Maharashtra Board HSC Physics Question Paper Solution 2024 (Hindi Medium)
विषय: भौतिकी (Physics - 54) | वर्ष: 2024 | अधिकतम अंक: 70
विभाग - अ (Section A)
प्र. १. दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए : [१०]
(i) किसी वृत्ताकार चकती की त्रिज्या R तथा द्रव्यमान (mass) M है, इसका बल-आघूर्ण (MI) केंद्र के अक्ष के सापेक्ष .......... होगा।
स्पष्टीकरण: किसी वृत्ताकार चकती (disc) का उसके केंद्र से गुजरने वाले और उसके तल के लंबवत अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण \( I = \frac{1}{2}MR^2 \) होता है।
(ii) सतह (पृष्ठ)-तनाव का विमीय सूत्र .......... होगा।
स्पष्टीकरण: पृष्ठ तनाव (Surface Tension) \( T = \frac{\text{बल (Force)}}{\text{लंबाई (Length)}} \) होता है।
बल की विमा = \( [M^1L^1T^{-2}] \)
लंबाई की विमा = \( [L^1] \)
अतः, T की विमा = \( \frac{[M^1L^1T^{-2}]}{[L^1]} = [L^0M^1T^{-2}] \)।
(iii) एक स्थिर तरंग में किसी निस्पंद (node) तथा संलग्न प्रस्पंद (antinode) के बीच का कला अंतर (phase difference) .......... होगा।
स्पष्टीकरण: नोड और निकटतम एंटीनोड के बीच की दूरी \( \frac{\lambda}{4} \) होती है।
कला अंतर (Phase difference) \( \phi = \frac{2\pi}{\lambda} \times \text{पथ अंतर} = \frac{2\pi}{\lambda} \times \frac{\lambda}{4} = \frac{\pi}{2} \) rad।
(iv) किसी धन इकाई आवेश को अनंत से किसी दिए गए बिंदु पर, विद्युत क्षेत्र की विरुद्ध दिशा में, लाने में किया जाने वाला कार्य .......... कहलाता है।
स्पष्टीकरण: यह विद्युत विभव (Electric Potential) की मानक परिभाषा है।
(v) किसी चल कुंडल गैल्वेनोमीटर का विद्युत धारामापी में रूपांतर करने के लिए इसे .......... जोड़ना पड़ेगा।
स्पष्टीकरण: गैल्वेनोमीटर को एमीटर (ammeter) में बदलने के लिए, उसके समांतर क्रम (parallel) में एक बहुत कम मान का प्रतिरोध (जिसे शंट कहते हैं) जोड़ा जाता है।
(vi) यदि आपाती किरणों की आवृत्ति, किसी प्रकाश संवेदनशील-सामग्री (photo-sensitive material) के लिए दुगुनी कर दी जाए तो उससे उत्सर्जित प्रकाश इलेक्ट्रॉन (Photoelectron) की गतिज ऊर्जा ..........
स्पष्टीकरण: आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण: \( K_{max} = h\nu - \phi_0 \)।
यदि आवृत्ति दोगुनी कर दी जाए (\( 2\nu \)), तो नई ऊर्जा \( K_2 = h(2\nu) - \phi_0 = 2h\nu - \phi_0 \)।
इसे ऐसे लिखा जा सकता है: \( K_2 = 2(h\nu - \phi_0) + \phi_0 = 2K_1 + \phi_0 \)।
चूंकि \( \phi_0 \) (कार्य फलन) धनात्मक है, इसलिए \( K_2 > 2K_1 \)।
(vii) किसी चक्रीय-प्रक्रम में यदि \( \Delta U = \) आंतरिक ऊर्जा, W = किया गया कार्य, Q = ऊष्मा देय तब ..........
स्पष्टीकरण: चक्रीय प्रक्रम में निकाय अपनी प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाता है, इसलिए आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन \( \Delta U = 0 \) होता है। ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से \( Q = \Delta U + W \Rightarrow Q = 0 + W \Rightarrow Q = W \)।
(viii) किसी कुंडल में प्रवाहित धारा 50A से 10A तक परिवर्तित होने में 0.1 सेकंड का समय लगता है। कुंडल का स्वप्रेरण (self inductance) 20H है। तब उसमें उत्पन्न होने वाला प्रेरित वि.वा.ब. (e.m.f.) .......... होगा।
स्पष्टीकरण: सूत्र: \( |e| = L \frac{di}{dt} \)।
\( L = 20 \) H, \( di = 50 - 10 = 40 \) A, \( dt = 0.1 \) s।
\( e = 20 \times \frac{40}{0.1} = 20 \times 400 = 8000 \) V।
(ix) किसी सेकंड-दोलक का वेग (velocity), जब दोलक मध्य स्थिति से 6 cm पर स्थित हो तथा उसका आयाम 10 cm है, तो .......... होगा।
स्पष्टीकरण: सेकंड लोलक का आवर्तकाल \( T = 2 \) s होता है। \( \omega = \frac{2\pi}{T} = \pi \) rad/s।
वेग \( v = \omega \sqrt{A^2 - x^2} \)।
\( v = \pi \sqrt{10^2 - 6^2} = \pi \sqrt{100 - 36} = \pi \sqrt{64} = 8\pi \) cm/s।
(x) द्विलोलक (biprism) प्रयोग में, केंद्रीय प्रखर पुंज से 20 वें प्रखर पुंज की दूरी 1.2 cm है। यदि प्रायोगिक व्यवस्था को विचलित न किया जाए तो, केंद्रीय प्रखर पुंज से 30 वें प्रखर पुंज की दूरी .......... होगी।
स्पष्टीकरण: \( n \)-वें प्रखर पुंज की दूरी \( x_n = n \frac{\lambda D}{d} \) होती है।
\( x_{20} = 20 \beta = 1.2 \) cm \(\Rightarrow \beta = \frac{1.2}{20} = 0.06 \) cm।
\( x_{30} = 30 \beta = 30 \times 0.06 = 1.8 \) cm।
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प्र. २. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [८]
(i) अभिकेंद्रीय बल की परिभाषा दीजिए।
(ii) कपड़े धोने के लिए पानी में डिटर्जेंट का चूर्ण क्यों मिलाया जाता है?
(iii) किसी आदर्श विभवमापी (ideal voltmeter) का रोध कितना होता है?
(iv) किसी घूर्णन करती विद्युत वाहक कुंडली (coil) पर लगने वाले घूर्णन बल का गणितीय सूत्र, चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण-सदिश स्वरूप में लिखिए।
(जहाँ \( \vec{m} \) चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है और \( \vec{B} \) चुंबकीय क्षेत्र है)।
(v) हाइड्रोजन अणु के लिए बंधन ऊर्जा (binding energy) कितनी होती है?
(vi) ऊष्मागतिकी (thermodynamics) में वातावरण (surroundings) अर्थात् क्या?
(vii) किसी प्रकाश विद्युतीय प्रयोग में अवरोधक विभव (stopping potential) 1.5V है। प्रकाश विद्युतीय इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा कितनी होगी?
दिया है: \( V_s = 1.5 \) V।
\( K_{max} = 1.5 \) eV (इलेक्ट्रॉन-वोल्ट) या \( 1.5 \times 1.6 \times 10^{-19} = 2.4 \times 10^{-19} \) J।
(viii) 5µF तथा 10µF के दो संधारित्रों को श्रेणी में क्रमबद्ध तरीके से जोड़ा गया है। उनकी समतुल्य धारिता (resultant capacity) ज्ञात कीजिए।
विभाग - ब (Section B)
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [१६]
प्र. ३. ऊष्मागतिकी प्रक्रम में (गैस को) गर्म करने पर आंतरिक ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन को समझाइए।
जब किसी गैस (ऊष्मागतिकी निकाय) को ऊष्मा दी जाती है:
- गैस के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। चूँकि आंतरिक ऊर्जा तापमान पर निर्भर करती है (आदर्श गैस के लिए), तापमान बढ़ने से आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है (\( \Delta U > 0 \))।
- ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम (\( Q = \Delta U + W \)) के अनुसार, दी गई ऊष्मा का कुछ भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने में खर्च होता है और शेष भाग बाहरी दाब के विरुद्ध कार्य करने में उपयोग किया जा सकता है (यदि आयतन बढ़ता है)।
- यदि आयतन स्थिर रखा जाता है (समआयतनिक प्रक्रिया), तो कार्य शून्य होता है (\( W=0 \)) और दी गई सारी ऊष्मा आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने में जाती है (\( Q = \Delta U \))।
प्र. ४. ह्यूजेन (Huygens) के सिद्धांत के अनुसार गोलाकार तरंगाग्र की संरचना का स्पष्टीकरण दीजिए।
गोलाकार तरंगाग्र (Spherical Wavefront) का निर्माण:
- एक बिंदु स्रोत 'S' पर विचार करें जो एक समांगी माध्यम में स्थित है। समय \( t=0 \) पर विक्षोभ स्रोत पर है।
- यह विक्षोभ सभी दिशाओं में 'c' चाल से फैलता है। समय 't' के बाद, समान कला में कंपन करने वाले कणों का बिंदुपथ \( ct \) त्रिज्या का एक गोला होता है। यह प्राथमिक गोलाकार तरंगाग्र है।
- ह्यूजेन के सिद्धांत के अनुसार, इस प्राथमिक तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु एक द्वितीयक स्रोत के रूप में कार्य करता है और सभी दिशाओं में द्वितीयक तरंगिकाएं (secondary wavelets) उत्सर्जित करता है।
- अगले \( \Delta t \) समय के बाद तरंगाग्र की नई स्थिति ज्ञात करने के लिए, प्राथमिक तरंगाग्र के बिंदुओं को केंद्र मानकर \( c\Delta t \) त्रिज्या के गोले खींचे जाते हैं।
- इन द्वितीयक तरंगिकाओं को स्पर्श करने वाला बाहरी आवरण (envelope) समय \( t + \Delta t \) पर तरंगाग्र की नई स्थिति को दर्शाता है।
प्र. ५. चुंबकत्व (magnetization) की व्याख्या देते हुए उसकी SI इकाई तथा विमाएँ लिखिए।
व्याख्या: किसी पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में उत्पन्न होने वाले नेट चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (net magnetic dipole moment) को चुंबकत्व (Magnetization) कहते हैं।
$$ M_z = \frac{m_{net}}{V} $$
SI इकाई: एम्पीयर प्रति मीटर (A/m)।
विमाएँ: \( [L^{-1}M^0T^0I^1] \) या \( [L^{-1}A] \)।
प्र. ६. रेखीय सरल आवर्त गति के लिए अवकलन (differential) समीकरण प्राप्त कीजिए।
रेखीय सरल आवर्त गति (SHM) में, कण पर लगने वाला प्रत्यानयन बल (restoring force) \( F \) विस्थापन \( x \) के समानुपाती होता है और इसकी दिशा विपरीत होती है।
$$ F = -kx $$ (जहाँ \( k \) बल नियतांक है)।
न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, \( F = ma = m \frac{d^2x}{dt^2} \)।
बलों की तुलना करने पर:
$$ m \frac{d^2x}{dt^2} = -kx $$
$$ m \frac{d^2x}{dt^2} + kx = 0 $$
\( m \) से भाग देने पर:
$$ \frac{d^2x}{dt^2} + \frac{k}{m}x = 0 $$
\( \frac{k}{m} = \omega^2 \) (कोणीय आवृत्ति) रखने पर:
$$ \frac{d^2x}{dt^2} + \omega^2 x = 0 $$
यह रेखीय SHM का अवकलन समीकरण है।
प्र. ७. 30\( \Omega \) रोध वाले गैल्वेनोमापी का अधिकतम विचलन धारा 20 माइक्रो एम्पीयर (\( \mu \)A) है। इसमें कितना रोध जोड़ा जाना चाहिए ताकि उसकी रेंज 0-10 volt हो जाए?
दिया है:
गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध \( G = 30 \, \Omega \)
पूर्ण पैमाने की धारा \( I_g = 20 \, \mu\text{A} = 20 \times 10^{-6} \, \text{A} \)
वोल्टेज रेंज \( V = 10 \, \text{V} \)
गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए, एक उच्च प्रतिरोध \( X \) (या \( R_s \)) को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
सूत्र: \( V = I_g (G + X) \)
$$ 10 = 20 \times 10^{-6} (30 + X) $$
$$ 30 + X = \frac{10}{20 \times 10^{-6}} $$
$$ 30 + X = \frac{10^6}{2} = 500,000 $$
$$ X = 500,000 - 30 = 499,970 \, \Omega $$
उत्तर: \( 499,970 \, \Omega \) का प्रतिरोध श्रेणी क्रम में जोड़ना होगा।
प्र. ८. बॉयट-सावर्ट (Biot-Savart) के नियम (सिद्धांत) को समझाइए।
बॉयट-सावर्ट नियम किसी धारावाही चालक के अल्पांश (current element) के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का वर्णन करता है।
मान लीजिए कि किसी चालक से \( I \) धारा प्रवाहित हो रही है। \( dl \) चालक का एक छोटा अल्पांश है। इस अल्पांश से \( r \) दूरी पर स्थित बिंदु P पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र \( dB \) निम्न बातों पर निर्भर करता है:
- धारा \( I \) के समानुपाती होता है।
- अल्पांश की लंबाई \( dl \) के समानुपाती होता है।
- \( dl \) और स्थिति सदिश \( r \) के बीच के कोण की साइन (\( \sin \theta \)) के समानुपाती होता है।
- दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( dB \propto 1/r^2 \))।
गणितीय रूप:
$$ dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I \, dl \, \sin\theta}{r^2} $$
सदिश रूप में:
$$ d\vec{B} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (d\vec{l} \times \vec{r})}{r^3} $$
प्र. ९. प्रकाश-उत्सर्जित-एक दिष्टकारी (LED) क्या है? इसके परिपथ प्रतीक चित्रित कीजिए।
परिभाषा: प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED) एक अत्यधिक डोप किया हुआ (heavily doped) p-n जंक्शन डायोड है जो अग्र अभिनति (forward bias) में होने पर स्वतः विकिरण (प्रकाश) उत्सर्जित करता है। जंक्शन पर इलेक्ट्रॉन और होल्स के पुनर्संयोजन (recombination) के कारण फोटॉन के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है।
परिपथ प्रतीक:
(डायोड के प्रतीक पर बाहर की ओर इंगित करते हुए दो तीर प्रकाश उत्सर्जन दर्शाते हैं)
प्र. १०. 60 m पंख-विस्तार (Wing span) वाला एक हवाई जहाज (aircraft) पृथ्वी के \( 6\times10^{-5} \)T चुंबकीय क्षेत्र में क्षितिज के समांतर, 500 m/s की गति से उड़ रहा है। उस हवाई जहाज के पंखों के सिरों के बीच उत्पन्न होने वाले वि.वा.ब. (e.m.f.) की गणना कीजिए।
यह गतिक विद्युत वाहक बल (Motional EMF) का उदाहरण है।
दिया है:
पंखों की लंबाई \( l = 60 \) m
चुंबकीय क्षेत्र \( B = 6 \times 10^{-5} \) T
चाल \( v = 500 \) m/s
सूत्र: \( e = Blv \)
$$ e = (6 \times 10^{-5}) \times 60 \times 500 $$
$$ e = 6 \times 10^{-5} \times 30000 $$
$$ e = 6 \times 10^{-5} \times 3 \times 10^4 $$
$$ e = 18 \times 10^{-1} = 1.8 \, \text{V} $$
उत्तर: प्रेरित वि.वा.ब. 1.8 V है।
प्र. ११. क्षितिजिय वृत्ताकार मार्ग से होकर गुजरने वाले किसी वाहन के लिए अधिकतम वेग की गणना कीजिए।
मान लीजिए \( m \) द्रव्यमान का एक वाहन \( r \) त्रिज्या के क्षैतिज वृत्ताकार मार्ग पर \( v \) चाल से चल रहा है।
वाहन पर लगने वाले बल:
1. भार \( mg \) (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)।
2. अभिलंब प्रतिक्रिया \( N \) (ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर, \( N = mg \))।
3. टायरों और सड़क के बीच स्थैतिक घर्षण बल \( f_s \) (केंद्र की ओर)।
आवश्यक अभिकेंद्रीय बल स्थैतिक घर्षण द्वारा प्रदान किया जाता है।
$$ \frac{mv^2}{r} = f_s $$
अधिकतम चाल (\( v_{max} \)) के लिए, स्थैतिक घर्षण अपने अधिकतम मान \( f_{s,max} = \mu N = \mu mg \) तक पहुँच जाता है (जहाँ \( \mu \) स्थैतिक घर्षण गुणांक है)।
$$ \frac{mv_{max}^2}{r} = \mu mg $$
$$ v_{max}^2 = \mu rg $$
$$ v_{max} = \sqrt{\mu rg} $$
प्र. १२. \( 10^{-2} \text{m}^2 \) क्षेत्रफल वाली धातु की प्लेट को \( 3\times10^{-2} \text{m/s} \) वेग प्रदान करने के लिए 0.5N क्षितिज बल की आवश्यकता होती है, जब यह \( 0.5\times10^{-3} \text{m} \) मोटे ग्लिसरीन की परत पर स्थिर रखी हो, ग्लिसरीन का श्यानता सहगुणांक (coefficient of viscosity) ज्ञात कीजिए।
दिया है:
बल \( F = 0.5 \) N
क्षेत्रफल \( A = 10^{-2} \, \text{m}^2 \)
वेग \( dv = 3 \times 10^{-2} \) m/s
मोटाई (दूरी) \( dx = 0.5 \times 10^{-3} \) m
न्यूटन के श्यानता नियम के अनुसार: \( F = \eta A \frac{dv}{dx} \)
$$ \eta = \frac{F \cdot dx}{A \cdot dv} $$
$$ \eta = \frac{0.5 \times 0.5 \times 10^{-3}}{10^{-2} \times 3 \times 10^{-2}} $$
$$ \eta = \frac{0.25 \times 10^{-3}}{3 \times 10^{-4}} = \frac{2.5 \times 10^{-4}}{3 \times 10^{-4}} $$
$$ \eta = \frac{2.5}{3} \approx 0.833 \, \text{Ns/m}^2 $$
प्र. १३. 320 Hz तथा 340 Hz आवृत्ति वाले दो ट्यूनिंग काँटों को एक साथ कंपित होकर ध्वनि उत्पन्न की गई। वायु में ध्वनि का वेग 340 m/s है। इनकी तरंग लंबाई में अंतर ज्ञात कीजिए।
दिया है:
\( n_1 = 320 \) Hz, \( n_2 = 340 \) Hz
\( v = 340 \) m/s
तरंग दैर्ध्य (Wavelength) \( \lambda = \frac{v}{n} \)
\( \lambda_1 = \frac{340}{320} = \frac{34}{32} = 1.0625 \) m
\( \lambda_2 = \frac{340}{340} = 1.0 \) m
तरंग लंबाई में अंतर \( \Delta \lambda = \lambda_1 - \lambda_2 = 1.0625 - 1.0 = 0.0625 \) m।
प्र. १४. हाइड्रोजन के अणु में यदि कोई इलेक्ट्रॉन, तृतीय कक्ष से प्रथम कक्ष में उछलता है, तो उसके कोणीय संवेग में होने वाला परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
बोर के दूसरे सिद्धांत के अनुसार, कोणीय संवेग \( L = \frac{nh}{2\pi} \)।
तृतीय कक्षा के लिए (\( n_1 = 3 \)): \( L_3 = \frac{3h}{2\pi} \)
प्रथम कक्षा के लिए (\( n_2 = 1 \)): \( L_1 = \frac{1h}{2\pi} \)
कोणीय संवेग में परिवर्तन \( \Delta L = L_3 - L_1 = \frac{3h}{2\pi} - \frac{h}{2\pi} = \frac{2h}{2\pi} = \frac{h}{\pi} \)।
मान रखने पर (\( h = 6.63 \times 10^{-34} \) Js, \( \pi = 3.142 \)):
$$ \Delta L = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{3.142} \approx 2.11 \times 10^{-34} \, \text{kg m}^2/\text{s} $$
विभाग - क (Section C)
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों को हल कीजिए : [२४]
प्र. १५. 200 फेरों (turns) के एक वृत्ताकार कुंडल जिसके प्रत्येक फेरे की त्रिज्या 10 cm है, में से 0.5A की धारा प्रवाहित होती है, कुंडल के केंद्र में उत्पन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्र बल कितना होगा? गणना कीजिए।
दिया है: \( N = 200 \), \( R = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m} \), \( I = 0.5 \text{ A} \)।
कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र:
$$ B = \frac{\mu_0 N I}{2R} $$
$$ B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 200 \times 0.5}{2 \times 0.1} $$
$$ B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 100}{0.2} = \frac{400\pi \times 10^{-7}}{0.2} $$
$$ B = 2000\pi \times 10^{-7} = 2\pi \times 10^{-4} \text{ T} $$
$$ B \approx 2 \times 3.142 \times 10^{-4} = 6.284 \times 10^{-4} \text{ T} $$
प्र. १६. प्रकाश विद्युतीय प्रभाव की परिभाषा दीजिए तथा प्रकाश विद्युत प्रभाव के प्रायोगिक व्यवस्थापन की व्याख्या कीजिए।
परिभाषा: जब उचित आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु की सतह पर पड़ता है तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने की घटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric effect) कहते हैं।
प्रायोगिक व्यवस्था:
- इसमें एक निर्वातित कांच की नली होती है जिसमें दो इलेक्ट्रोड होते हैं: एक प्रकाश-संवेदी प्लेट (उत्सर्जक E) और दूसरी संग्राहक प्लेट (कलेक्टर C)।
- उत्सर्जक पर पराबैंगनी या दृश्य प्रकाश पड़ने के लिए नली में एक क्वार्ट्ज खिड़की होती है।
- प्लेटें एक परिवर्तनीय वोल्टेज स्रोत (बैटरी) से जुड़ी होती हैं, जिसमें ध्रुवता बदलने की व्यवस्था होती है।
- प्रकाश विद्युत धारा मापने के लिए माइक्रोएम्मीटर (\( \mu A \)) और विभव मापने के लिए वोल्टमीटर (V) जुड़े होते हैं।
- जब प्रकाश E पर पड़ता है, तो फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं और C की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे परिपथ में धारा प्रवाहित होती है।
प्र. १७. किसी ट्रांजिस्टर के लिए करंट गेन \( \alpha_{DC} \) तथा \( \beta_{DC} \) की परिभाषा दीजिए तथा उनके बीच गणितीय संबंध स्थापित कीजिए।
परिभाषा:
1. \( \alpha_{DC} \) (उभयनिष्ठ आधार धारा लाभ): संग्राहक धारा (\( I_C \)) और उत्सर्जक धारा (\( I_E \)) का अनुपात। \( \alpha_{DC} = \frac{I_C}{I_E} \)।
2. \( \beta_{DC} \) (उभयनिष्ठ उत्सर्जक धारा लाभ): संग्राहक धारा (\( I_C \)) और आधार धारा (\( I_B \)) का अनुपात। \( \beta_{DC} = \frac{I_C}{I_B} \)।
संबंध:
हम जानते हैं \( I_E = I_C + I_B \)।
\( I_C \) से भाग देने पर:
$$ \frac{I_E}{I_C} = 1 + \frac{I_B}{I_C} $$
परिभाषाओं का उपयोग करते हुए (\( \frac{I_E}{I_C} = \frac{1}{\alpha} \) और \( \frac{I_B}{I_C} = \frac{1}{\beta} \)):
$$ \frac{1}{\alpha} = 1 + \frac{1}{\beta} = \frac{\beta + 1}{\beta} $$
$$ \alpha = \frac{\beta}{1 + \beta} $$
या: \( \beta = \frac{\alpha}{1 - \alpha} \)।
प्र. १८. द्रव की सतह-ऊर्जा की परिभाषा दीजिए। सतह-ऊर्जा तथा सतह-तनाव के बीच गणितीय संबंध स्थापित कीजिए।
सतह ऊर्जा: द्रव की सतह के अणुओं में, द्रव के भीतर के अणुओं की तुलना में जो अतिरिक्त स्थितिज ऊर्जा होती है, उसे सतह ऊर्जा (Surface Energy) कहते हैं।
संबंध:
एक आयताकार फ्रेम पर विचार करें जिसकी एक भुजा \( L \) लंबाई की है और सरक सकती है। उस पर साबुन की फिल्म बनी है। पृष्ठ तनाव \( T \) के कारण अंदर की ओर \( F = 2TL \) (दो सतहों के कारण 2) बल लगता है।
यदि तार को \( dx \) दूरी तक बाहर खींचा जाता है, तो किया गया कार्य:
$$ dW = F \cdot dx = 2TL \cdot dx $$
क्षेत्रफल में वृद्धि \( dA = 2(L \cdot dx) \)।
अतः, \( dW = T (2L \cdot dx) = T \cdot dA \)।
यह कार्य सतह ऊर्जा \( E \) के रूप में संचित होता है।
$$ \text{सतह ऊर्जा } (E) = T \times \text{क्षेत्रफल में वृद्धि } (dA) $$
$$ T = \frac{\text{सतह ऊर्जा}}{\text{क्षेत्रफल}} $$
प्र. १९. समतापीय प्रक्रिया (isothermal process) किसे कहते हैं? समतापीय प्रक्रिया में किसी वायु (Gas) द्वारा किए गए कार्य की गणना कीजिए।
समतापीय प्रक्रिया: वह ऊष्मागतिकी प्रक्रिया जिसमें निकाय का तापमान पूरे परिवर्तन के दौरान स्थिर रहता है, उसे समतापीय प्रक्रिया कहते हैं।
किया गया कार्य (Work Done):
कार्य \( W = \int_{V_i}^{V_f} P \, dV \)।
आदर्श गैस के लिए, \( PV = nRT \implies P = \frac{nRT}{V} \)।
चूंकि T स्थिर है:
$$ W = \int_{V_i}^{V_f} \frac{nRT}{V} \, dV $$
$$ W = nRT \int_{V_i}^{V_f} \frac{1}{V} \, dV $$
$$ W = nRT [\ln V]_{V_i}^{V_f} $$
$$ W = nRT \ln\left(\frac{V_f}{V_i}\right) $$
प्र. २०. किसी खींचे गए तार पर उत्पन्न होने वाले स्थिर तरंगों के गणितीय समीकरण की गणना कीजिए। दर्शाइए कि दो लगातार निस्पंदों (nodes) या प्रस्पंदों (antinodes) के बीच की दूरी \( \lambda/2 \) होती है।
विपरीत दिशाओं में यात्रा करने वाली दो समान प्रगामी तरंगों पर विचार करें:
\( y_1 = A \sin(\omega t - kx) \)
\( y_2 = A \sin(\omega t + kx) \)
अध्यारोपण के सिद्धांत से: \( y = y_1 + y_2 \)
\( y = A [\sin(\omega t - kx) + \sin(\omega t + kx)] \)
सूत्र \( \sin C + \sin D = 2 \sin(\frac{C+D}{2}) \cos(\frac{C-D}{2}) \) का उपयोग करके:
\( y = 2A \sin(\omega t) \cos(-kx) = 2A \cos(kx) \sin(\omega t) \)।
यह स्थिर तरंग का समीकरण है।
नोड्स के बीच की दूरी:
नोड्स वहाँ होते हैं जहाँ आयाम शून्य होता है: \( \cos(kx) = 0 \)।
\( kx = \frac{\pi}{2}, \frac{3\pi}{2}, \frac{5\pi}{2} \dots \)
\( \frac{2\pi}{\lambda} x = (2n-1)\frac{\pi}{2} \implies x = (2n-1)\frac{\lambda}{4} \)।
लगातार नोड्स \( x_n = \frac{\lambda}{4} \) और \( x_{n+1} = \frac{3\lambda}{4} \) पर होते हैं।
दूरी = \( \frac{3\lambda}{4} - \frac{\lambda}{4} = \frac{2\lambda}{4} = \frac{\lambda}{2} \)।
प्र. २१. प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत से जोड़े गए किसी LCR A.C. परिपथ के लिए प्रतिबाधा (impedance) की गणना कीजिए। कला संबंधित चित्र (phasor diagram) बनाइए।
मान लीजिए कि एक श्रेणी LCR परिपथ में प्रतिरोध \( R \), प्रेरकत्व \( L \), और धारिता \( C \) जुड़े हैं।
धारा \( I = I_0 \sin(\omega t) \)।
वोल्टेज:
\( V_R \), \( I \) के साथ समान कला में है।
\( V_L \), \( I \) से \( 90^\circ \) आगे है।
\( V_C \), \( I \) से \( 90^\circ \) पीछे है।
फेजर आरेख से, कुल वोल्टेज \( V \) सदिश योग है:
\( V = \sqrt{V_R^2 + (V_L - V_C)^2} \)
\( V = \sqrt{(IR)^2 + (IX_L - IX_C)^2} \)
\( V = I \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} \)
प्रतिबाधा (Impedance) \( Z = \frac{V}{I} = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} \)।
प्र. २२. हाइड्रोजन अणु के बाल्मर (Balmer) क्रम की प्रथम दो रेखाओं की तरंग लंबाई की गणना कीजिए।
सूत्र: \( \frac{1}{\lambda} = R_H \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{n^2} \right) \), जहाँ \( R_H = 1.097 \times 10^7 \, \text{m}^{-1} \)।
1. प्रथम रेखा (\( H_\alpha \)): \( n = 3 \)।
\( \frac{1}{\lambda_1} = 1.097 \times 10^7 \left( \frac{1}{4} - \frac{1}{9} \right) = 1.097 \times 10^7 \left( \frac{5}{36} \right) \)
\( \lambda_1 = \frac{36}{5 \times 1.097 \times 10^7} \approx 6.563 \times 10^{-7} \text{ m} = 6563 \, \mathring{A} \)।
2. द्वितीय रेखा (\( H_\beta \)): \( n = 4 \)।
\( \frac{1}{\lambda_2} = 1.097 \times 10^7 \left( \frac{1}{4} - \frac{1}{16} \right) = 1.097 \times 10^7 \left( \frac{3}{16} \right) \)
\( \lambda_2 = \frac{16}{3 \times 1.097 \times 10^7} \approx 4.861 \times 10^{-7} \text{ m} = 4861 \, \mathring{A} \)।
प्र. २३. \( \chi = 2.1 \times 10^{-5} \) सुग्राहिता वाले लिथियम भरे हुए चक्रीय कुंडल (toroid) में से विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। इसके चुंबकीय क्षेत्र में प्रतिशत बढ़ोतरी की गणना कीजिए जब चक्रीय कुंडल लिथियम रहित हो।
बिना लिथियम कोर के चुंबकीय क्षेत्र \( B_0 = \mu_0 n I \)।
लिथियम कोर के साथ चुंबकीय क्षेत्र \( B = \mu n I = \mu_0 (1 + \chi) n I \)।
\( B = B_0 (1 + \chi) \)।
वृद्धि \( \Delta B = B - B_0 = B_0 \chi \)।
प्रतिशत वृद्धि = \( \frac{\Delta B}{B_0} \times 100\% = \chi \times 100\% \)।
\( \% \text{ वृद्धि} = 2.1 \times 10^{-5} \times 100 = 2.1 \times 10^{-3} \% = 0.0021\% \)।
प्र. २४. किसी वृत्ताकार पथ की त्रिज्या 200 m है। यदि कोई कार इस पथ पर 25 m/s की गति से सुरक्षित रूप से चलाई जा सकती हो तो इस पथ के ढलान कोण (angle of banking) की गणना कीजिए।
बैंकिंग कोण \( \theta \) का सूत्र:
\( \tan\theta = \frac{v^2}{rg} \)।
दिया है: \( r = 200 \) m, \( v = 25 \) m/s, \( g = 9.8 \) m/s\(^2\)।
\( \tan\theta = \frac{25^2}{200 \times 9.8} = \frac{625}{1960} \)।
\( \tan\theta \approx 0.3189 \)।
\( \theta = \tan^{-1}(0.3189) \approx 17.69^\circ \) (या \( 17^\circ 41' \))।
प्र. २५. मेयर का संबंध सिद्ध कीजिए : \( C_p - C_v = \frac{R}{J} \)
एक मोल आदर्श गैस पर विचार करें।
प्रक्रिया 1 (स्थिर आयतन): दी गई ऊष्मा \( dQ_v = C_v dT \)। चूँकि \( dV=0 \), इसलिए कार्य \( dW=0 \)। प्रथम नियम से, \( dU = C_v dT \)।
प्रक्रिया 2 (स्थिर दाब): दी गई ऊष्मा \( dQ_p = C_p dT \)। कार्य \( dW = P dV \)।
प्रथम नियम से, \( dQ_p = dU + dW \)।
\( C_p dT = C_v dT + P dV \)।
आदर्श गैस समीकरण \( PV = RT \) का अवकलन करने पर: \( P dV = R dT \)।
\( C_p dT = C_v dT + R dT \)।
\( C_p = C_v + R \implies C_p - C_v = R \) (कार्य की इकाई में)।
यांत्रिक तुल्यांक \( J \) से भाग देने पर (यदि ऊष्मा कैलोरी में और कार्य जूल में हो):
$$ C_p - C_v = \frac{R}{J} $$
प्र. २६. एक प्रत्यावर्ती धारा का विभव \( e = 8\sin 628.4t \) है। ज्ञात कीजिए :
(i) शिखर वि.वा.ब. (peak value of e.m.f.)
(ii) वि.वा.ब. (e.m.f.) की आवृत्ति
(iii) वि.वा.ब. का तात्कालिक मूल्य जब t = 10 ms
\( e = e_0 \sin(\omega t) \) से तुलना करने पर:
(i) शिखर मान (Peak value) \( e_0 \):
\( e_0 = 8 \) V।
(ii) आवृत्ति (Frequency):
\( \omega = 628.4 \) rad/s।
\( 2\pi f = 628.4 \Rightarrow f = \frac{628.4}{2 \times 3.142} = \frac{628.4}{6.284} = 100 \) Hz।
(iii) \( t = 10 \) ms पर तात्कालिक मान:
\( t = 0.01 \) s।
\( e = 8 \sin(628.4 \times 0.01) = 8 \sin(6.284) \)।
\( 6.284 \text{ rad} \approx 2\pi \text{ rad} \)।
\( e = 8 \sin(2\pi) = 8 \times 0 = 0 \) V।
विभाग - ड (Section D)
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [१२]
प्र. २७. रोहित (transformer) क्या है? रोहित की संरचना तथा कार्य प्रणाली का वर्णन कीजिए। रोहित के समीकरण की गणितीय गणना कीजिए।
परिभाषा: ट्रांसफार्मर (Rohitra) एक विद्युत उपकरण है जो अन्योन्य प्रेरण (mutual induction) के सिद्धांत का उपयोग करके कम वोल्टेज (पर उच्च धारा) को उच्च वोल्टेज (पर कम धारा) में या इसके विपरीत बदलने के लिए उपयोग किया जाता है।
संरचना: इसमें नरम लोहे की क्रोड (laminated core) होती है जिस पर तांबे के तार की दो अलग-अलग कुंडलियाँ लिपटी होती हैं। स्रोत से जुड़ी कुंडली को प्राथमिक कुंडली (\( N_p \)) और लोड से जुड़ी कुंडली को द्वितीयक कुंडली (\( N_s \)) कहते हैं।
कार्य प्रणाली: जब प्राथमिक कुंडली में प्रत्यावर्ती धारा (AC) प्रवाहित होती है, तो क्रोड में परिवर्तित चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न होता है। यह फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से जुड़ता है और अन्योन्य प्रेरण के कारण उसमें EMF प्रेरित करता है।
समीकरण:
प्राथमिक EMF: \( e_p = -N_p \frac{d\phi}{dt} \)।
द्वितीयक EMF: \( e_s = -N_s \frac{d\phi}{dt} \)।
अनुपात:
$$ \frac{e_s}{e_p} = \frac{N_s}{N_p} $$
प्र. २८. द्वि-दरार (double slit) प्रयोग के ज्यामितीय समीकरणों के प्रयोग द्वारा व्यतिकरण पट्टों (interference bands) की चौड़ाई (fringe width) ज्ञात कीजिए।
माना \( S_1 \) और \( S_2 \) दो कला-संबद्ध स्रोत हैं जिनके बीच की दूरी \( d \) है और पर्दा \( D \) दूरी पर है।
पर्दे पर बिंदु P पर पहुँचने वाली तरंगों के बीच पथ अंतर:
\( \Delta x = S_2P - S_1P \)।
ज्यामिति से (मानते हुए \( D \gg d \)):
\( S_2P^2 - S_1P^2 = 2yd \)।
\( (S_2P - S_1P)(S_2P + S_1P) \approx \Delta x \cdot 2D \)।
\( \Delta x = \frac{yd}{D} \)।
दीप्त फ्रिंज के लिए (Constructive Interference):
\( \Delta x = n\lambda \implies y_n = \frac{n\lambda D}{d} \)।
फ्रिंज चौड़ाई (\( X \) या \( \beta \)): दो लगातार दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी।
\( X = y_{n+1} - y_n = \frac{(n+1)\lambda D}{d} - \frac{n\lambda D}{d} \)।
$$ X = \frac{\lambda D}{d} $$
प्र. २९. विद्युतधारामापी (ammeter) तथा विभवमापी (voltmeter) में अंतर स्पष्ट कीजिए। (कोई भी दो महत्त्व के तत्त्व)।
यदि किसी सरल आवर्त गति (simple harmonic motion) करने वाले कण का विस्थापन उसके आयाम का \( \frac{1}{3} \) है, तो उस कण की गतिज ऊर्जा, कुल ऊर्जा के कितने भाग (fraction) में होगी?
अंतर:
| एमीटर (Ammeter) | वोल्टमीटर (Voltmeter) |
|---|---|
| विद्युत धारा मापने के लिए उपयोग किया जाता है। | विभवांतर मापने के लिए उपयोग किया जाता है। |
| परिपथ में श्रेणी क्रम (series) में जोड़ा जाता है। | परिपथ में समांतर क्रम (parallel) में जोड़ा जाता है। |
| प्रतिरोध बहुत कम होता है। | प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। |
समस्या का हल:
विस्थापन \( x = \frac{A}{3} \)।
कुल ऊर्जा \( E = \frac{1}{2}kA^2 \)।
स्थितिज ऊर्जा \( U = \frac{1}{2}kx^2 = \frac{1}{2}k(\frac{A}{3})^2 = \frac{1}{9} (\frac{1}{2}kA^2) = \frac{E}{9} \)।
गतिज ऊर्जा \( K = E - U = E - \frac{E}{9} = \frac{8E}{9} \)।
कुल ऊर्जा का भाग = \( \frac{K}{E} = \frac{8}{9} \)।
प्र. ३०. फेरी की संपूर्ण काली वस्तु (Ferry’s perfectly black body) का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए।
227°C पर हाइड्रोजन अणु के वर्ग मूल वर्ग माध्य वेग (rms speed) की तुलना 127°C पर ऑक्सीजन अणु के वर्ग मूल वर्ग माध्य वेग से कीजिए।
दिया है : हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के आण्विक द्रव्यमान क्रमशः 2 तथा 32 हैं।
समस्या का हल:
RMS वेग \( v_{rms} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \)।
हाइड्रोजन (\( H_2 \)): \( T_H = 227+273 = 500 \) K, \( M_H = 2 \)।
ऑक्सीजन (\( O_2 \)): \( T_O = 127+273 = 400 \) K, \( M_O = 32 \)।
अनुपात:
$$ \frac{v_H}{v_O} = \sqrt{\frac{T_H}{M_H} \times \frac{M_O}{T_O}} $$
$$ \frac{v_H}{v_O} = \sqrt{\frac{500}{2} \times \frac{32}{400}} $$
$$ \frac{v_H}{v_O} = \sqrt{250 \times 0.08} = \sqrt{20} $$
$$ \frac{v_H}{v_O} = 2\sqrt{5} \approx 4.47 $$
प्र. ३१. किसी आवेशित संधारित्र में संचित ऊर्जा (energy stored) की गणितीय गणना कीजिए।
15 cm त्रिज्या का एक गोलाकार धातु का गोला 2µC आवेश से आवेशित है। इस गोले के केंद्र से 20 cm की दूरी (distance) पर विद्युतीय क्षेत्र की गणना कीजिए।
व्युत्पत्ति:
एक संधारित्र को आवेशित करने पर विचार करें। यदि तात्कालिक आवेश \( q \) और विभव \( V = q/C \) है, तो अतिरिक्त आवेश \( dq \) देने के लिए किया गया कार्य:
\( dW = V dq = \frac{q}{C} dq \)।
कुल कार्य (0 से Q तक आवेशित करने के लिए):
\( W = \int_0^Q \frac{q}{C} dq = \frac{1}{C} [\frac{q^2}{2}]_0^Q = \frac{Q^2}{2C} \)।
यह कार्य ऊर्जा के रूप में संचित होता है \( U = \frac{Q^2}{2C} = \frac{1}{2}CV^2 \)।
समस्या का हल:
त्रिज्या \( R = 15 \) cm। आवेश \( Q = 2 \mu C = 2 \times 10^{-6} \) C।
दूरी \( r = 20 \) cm \( = 0.2 \) m।
चूंकि \( r > R \), बिंदु गोले के बाहर है।
विद्युत क्षेत्र \( E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r^2} \)।
\( \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \approx 9 \times 10^9 \) Nm\(^2\)/C\(^2\) का उपयोग करके।
$$ E = \frac{9 \times 10^9 \times 2 \times 10^{-6}}{(0.2)^2} $$
$$ E = \frac{18 \times 10^3}{0.04} = \frac{18000}{0.04} $$
$$ E = 450,000 \, \text{N/C} = 4.5 \times 10^5 \, \text{N/C} $$
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