोरेखांकित शब्द भेद
'वे हलुवा-पूड़ी और ताजी दूध-मलाई खाते हैं।'
ताजी — गुणवाचक विशेषण
2 अव्यय का वाक्य प्रयोग
(i) और (ii) के पास
(i) राम और श्याम मित्र हैं।
(ii) मंदिर के पास एक तालाब है।
3 संधि
(i) दिग्गज
(ii) सदा + एव
(i) दिक् + गज = व्यंजन संधि
(ii) सदैव = स्वर (वृद्धि) संधि
4 सहायक क्रिया
(i) रख सके
(ii) चले गए
(i) सके — सकना
(ii) गए — जाना
5 प्रेरणार्थक रूप
(i) देखना
(ii) तोड़ना
(i) दिखाना — दिखवाना
(ii) तुड़ाना — तुड़वाना
6 मुहावरे
(i) मुँह लाल होना
(ii) टाँग अड़ाना
अथवा (चयन)
(i) क्रोधित होना।
(ii) बाधा डालना।
चयन: तिलमिला जाना (क्रोध में आना = तिलमिला जाना)
7 कारक
(i) कमरे से
(ii) समय के लिए
(i) अपादान कारक
(ii) संप्रदान कारक
8 विराम-चिह्न
जल्दी जल्दी पैर बढ़ा
"जल्दी-जल्दी पैर बढ़ा।"
9 काल परिवर्तन
(i) आराम हराम हुआ है। (अपूर्ण वर्तमान)
(ii) वे बाजार से... (पूर्ण भूत)
(iii) मैंने खिड़की से... (सामान्य भविष्य)
(i) आराम हराम हो रहा है
(ii) उन्होंने बाजार से नई पुस्तक खरीदी थी
(iii) मैं... झिड़की के स्वर में कहूँगा
10 वाक्य भेद/परिवर्तन
(i) भेद पहचानिए
(ii) परिवर्तन
(i) विधानार्थक वाक्य
(ii)(1) मैं आज रात का खाना त्यागूँगा / नहीं खाऊँगा (निषेधार्थक है, विधानार्थक बनाना है तो 'नहीं' हटाना होगा, पर प्रश्न में 'नहीं खाऊँगा' ही विधानार्थक रूप में पूछा है तो यह 'निषेधार्थक' है।)
सुधार: प्रश्न है "परिवर्तन कीजिए"।
(1) मैं आज रात का खाना त्याग दूँगा। (विधानार्थक)
(2) क्या मानू इतना ही बोल सकी? (प्रश्नार्थक)
11 वाक्य शुद्धिकरण (i) लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी
(ii) घर में तख्ते के रखे जाने की आवाज आती है
(iii) ...यात्री के प्राण मानो मुरझा गए

विभाग 5 – उपयोजित लेखन : 26 अंक

5. (अ) (1) पत्रलेखन :

विषय: छोटे भाई सोमेश को मोबाइल के दुष्परिणाम समझाते हुए पत्र।

दिनांक: ३ मार्च २०२५
प्रिय भाई सोमेश,
सदा खुश रहो।
कल पिताजी का पत्र मिला, जिससे पता चला कि तुम आजकल पढ़ाई से ज्यादा ध्यान मोबाइल में लगा रहे हो। सोमेश, मोबाइल एक उपयोगी साधन है, लेकिन इसका लत की तरह उपयोग करना तुम्हारे भविष्य के लिए घातक है।
लगातार स्क्रीन देखने से तुम्हारी आँखों और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। यह पढ़ाई से तुम्हारा ध्यान भटकाएगा। मेरी सलाह है कि मोबाइल का उपयोग सीमित करो और मैदानी खेलों व पढ़ाई पर ध्यान दो।
तुम्हारा भाई,
रोहन चौगुले
४२, विठ्ठल नगर, पंढरपुर।
ईमेल: rohan@abc.com

5. (अ) (2) गद्यांश आकलन (प्रश्न निर्मिति) :

परिच्छेद (भारतीय वायुसेना... डॉ. गीता घोष):
1. भारतीय वायुसेना की पहली महिला पैराट्रूपर (छतरीधारी) कौन हैं?
2. डॉ. गीता घोष ने प्रशिक्षण के दौरान कितनी छलाँगें लगाईं?
3. डॉ. गीता घोष के अनुसार उनकी कौन-सी शिक्षा इस अभियान में काम आई?
4. डॉ. गीता घोष का मन किस बात से रोमांचित होता है?

5. (आ) (1) वृत्तांत लेखन :

सरस्वती विद्यालय में 'शिक्षक दिवस' समारोह संपन्न
कोल्हापुर, ६ सितंबर: कल स्थानीय सरस्वती विद्यालय में ५ सितंबर को शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध शिक्षाविद श्री पाटील ने की।
कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना से हुआ। छात्रों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानाचार्य जी ने शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डाला। छात्रों ने शिक्षकों का सम्मान गुलाब का फूल देकर किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
--- अथवा ---

5. (आ) (1) कहानी लेखन :

शीर्षक: चतुर पत्नी / किसान और चोर

एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। एक रात उसके घर में चोर घुस आए। किसान और उसकी पत्नी जाग गए, लेकिन वे डर गए क्योंकि चोर हथियारबंद थे। तभी पत्नी को एक उपाय सूझा।
उसने जोर-जोर से अपने पति से कहा, "अजी सुनिए! चोरों का डर बढ़ गया है। मैंने अपने सारे गहने और रुपये घर के पिछवाड़े बंजर जमीन में गाड़ दिए हैं।" चोरों ने यह सुना और खुश हो गए। वे तुरंत पिछवाड़े गए और रात भर बंजर जमीन खोदते रहे। उन्हें कुछ नहीं मिला, लेकिन किसान का खेत जुत गया। सुबह चोर थककर भाग गए। किसान की पत्नी की सूझबूझ से धन भी बचा और खेत भी जुत गया।
सीख: संकट में सूझबूझ से काम लेना चाहिए।

5. (आ) (2) विज्ञापन लेखन :

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5. (इ) निबंध लेखन :

सूचना: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए :

(1) किसान की आत्मकथा

मैं एक किसान हूँ, धरती का पुत्र और देश का अन्नदाता। मेरा जीवन संघर्ष और परिश्रम की अनवरत गाथा है। मेरा जन्म मिट्टी की गोद में हुआ और यही मेरी कर्मभूमि है।

मैं ब्रह्ममुहूर्त में उठता हूँ और सूर्योदय से पहले ही अपने हल-बैलों के साथ खेतों में पहुँच जाता हूँ। चाहे जेठ की तपती धूप हो, कड़ाके की ठंड हो या मूसलाधार बारिश, मैं कभी विश्राम नहीं करता। मेरा पसीना जब मिट्टी में मिलता है, तब जाकर फसल सोना बनकर लहलहाती है। जब खेत हरे-भरे होते हैं, तो मेरा मन गर्व से भर जाता है।

लेकिन मेरे जीवन में वेदना भी कम नहीं है। कभी सूखा तो कभी बाढ़ मेरी साल भर की मेहनत को नष्ट कर देती है। महंगाई और कर्ज का बोझ मेरी कमर तोड़ देता है। फिर भी, मैं अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता क्योंकि पूरा देश मेरे ही उगाए अनाज पर जीवित है। मेरी बस इतनी अभिलाषा है कि मुझे मेरे श्रम का उचित मूल्य और समाज में सम्मान मिले। जय जवान, जय किसान!

--- अथवा ---

(2) भारत का चंद्रयान मिशन-3

२३ अगस्त २०२३ का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। यह वह गौरवशाली क्षण था जब भारत के 'चंद्रयान-३' ने चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की इस सफलता ने पूरे विश्व में भारत का मस्तक ऊँचा कर दिया।

चंद्रयान-३ का 'विक्रम लैंडर' चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा, जहाँ आज तक कोई भी देश नहीं पहुँच सका था। इस स्थान को अब 'शिवशक्ति पॉइंट' नाम दिया गया है। लैंडर से बाहर निकले 'प्रज्ञान रोवर' ने वहाँ की मिट्टी और खनिजों का अध्ययन कर दुनिया को नई जानकारी दी।

यह मिशन न केवल विज्ञान की जीत है, बल्कि यह हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और संकल्प का परिणाम है। इस सफलता ने भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बना दिया है और यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब किसी से पीछे नहीं है। यह मिशन विकसित भारत की ओर एक मजबूत कदम है।

--- अथवा ---

(3) चाँदनी रात की सैर

प्रकृति का सौंदर्य मन को असीम शांति प्रदान करता है, और उसमें भी चाँदनी रात का सौंदर्य अद्भुत होता है। पिछले महीने की पूर्णिमा को मुझे चाँदनी रात में सैर करने का अवसर मिला, जो मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

रात के करीब १० बजे थे। आकाश में पूरा चाँद चाँदी की थाली जैसा चमक रहा था। उसकी शीतल किरणें धरती पर दूधिया चादर बिछा रही थीं। मैं अपने मित्रों के साथ नदी के किनारे टहलने निकला। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी जो दिन भर की थकान को मिटा रही थी। नदी के जल में चाँद का प्रतिबिंब लहरों के साथ खेलता हुआ प्रतीत हो रहा था।

वातावरण में एक अनोखी शांति थी। दूर कहीं झींगुरों की आवाज सन्नाटे को तोड़ रही थी। पेड़-पौधे भी चाँदनी में नहाकर शांत खड़े थे। उस समय मन की सारी चिंताएँ दूर हो गईं और एक अलौकिक खुशी का अनुभव हुआ। वह चाँदनी रात की सैर मेरे मन-मस्तिष्क पर एक अमिट छाप छोड़ गई।