SSC Hindi (Lokbharati) Full Solution 2024
Subject: Hindi (Course N 582) | Year: March 2024 | Marks: 80
विभाग 1 – गद्य : 20 अंक
1. (अ) पठित गद्यांश (टाँग से ज्यादा फिक्र...)
(ii) जब मिलने वालों का खयाल लेखक को आता है तब — उन्हें लगता है उनकी दूसरी टाँग भी टूट गई।
(ii) लेखक को परेशान करने वाले — मिलने-जुलने वाले लोग
(iii) मरीज को मिलने के संबंध में यहाँ समय का बंधन पाला जाता है — जनरल वार्ड
(iv) मरीज को इसके कारण नींद नहीं आती — दर्द के मारे
(ii) गद्यांश में प्रयुक्त दो उर्दू शब्द : फ़िक्र, हमदर्दी (अन्य: मरीज, अहसान)
1. (आ) पठित गद्यांश (अभी समाज में यह चल रहा है...)
(ii) समाज में अपनी आजीविका थोड़े लोग इससे चलाते हैं — बौद्धिक श्रम से
(iii) आराम में रहने वाले लोगों के पास यह अधिक है — संपत्ति
(iv) अनेक लोगों में इसकी आदत नहीं है — श्रम करने की
उपसर्गयुक्त: परिश्रम / विश्राम
प्रत्यययुक्त: श्रमिक / श्रमजीवी
1. (इ) अपठित गद्यांश (सन् 1911 में...)
मेघनाथ साहा
निखिल रंजन सेन
विभाग 2 – पद्य : 12 अंक
2. (अ) पठित पद्यांश (किसी का हमने छीना नहीं...)
(ii) भुजाएँ — बहुवचन
2. (आ) पठित पद्यांश (घन घमंड नभ गरजत...)
(ii) श्री राम जी का मन डर रहा है → सत्य
(iii) दुष्ट व्यक्ति का प्रेम स्थिर नहीं होता है → सत्य
(iv) सद्गुण एक-एक करके अपने आप सज्जन व्यक्ति के पास आ जाते हैं → सत्य
(2) विद्वान — बुध
(2) गिरि → पुल्लिंग
अर्थ: छोटी नदियाँ वर्षा का जल पाकर अपने किनारों को तोड़ती हुई बहने लगती हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे ओछे या दुष्ट लोग थोड़ा सा धन पाकर घमंड में इतराने लगते हैं।
विभाग 3 – पूरक पठन : 8 अंक
3. (अ) पठित गद्यांश (इस वर्ष बड़ी भीषण गर्मी...)
3. (आ) पठित पद्यांश (काँटों के बीच...)
| (i) खिलखिलाता फूल | प्रेरणा |
| (ii) भीतरी | कुंठा |
| (iii) खारा | जल |
| (iv) पावन | मन |
विभाग 4 – भाषा अध्ययन (व्याकरण) : 14 अंक
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | शब्द भेद पहचानिए 'क्या तुम कॉलेज में पढ़ी हो ?' |
तुम — पुरुषवाचक सर्वनाम |
| 2 | अव्यय का वाक्य प्रयोग (i) धीरे-धीरे (ii) लेकिन |
(i) कछुआ धीरे-धीरे चलता है। (ii) वह दौड़ा लेकिन बस छूट गई। |
| 3 | संधि विच्छेद/भेद (i) महा + आत्मा (ii) दुस्साहस |
(i) महात्मा (स्वर संधि) (ii) दुः + साहस (विसर्ग संधि) |
| 4 | सहायक क्रिया (i) बढ़ गए (ii) खोल दिया |
(i) गए — जाना (ii) दिया — देना |
| 5 | प्रेरणार्थक रूप (i) चलना (ii) मिलना |
(i) चलाना — चलवाना (ii) मिलाना — मिलवाना |
| 6 | मुहावरे (i) टाँग अड़ाना (ii) गला फाड़ना अथवा चयन: |
(i) बाधा डालना। (ii) जोर से चिल्लाना। चयन: रोते हुए बच्चे को गोद में उठाकर माँ हाथ फेरने लगी। |
| 7 | कारक (i) मकान पर (ii) इशारे के लिए |
(i) अधिकरण कारक (ii) संप्रदान कारक |
| 8 | विराम-चिह्न हाँ मेरे पास बहुत से पत्र आते हैं |
"हाँ, मेरे पास बहुत-से पत्र आते हैं।" |
| 9 | काल परिवर्तन (i) मानू को... (सामान्य भविष्य) (ii) दोनों ही... (अपूर्ण भूत) (iii) वे पुस्तक... (पूर्ण वर्तमान) |
(i) मानू को ससुराल पहुँचाने मैं ही जाऊँगा। (ii) दोनों ही देर तक फूट-फूटकर रो रहे थे। (iii) उन्होंने पुस्तक शांति से पढ़ी है। |
| 10 | वाक्य भेद/परिवर्तन (i) भेद: मोटे तौर पर... (ii) परिवर्तन |
(i) विधानार्थक वाक्य (ii)(1) परिचय के बिना किसी को दाखिल नहीं करना चाहिए। (निषेधार्थक) (2) क्या थोड़ी बातें हुईं ? (प्रश्नार्थक) |
| 11 | वाक्य शुद्धिकरण | (i) घर में तख्त के रखे जाने की आवाज आती है। (ii) करामत अली की आँखों में आँसू उतर आए। (iii) ठीक उसी समय रूपा की आँखें खुलीं। |
विभाग 5 – उपयोजित लेखन : 26 अंक
5. (अ) (1) पत्रलेखन :
दिनांक: ९ मार्च २०२४
प्रिय भाई सुयश,
सदा खुश रहो।
कल माँ का पत्र मिला। यह जानकर चिंता हुई कि तुम पढ़ाई के तनाव के कारण अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे रहे हो। सुयश, 'स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है'।
मैं तुम्हें योग का महत्त्व समझाना चाहता हूँ। प्रतिदिन सुबह ३० मिनट योग और प्राणायाम करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ती है। इससे स्मरण शक्ति तेज होती है और तनाव दूर होता है। मुझे उम्मीद है कि तुम अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करोगे।
तुम्हारा भाई,
राजेश शर्मा
मातोश्री छात्रावास, चिंचवड़, पुणे।
ईमेल: rajesh@abc.com
5. (अ) (2) गद्यांश आकलन (प्रश्न निर्मिति) :
1. ईश्वर द्वारा मनुष्य को दी गई बड़ी देन कौन-सी है?
2. मनुष्य के सारे चिंतन-शास्त्र किस पर आधारित हैं?
3. गंभीर चिंतन करने वाले क्या खोज करते हैं?
4. पतंजलि ने चित्तशुद्धि के लिए क्या लिखा है?
5. (आ) (1) वृत्तांत लेखन :
बीड, १६ अगस्त: स्थानीय गुरुकृपा विद्यालय में कल ७७वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह ७:३० बजे ध्वजारोहण समारोह हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने तिरंगा फहराया और सभी ने राष्ट्रगान गाया।
छात्रों ने देशभक्ति गीतों और भाषणों का सुंदर कार्यक्रम प्रस्तुत किया। प्रमुख अतिथि ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया और छात्रों को देश का जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी। अंत में मिठाई वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
5. (आ) (1) कहानी लेखन :
एक गाँव में पानी की भारी समस्या थी। गाँव की लड़कियों को दूर से पानी लाना पड़ता था, जिससे उनकी पढ़ाई के लिए कम समय मिलता था। कुछ होशियार लड़कियों ने इस समस्या पर चर्चा की। उन्होंने सोचा कि केवल शिकायत करने से कुछ नहीं होगा।
उन्होंने गाँव के सरपंच और बड़ों से बात की और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का सुझाव दिया। लड़कियों के उत्साह को देखकर गाँव वालों ने श्रमदान करके एक तालाब खोदा और छतों का पानी इकट्ठा करने की व्यवस्था की। अगली बारिश में गाँव में पानी की समस्या हल हो गई। लड़कियों को पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा और उन्हें सफलता प्राप्त हुई।
सीख: दृढ़ निश्चय और सूझबूझ से बड़ी से बड़ी समस्या हल हो सकती है।
5. (आ) (2) विज्ञापन लेखन :
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5. (इ) निबंध लेखन :
सूचना: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए :
(1) किसान की आत्मकथा
मैं एक किसान हूँ, जिसे 'अन्नदाता' कहा जाता है। मेरा जीवन सादगी और परिश्रम की मूरत है। मैं सुबह सूरज निकलने से पहले ही अपने खेतों में पहुँच जाता हूँ और दिन भर कड़ी धूप, ठंड या बारिश की परवाह किए बिना काम करता हूँ। मेरी मेहनत से ही बंजर धरती पर फसल लहलहाती है।
जब फसल अच्छी होती है, तो मेरे परिवार और देश का पेट भरता है, जिससे मुझे बहुत खुशी मिलती है। लेकिन कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएँ, सूखा या बाढ़ मेरी सारी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। कर्ज का बोझ मुझे परेशान करता है। फिर भी, मैं हार नहीं मानता और अगली फसल के लिए फिर से जुट जाता हूँ। मेरी सरकार और समाज से बस यही उम्मीद है कि मेरे श्रम का सम्मान हो और मुझे अपनी उपज का उचित मूल्य मिले।
(2) हमारी सैर
सैर-सपाटा जीवन में नई ताजगी और ऊर्जा भर देता है। पिछले महीने की छुट्टियों में, मैंने अपने परिवार के साथ महाबलेश्वर की सैर करने का निश्चय किया। हम सुबह जल्दी बस से निकले। रास्ते भर हरे-भरे पहाड़ और घुमावदार रास्ते मन को मोह रहे थे।
वहाँ पहुँचकर हमने सबसे पहले 'वेन्ना लेक' में नौकाविहार (Boating) का आनंद लिया। ठंडी हवा और पानी की लहरों ने सारी थकान मिटा दी। हमने वहाँ के प्रसिद्ध 'सनसेट पॉइंट' से डूबते हुए सूरज का अद्भुत दृश्य देखा। महाबलेश्वर की ताजी स्ट्रॉबेरी का स्वाद तो लाजवाब था।
दो दिन प्रकृति की गोद में बिताकर हम वापस लौटे। वह सैर न केवल मनोरंजक थी, बल्कि उसने हमें मानसिक शांति भी दी। उन पलों की यादें आज भी मेरे मन में तरोताजा हैं।
(3) यदि पुस्तकें न होतीं...
पुस्तकें ज्ञान का भंडार और हमारी सच्ची मित्र होती हैं। कल्पना कीजिए, यदि पुस्तकें न होतीं तो क्या होता? यदि पुस्तकें न होतीं, तो मानव जाति का ज्ञान, विज्ञान और इतिहास सुरक्षित नहीं रह पाता। हमारे पूर्वजों के अनुभव और विचार हम तक कभी नहीं पहुँच पाते।
पुस्तकों के बिना शिक्षा का प्रसार असंभव हो जाता। हम रामायण, महाभारत जैसे महान ग्रंथों और न्यूटन, आइंस्टीन जैसे वैज्ञानिकों की खोजों से अनजान रह जाते। दुनिया अज्ञान के अंधकार में डूबी रहती। पुस्तकें हमें घर बैठे दुनिया की सैर कराती हैं और हमें सही राह दिखाती हैं।
सचमुच, पुस्तकों के बिना मनुष्य का विकास रुक जाता और जीवन नीरस हो जाता। पुस्तकें ही हैं जो एक पीढ़ी के ज्ञान को दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाती हैं, इसलिए इनका होना हमारे अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।