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HSC 12th Chemistry Board Question Paper Solution 2025 (Hindi Medium)

HSC 12th Chemistry Board Question Paper Solution 2025 (Hindi Medium) - Maharashtra Board

रसायनशास्त्र (Chemistry 55) Board Paper Solution

HSC 12th Board Exam 2025 | Day 08 | Set J-305 (H) | Hindi Medium
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प्रश्न पत्र का विवरण (Paper Details)

विषय: रसायनशास्त्र (Chemistry 55)

वर्ष: 2025

अधिकतम अंक: 70

समय: 3 घंटे


दी गई जानकारी (Given Data):

  • \( R = 8.314 \text{ J/K/mol} \)
  • Na का परमाणु भार = 23
  • जल का \( K_f = 1.86 \text{ K kg mol}^{-1} \)
  • \( 1F = 96500 \text{ C} \)
  • \( N_A = 6.022 \times 10^{23} \)
विभाग - अ (SECTION - A)
प्र. १. निम्नलिखित बहुविकल्प प्रकार के प्रश्नों के सही उत्तर चुनकर लिखें : [१०]

(i) ______ में शॉट्की दोष (Schottky defect) नहीं देखा जाता है।

  • (अ) NaCl
  • (ब) KCl
  • (क) AgBr
  • (ड) NiO
उत्तर: (ड) NiO

स्पष्टीकरण: शॉट्की दोष उन आयनिक ठोसों में पाया जाता है जिनमें धनायन और ऋणायन का आकार लगभग समान होता है (जैसे NaCl, KCl, AgBr)। NiO में धातु न्यूनता दोष (Metal deficiency defect) पाया जाता है।


(ii) यदि जल का \( K_f \) 1.86 K kg mol\(^{-1}\) है तो यूरिया के 0.1m जलीय विलयन का हिमांक (freezing point) कितना होगा?

  • (अ) 1.86 ºC
  • (ब) –1.86 ºC
  • (क) 0.186 ºC
  • (ड) –0.186 ºC
उत्तर: (ड) –0.186 ºC

स्पष्टीकरण: $$ \Delta T_f = K_f \times m \times i $$ यूरिया एक विद्युत अनपघट्य (non-electrolyte) है, इसलिए \( i = 1 \)। $$ \Delta T_f = 1.86 \times 0.1 \times 1 = 0.186 \text{ K} $$ विलयन का हिमांक: $$ T_f = T_f^0 - \Delta T_f = 0^\circ\text{C} - 0.186^\circ\text{C} = -0.186^\circ\text{C} $$


(iii) ओज़ोन परत का क्षरण (depletion) ______ द्वारा होता है।

  • (अ) NO
  • (ब) NO\(_2\)
  • (क) NO\(_3\)
  • (ड) N\(_2\)O\(_5\)
उत्तर: (अ) NO

स्पष्टीकरण: नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) ओज़ोन के साथ अभिक्रिया करके उसका क्षरण करता है: \( \text{NO} + \text{O}_3 \rightarrow \text{NO}_2 + \text{O}_2 \)।


(iv) जब अतिरिक्त AgNO\(_3\) को संकुल (complex) में मिलाते हैं तो एक मोल AgCl उपजता (precipitate) है। संकुल का सूत्र होगा?

  • (अ) [CoCl\(_2\) (NH\(_3\))\(_4\)]Cl
  • (ब) [CoCl (NH\(_3\))\(_5\)]Cl\(_2\)
  • (क) [CoCl\(_3\) (NH\(_3\))\(_3\)]
  • (ड) [Co (NH\(_3\))\(_6\)]Cl\(_3\)
उत्तर: (अ) [CoCl\(_2\) (NH\(_3\))\(_4\)]Cl

स्पष्टीकरण: 1 मोल AgCl के अवक्षेपण का अर्थ है कि समन्वय मंडल (coordination sphere) के बाहर केवल 1 क्लोराइड आयन उपस्थित है।


(v) 4 मोल के सल्फर डाइऑक्साइड से सल्फर ट्राइऑक्साइड के ऑक्सीकरण (oxidation) के लिए \( \Delta n_g \) का मान ______ है?

  • (अ) – 2
  • (ब) 2
  • (क) – 4
  • (ड) 4
उत्तर: (अ) – 2

स्पष्टीकरण: अभिक्रिया: \( 4\text{SO}_2(g) + 2\text{O}_2(g) \rightarrow 4\text{SO}_3(g) \) $$ \Delta n_g = (\text{गैसीय उत्पादों के मोल}) - (\text{गैसीय अभिकारकों के मोल}) $$ $$ \Delta n_g = 4 - (4 + 2) = 4 - 6 = -2 $$


(vi) निम्नलिखित में से एक आयामी (one dimensional) नैनो संरचना है?

  • (अ) नैनोकण
  • (ब) नैनोट्यूब
  • (क) नैनोफिल्म
  • (ड) नैनोरॉड्स
उत्तर: (ब) नैनोट्यूब

स्पष्टीकरण: नैनोट्यूब्स और नैनोवायर्स को एक आयामी (1D) नैनो संरचनाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।


(vii) विद्युत अपघट्य की सांद्रता एवं वियोजनांश (degree of dissociation) में संबंध कौन सा सूत्र दर्शाता है?

  • (अ) \( c = \sqrt{\frac{K_a}{\alpha}} \)
  • (ब) \( \alpha = \sqrt{\frac{K_a}{c}} \)
  • (क) \( c = \sqrt{K_a \alpha} \)
  • (ड) \( c = \sqrt{\frac{\alpha}{K_a}} \)
उत्तर: (ब) \( \alpha = \sqrt{\frac{K_a}{c}} \)

स्पष्टीकरण: ओस्टवाल्ड के तनुता नियम (Ostwald's dilution law) के अनुसार, \( K_a = \alpha^2 c \), अतः \( \alpha = \sqrt{\frac{K_a}{c}} \)।


(viii) निम्नलिखित में से अधिकतम अम्लीय (acidic) यौगिक है?

  • (अ) m-Hydroxybenzoic acid (मेटा-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल)
  • (ब) o-Aminobenzoic acid (ऑर्थो-ऐमीनोबेन्जोइक अम्ल)
  • (क) Benzoic acid (बेन्जोइक अम्ल)
  • (ड) p-Methoxybenzoic acid (पैरा-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल)
उत्तर: (अ) m-Hydroxybenzoic acid

स्पष्टीकरण: (अ) m-Hydroxybenzoic acid: -OH समूह मेटा स्थिति पर केवल -I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन आकर्षी) डालता है, जिससे अम्लता बढ़ती है।
(क) बेन्जोइक अम्ल: मानक।
(ड) p-Methoxybenzoic acid: -OCH\(_3\) समूह +R प्रभाव (इलेक्ट्रॉन दाता) दिखाता है, जिससे अम्लता कम होती है।
अतः, (अ) सबसे अधिक अम्लीय है।


(ix) विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता को ज्ञात करने के लिए ______ सूत्र का उपयोग होता है।

  • (अ) \( \Lambda = \frac{1000c}{k} \)
  • (ब) \( c = \frac{1000\Lambda}{k} \)
  • (क) \( \Lambda = \frac{1000k}{c} \)
  • (ड) \( k = \frac{1000}{\Lambda c} \)
उत्तर: (क) \( \Lambda = \frac{1000k}{c} \)

(x) निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीयक अमीन है?

  • (अ) सायक्लोहेक्सिलअमीन
  • (ब) आयसोप्रोपिलअमीन
  • (क) डायफिनाइलअमीन
  • (ड) N, N-डायमिथाइलएनीलीन
उत्तर: (क) डायफिनाइलअमीन

स्पष्टीकरण: डायफिनाइलअमीन का सूत्र \( (C_6H_5)_2NH \) है, जिसमें \( >NH \) समूह दो कार्बन समूहों से जुड़ा होता है, अतः यह एक द्वितीयक अमीन है।

HSC Chemistry

प्र. २. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [८]

(i) N, N-डायमेथिल एथेनामीिन का संरचना सूत्र लिखिए।

$$ \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{N}(\text{CH}_3)_2 $$

(ii) क्लेमेंसन अपचयन (Clemmensen’s reduction) में कार्बोनिल ग्रुप के अपचयन के लिए उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मक कौन-से हैं? लिखिए।

जिंक अमलगम (Zn-Hg) और सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (conc. HCl)।

(iii) आयसोप्रीन (isoprene) का आई.यू.पी.ए.सी.(IUPAC) नाम लिखिए।

2-मेथिलब्यूटा-1,3-डाईन (2-Methylbuta-1,3-diene)।

(iv) A \(\to\) Product के लिए दर नियम समीकरण, rate = k[A]\(^x\) है। यदि x < 0 तो ‘A’ की सांद्रता में वृद्धि (increase) करने पर अभिक्रिया की दर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

चूँकि अभिक्रिया की कोटि \( x \) ऋणात्मक है, अभिक्रिया की दर ‘A’ की सांद्रता के व्युत्क्रमानुपाती है। इसलिए, यदि ‘A’ की सांद्रता बढ़ाई जाती है, तो अभिक्रिया की दर घट जाएगी

(v) KBr का जलीय विलयन जिसका हिमांक –3.72°C है, इसकी मोललता क्या होगी? [ जल का \( K_f \) = 1.86 K kg mol\(^{-1}\) है ]

KBr एक प्रबल विद्युत अपघट्य है, जो \( \text{K}^+ \) और \( \text{Br}^- \) में वियोजित होता है, अतः वांट हॉफ गुणांक \( i = 2 \)।
$$ \Delta T_f = 0 - (-3.72) = 3.72^\circ \text{C} $$ $$ \Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m $$ $$ 3.72 = 2 \times 1.86 \times m $$ $$ 3.72 = 3.72 \times m $$ $$ m = 1 \text{ mol/kg (या 1 molal)} $$

(vi) जब अतिरिक्त अमोनिया की क्रिया क्लोरीन के साथ होती है, तो उसका संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

जब अमोनिया अधिक मात्रा में हो:
$$ 8\text{NH}_3 + 3\text{Cl}_2 \rightarrow 6\text{NH}_4\text{Cl} + \text{N}_2 $$

(vii) संकुल रचना के निर्माण के दौरान, EDTA में उपस्थित दाता (donor) परमाणुओं की संख्या लिखिए।

EDTA एक षटदंती (hexadentate) लिगेंड है। इसमें 6 दाता परमाणु होते हैं (4 ऑक्सीजन परमाणु और 2 नाइट्रोजन परमाणु)।

(viii) ब्रास (brass) मिश्रधातु में धातु तत्त्वों के नाम लिखिए।

तांबा (Copper - Cu) और जस्ता (Zinc - Zn)।

विभाग - ब (SECTION - B)

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [१६]

प्र. ३. प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अर्द्ध जीवन (half life) एवं दर स्थिरांक के बीच संबंध स्थापित कीजिए।

प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित दर नियम है: $$ k = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_t} $$ जहाँ \( [A]_0 \) प्रारंभिक सांद्रता है और \( [A]_t \), \( t \) समय पर सांद्रता है।

अर्द्ध जीवन (\( t_{1/2} \)) पर:
अभिकारक की सांद्रता प्रारंभिक सांद्रता की आधी हो जाती है। $$ [A]_t = \frac{[A]_0}{2} $$ ये मान समीकरण में रखने पर: $$ k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_0 / 2} $$ $$ k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log_{10} (2) $$ चूँकि \( \log_{10}(2) = 0.3010 \): $$ k = \frac{2.303 \times 0.3010}{t_{1/2}} $$ $$ k = \frac{0.693}{t_{1/2}} $$ $$ \therefore t_{1/2} = \frac{0.693}{k} $$ यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्द्ध जीवन और दर स्थिरांक के बीच संबंध है।

प्र. ४. (अ) हेनरी का नियम व्यक्त (state) कीजिए। (ब) परासरण दाब को परिभाषित कीजिए।

(अ) हेनरी का नियम (Henry's Law):
स्थिर तापमान पर, किसी द्रव में गैस की विलेयता विलयन की सतह पर गैस के आंशिक दाब के सीधे समानुपाती होती है। $$ S = K_H P $$ जहाँ \( S \) विलेयता है, \( P \) दाब है, और \( K_H \) हेनरी स्थिरांक है।

(ब) परासरण दाब (Osmotic Pressure):
वह अतिरिक्त द्रवस्थैतिक दाब जो विलायक के अणुओं को अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन में प्रवेश करने से रोकने के लिए विलयन पर लगाया जाता है, परासरण दाब कहलाता है।

प्र. ५. लेन्थेनॉइड एवं एक्टिनॉइड के बीच अंतर लिखिए।
लेन्थेनॉइड (Lanthanoids) एक्टिनॉइड (Actinoids)
अंतिम इलेक्ट्रॉन 4f कक्षक में प्रवेश करता है। अंतिम इलेक्ट्रॉन 5f कक्षक में प्रवेश करता है।
4f कक्षकों की बंधन ऊर्जा अधिक होती है। 5f कक्षकों की बंधन ऊर्जा कम होती है।
ये सीमित ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+2, +3, +4) दर्शाते हैं। +3 सबसे सामान्य है। ये विविध ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+3, +4, +5, +6, +7) दर्शाते हैं।
ये रेडियोधर्मी नहीं होते (प्रोमिथियम को छोड़कर)। सभी एक्टिनॉइड रेडियोधर्मी होते हैं।
प्र. ६. निम्न के संदर्भ में ऑक्सीजन का असामान्य (anomalous) व्यवहार लिखिए : (i) परमाणुता (ii) ऑक्सीकरण अवस्था (iii) चुंबकीय गुणधर्म (iv) हाइड्राइड्स की प्रकृति

(i) परमाणुता (Atomicity): ऑक्सीजन एक द्विपरमाणुक (\( \text{O}_2 \)) अणु है, जबकि समूह के अन्य तत्व बहुपरमाणुक (जैसे \( \text{S}_8 \)) होते हैं।
(ii) ऑक्सीकरण अवस्था: ऑक्सीजन सामान्यतः -2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। d-कक्षक की अनुपस्थिति के कारण यह उच्च धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+4, +6) नहीं दर्शाता।
(iii) चुंबकीय गुणधर्म: आण्विक ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) अनुचुंबकीय (paramagnetic) है, जबकि अन्य तत्व प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होते हैं।
(iv) हाइड्राइड्स की प्रकृति: हाइड्रोजन बंध के कारण जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) सामान्य ताप पर द्रव है, जबकि अन्य हाइड्राइड्स (जैसे \( \text{H}_2\text{S} \)) गैसें हैं।

प्र. ७. क्या क्रिया होती है : (i) एनीसोल (anisole) पर एसीटीक अम्ल में द्रव ब्रोमीन की (ii) सोडियम ऐसीटेट पर सोडा-लाइम (Soda-lime) की

(i) एनीसोल पर ब्रोमीनीकरण:
एसीटीक अम्ल की उपस्थिति में ब्रोमीन, एनीसोल के साथ अभिक्रिया करके पैरा-ब्रोमोएनीसोल (मुख्य उत्पाद) और ऑर्थो-ब्रोमोएनीसोल (अल्प उत्पाद) बनाता है। $$ \text{Anisole} + \text{Br}_2 \xrightarrow{\text{CH}_3\text{COOH}} \text{p-Bromoanisole} + \text{o-Bromoanisole} $$

(ii) सोडियम ऐसीटेट पर सोडा-लाइम की क्रिया:
सोडियम ऐसीटेट को सोडा-लाइम (NaOH और CaO का मिश्रण) के साथ गर्म करने पर विकारार्बोक्सिलीकरण (decarboxylation) होता है और मीथेन गैस बनती है। $$ \text{CH}_3\text{COONa} + \text{NaOH} \xrightarrow[\Delta]{\text{CaO}} \text{CH}_4 \uparrow + \text{Na}_2\text{CO}_3 $$

प्र. ८. किसी अभिक्रिया में यदि अभिकारक का आयतन 43 bar दाब के विरूद्ध 8 dm\(^3\) से 4 dm\(^3\) तक कम होता है तो कार्य की गणना kJ में ज्ञात कीजिए। [ 1 dm\(^3\). bar = 100J ]

दिया गया है:
\( V_1 = 8 \text{ dm}^3 \)
\( V_2 = 4 \text{ dm}^3 \)
\( P_{ext} = 43 \text{ bar} \)
सूत्र: \( W = -P_{ext} (V_2 - V_1) \)
गणना:
$$ W = -43 \text{ bar} \times (4 \text{ dm}^3 - 8 \text{ dm}^3) $$ $$ W = -43 \times (-4) $$ $$ W = +172 \text{ bar dm}^3 $$ kJ में परिवर्तन:
\( 1 \text{ bar dm}^3 = 100 \text{ J} = 0.1 \text{ kJ} \)
$$ W = 172 \times 0.1 \text{ kJ} = 17.2 \text{ kJ} $$ किया गया कार्य 17.2 kJ है।

प्र. ९. जटिल संकुल में आयनन समावयवी योग्य उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

आयनन समावयवता (Ionization Isomerism): यह समावयवता तब उत्पन्न होती है जब संकुल लवण में प्रति-आयन (counter ion) स्वयं एक लिगेंड के रूप में कार्य कर सकता है और संकुल के भीतर लिगेंड को विस्थापित कर सकता है। ये समावयवी विलयन में भिन्न-भिन्न आयन देते हैं।

उदाहरण:
1. \( [Co(NH_3)_5SO_4]Br \) (रंग: लाल-बैंगनी)
यह AgNO\(_3\) के साथ AgBr का अवक्षेप देता है (Br\(^-\) बाहर है)।
2. \( [Co(NH_3)_5Br]SO_4 \) (रंग: लाल)
यह BaCl\(_2\) के साथ BaSO\(_4\) का अवक्षेप देता है (SO\(_4^{2-}\) बाहर है)।

प्र. १०. सुक्रोज से ग्लूकोज का निर्माण लिखिए।

प्रयोगशाला में, सुक्रोज (चीनी) के अल्कोहलिक विलयन को तनु HCl या H\(_2\)SO\(_4\) के साथ उबालने पर इसका जल-अपघटन (hydrolysis) होता है और ग्लूकोज व फ्रुक्टोज का सममोलर मिश्रण प्राप्त होता है।

C\(_\text{12}\)H\(_\text{22}\)O\(_\text{11}\) (Sucrose) + H\(_\text{2}\)O \(\xrightarrow{\text{H}^+, \Delta}\) C\(_\text{6}\)H\(_\text{12}\)O\(_\text{6}\) (Glucose) + C\(_\text{6}\)H\(_\text{12}\)O\(_\text{6}\) (Fructose)
प्र. ११. सोडियम आयन के अपचयन (reduction) द्वारा 1g सोडियम धातु उत्पन्न करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत धारा की आवश्यकता होगी?

अभिक्रिया: \( \text{Na}^+ + e^- \rightarrow \text{Na} \)
1 मोल इलेक्ट्रॉन (1 फैराडे = 96500 C) 1 मोल Na निक्षेपित करता है।
Na का मोलर द्रव्यमान = 23 g/mol।

23 g Na उत्पन्न करने के लिए आवश्यक आवेश = 96500 C।
अतः, 1 g Na उत्पन्न करने के लिए:
$$ Q = \frac{96500}{23} \text{ C} $$ $$ Q \approx 4195.65 \text{ C} $$

प्र. १२. ऐसे अल्कोहल का संरचना सूत्र एवं आई.यू.पी.ए.सी. नाम (IUPAC) नाम लिखिए जिसका अणुसूत्र C\(_4\)H\(_\text{10}\)O है व जो सामान्य अवस्था में ऑक्सीकरण में भाग नहीं लेता है।

जो अल्कोहल सामान्य परिस्थितियों में ऑक्सीकरण के प्रति प्रतिरोधी होता है, वह तृतीयक अल्कोहल (Tertiary alcohol) होता है।
C\(_4\)H\(_\text{10}\)O सूत्र के लिए तृतीयक अल्कोहल 'tert-ब्यूटिल अल्कोहल' है।

संरचना सूत्र:
$$ (\text{CH}_3)_3\text{C-OH} $$ IUPAC नाम: 2-Methylpropan-2-ol (2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल)

प्र. १३. निम्नलिखित अभिक्रिया में 'अ' एवं 'ब' पहचानिए व पूर्ण अभिक्रिया पुनः लिखिए :

\( \text{CH}_3 - \text{CH} = \text{CH}_2 \xrightarrow[\text{पैरॉक्साईड}]{\text{HBr}} \text{अ} \xrightarrow[\text{-KBr}]{\text{अल्कोहलिक KCN}} \text{ब} \)

चरण 1: प्रोपीन की HBr के साथ पैरॉक्साईड की उपस्थिति में अभिक्रिया एंटी-मार्कोनिकॉफ नियम का पालन करती है।
अ = 1-Bromopropane (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \))।

चरण 2: अल्कोहलिक KCN के साथ अभिक्रिया से ब्रोमीन साइनाइड समूह द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है।
ब = Butanenitrile (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CN} \))।

पूर्ण अभिक्रिया:
\( \text{CH}_3 - \text{CH} = \text{CH}_2 \xrightarrow[\text{Peroxide}]{\text{HBr}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \xrightarrow{\text{alc. KCN}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CN} \)

प्र. १४. निम्न तैयार करने के लिए अभिक्रिया लिखिए : (i) रोजनमंड अभिक्रिया (Rosenmund reaction) द्वारा एसीटैल्डिहाइड (ii) गॉटरमन कोच फॉर्मिलेशन (Gatterman-Koch formylation) द्वारा बेंजल्डिहाइड

(i) रोजनमंड अभिक्रिया (एसीटैल्डिहाइड):
एसिटिल क्लोराइड का Pd/BaSO\(_4\) की उपस्थिति में हाइड्रोजन द्वारा अपचयन करने पर एसीटैल्डिहाइड प्राप्त होता है। $$ \text{CH}_3\text{COCl} + \text{H}_2 \xrightarrow{\text{Pd/BaSO}_4} \text{CH}_3\text{CHO} + \text{HCl} $$

(ii) गॉटरमन-कोच अभिक्रिया (बेंजल्डिहाइड):
निर्जल AlCl\(_3\) और CuCl की उपस्थिति में बेंजीन की कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और HCl के साथ क्रिया कराने पर बेंजल्डिहाइड बनता है। $$ \text{C}_6\text{H}_6 + \text{CO} + \text{HCl} \xrightarrow{\text{Anhyd. AlCl}_3 / \text{CuCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CHO} + \text{HCl} $$

विभाग - क (SECTION - C)

निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [२४]

प्र. १५. 3d श्रेणी का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक संरूपण (configuration) लिखिए। सल्फ्यूरिक अम्ल व थायोसल्फ्यूरिक अम्ल की संरचना बनाइए।

3d श्रेणी का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
\( [\text{Ar}] 3d^{1-10} 4s^{1-2} \)

संरचना:
1. सल्फ्यूरिक अम्ल (H\(_2\)SO\(_4\)): S केंद्रीय परमाणु है, जिससे दो S=O बंध और दो S-OH बंध जुड़े होते हैं (चतुष्फलकीय)।
2. थायोसल्फ्यूरिक अम्ल (H\(_2\)S\(_2\)O\(_3\)): सल्फ्यूरिक अम्ल के समान, लेकिन एक द्वि-बंधित ऑक्सीजन परमाणु को सल्फर परमाणु से प्रतिस्थापित किया जाता है (S=S बंध)।

प्र. १६. संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म की परिभाषा लिखिए। NaOH के जलीय विलयन में हाइड्रॉक्सिल आयन की सांद्रता \( 2 \times 10^{-4} \) mol dm\(^{-3}\) है। विलयन के pH की गणना कीजिए।

संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair): अम्ल और क्षार का ऐसा युग्म जो केवल एक प्रोटॉन (H\(^+\)) के अंतर से भिन्न होता है, संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म कहलाता है।

गणना:
दिया गया है: \( [\text{OH}^-] = 2 \times 10^{-4} \text{ M} \)
$$ \text{pOH} = -\log_{10} [\text{OH}^-] $$ $$ \text{pOH} = -\log_{10} (2 \times 10^{-4}) $$ $$ \text{pOH} = 4 - \log_{10} 2 = 4 - 0.3010 = 3.699 $$ हम जानते हैं, \( \text{pH} + \text{pOH} = 14 \)
$$ \text{pH} = 14 - 3.699 $$ $$ \text{pH} = 10.301 $$

प्र. १७. परमाणु अर्थव्यवस्था क्या है? नैनो सामग्री की कोई दो उपयोगिताएँ (applications) स्पष्ट कीजिए।

परमाणु अर्थव्यवस्था (Atom Economy): यह रासायनिक अभिक्रिया की दक्षता का माप है, जिसे वांछित उत्पाद के आणविक भार और सभी अभिकारकों के कुल आणविक भार के अनुपात (प्रतिशत में) के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका उद्देश्य अंतिम उत्पाद में सभी अभिकारक परमाणुओं को शामिल करना है।

नैनो सामग्री के उपयोग:
1. चिकित्सा: लक्षित दवा वितरण (Targeted drug delivery) के लिए नैनोकणों (जैसे गोल्ड नैनोकण) का उपयोग किया जाता है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं होता।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स: क्वांटम डॉट्स और नैनोवायर्स का उपयोग करके छोटे, तेज और अधिक कुशल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और डिस्प्ले बनाए जाते हैं।

प्र. १८. पेप्टाइड बंध क्या है? इसका निर्माण कैसे होता है? एल्किल हैलाइड को नाइट्रोएल्केन में परिवर्तित करने के लिए उपयोग होने वाले अभिकर्मक का नाम व सूत्र लिखिए।

पेप्टाइड बंध (Peptide Bond): प्रोटीन में, एक अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिल समूह (-COOH) और दूसरे अमीनो अम्ल के अमीनो समूह (-NH\(_2\)) के बीच बने एमाइड लिंकेज (-CO-NH-) को पेप्टाइड बंध कहते हैं।

निर्माण: यह एक संघनन (condensation) अभिक्रिया द्वारा बनता है जिसमें जल का एक अणु निकलता है।

एल्किल हैलाइड से नाइट्रोएल्केन अभिकर्मक:
नाम: सिल्वर नाइट्राइट
सूत्र: AgNO\(_2\)

प्र. १९. (अ) फिनॉल पर निम्नलिखित अभिकर्मकों की क्रिया के लिए अभिक्रियाएँ लिखिए: (i) नाइट्रेटिंग मिश्रण (ii) जिंक (zinc) धूल (ब) फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड की एथिलमेथिल ईथर पर क्या क्रिया होती है?

(अ) फिनॉल की अभिक्रियाएं:
(i) नाइट्रेटिंग मिश्रण (सांद्र HNO\(_3\) + सांद्र H\(_2\)SO\(_4\)): फिनॉल का नाइट्रीकरण होकर 2,4,6-ट्राईनाइट्रोफिनॉल (पिक्रिक अम्ल) बनता है।
(ii) जिंक धूल: फिनॉल का अपचयन होकर बेंजीन बनता है। \( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{Zn} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_6 + \text{ZnO} \).

(ब) PCl\(_5\) की एथिल मेथिल ईथर पर क्रिया:
ईथर का C-O बंध टूटकर एल्किल क्लोराइड बनते हैं।
$$ \text{CH}_3-\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 + \text{PCl}_5 \xrightarrow{\Delta} \text{CH}_3\text{Cl} + \text{C}_2\text{H}_5\text{Cl} + \text{POCl}_3 $$ उत्पाद: मेथिल क्लोराइड, एथिल क्लोराइड और फॉस्फोरिल क्लोराइड।

प्र. २०. (अ) EAN की गणना करने के लिए सूत्र लिखिए। (ब) [CO(NH\(_3\))\(_6\)]\(^{3+}\) संकुल आयन का निर्माण निम्न के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए : (i) संकरण का प्रकार (ii) चुंबकीय गुणधर्म

(अ) EAN (Effective Atomic Number) सूत्र:
$$ \text{EAN} = Z - X + Y $$ जहाँ \( Z \) = धातु का परमाणु क्रमांक, \( X \) = ऑक्सीकरण अवस्था (खोए गए इलेक्ट्रॉन), \( Y \) = लिगेंड्स द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉन (2 \(\times\) समन्वय संख्या)।

(ब) [Co(NH\(_3\))\(_6\)]\(^{3+}\):
कोबाल्ट (Z=27), ऑक्सीकरण अवस्था = +3।
Co\(^{3+}\) विन्यास: [Ar] \( 3d^6 \)।
NH\(_3\) प्रबल लिगेंड है, जिससे 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है।
(i) संकरण: \( d^2sp^3 \) (आंतरिक कक्षक संकुल)।
(ii) चुंबकीय गुणधर्म: सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं, अतः यह प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) है।

प्र. २१. (अ) M\(^{2+}\) आयन का सिर्फ़ स्पिन (spin only) चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए। [ M का परमाणु क्रमांक = 26 ] (ब) गैडोलिनियम (Z = 64) का संघनित (condensed) इलेक्ट्रॉनिक संरूपण लिखिए।

(अ) चुंबकीय आघूर्ण गणना:
M = 26 (आयरन - Fe)। M\(^{2+}\) मतलब Fe\(^{2+}\)।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] \( 3d^6 \)।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (\( n \)) = 4।
$$ \mu = \sqrt{n(n+2)} \text{ B.M.} $$ $$ \mu = \sqrt{4(4+2)} = \sqrt{24} \approx 4.90 \text{ B.M.} $$

(ब) गैडोलिनियम (Gd, Z=64) का विन्यास:
$$ [\text{Xe}] 4f^7 5d^1 6s^2 $$ (नोट: 5d में 1 इलेक्ट्रॉन जाता है क्योंकि अर्ध-पूरित f-कक्षक स्थिर होता है)।

प्र. २२. (अ) वात्या भट्टी (blast furnace) के अपचयन क्षेत्र (zone) में Fe\(_2\)O\(_3\) को ‘Fe’ में परिवर्तित करने के लिए उपयोग किए गए अपचायक लिखिए। (ब) निम्न में सम्मिलित रासायनिक समीकरण लिखिए : (i) एथीलएमीन के लिए कार्बिलएमीन अभिक्रिया (ii) एसीटामाइड के लिए हॉफमेन ब्रोमेमाइड डिग्रेडेशन

(अ) वात्या भट्टी में अपचायक:
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कोक (कार्बन, C)।

(ब) रासायनिक समीकरण:
(i) कार्बिलएमीन अभिक्रिया (एथीलएमीन):
$$ \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH (alc)} \xrightarrow{\Delta} \text{C}_2\text{H}_5\text{NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} $$ (उत्पाद: एथिल आइसोसाइनाइड)

(ii) हॉफमेन ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (एसीटामाइड):
$$ \text{CH}_3\text{CONH}_2 + \text{Br}_2 + 4\text{KOH} \rightarrow \text{CH}_3\text{NH}_2 + \text{K}_2\text{CO}_3 + 2\text{KBr} + 2\text{H}_2\text{O} $$ (उत्पाद: मेथिलएमीन)

प्र. २३. (अ) बेंजल्डिहाइड (benzaldehyde) की सहायता से कैनीज़ारो (Cannizzaro’s) अभिक्रिया स्पष्ट कीजिए। (ब) साइक्लोहेक्जीन (cyclohexene) को एडिपिक अम्ल (adipic acid) में परिवर्तित करने के लिए अभिक्रिया लिखिए।

(अ) कैनीज़ारो अभिक्रिया:
जिन एल्डिहाइड में \(\alpha\)-हाइड्रोजन नहीं होता (जैसे बेंजल्डिहाइड), वे सांद्र क्षार (NaOH/KOH) के साथ गर्म करने पर स्वतः ऑक्सीकरण और अपचयन (असमानुपातन) दर्शाते हैं।
$$ 2\text{C}_6\text{H}_5\text{CHO} + \text{conc. NaOH} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{OH} + \text{C}_6\text{H}_5\text{COONa} $$ (उत्पाद: बेंजिल अल्कोहल और सोडियम बेंजोएट)।

(ब) साइक्लोहेक्जीन से एडिपिक अम्ल:
साइक्लोहेक्जीन का अम्लीय KMnO\(_4\) के साथ ऑक्सीकरण करने पर वलय टूट जाता है और एडिपिक अम्ल बनता है। $$ \text{Cyclohexene} + [O] \xrightarrow{\text{KMnO}_4, \text{H}_2\text{SO}_4, \Delta} \text{HOOC}-(\text{CH}_2)_4-\text{COOH} $$

प्र. २४. शून्य कोटि अभिक्रिया की परिभाषा लिखिए। एक अभिक्रिया दो पदों में होती है : (i) NO(g) + Cl\(_2\)(g) \(\to\) NOCl\(_2\)(g) (ii) NOCl\(_2\)(g) + NO(g) \(\to\) 2NOCl(g). संपूर्ण अभिक्रिया लिखिए एवं अभिक्रिया मध्यस्थ (intermediate) पहचानिए।

शून्य कोटि अभिक्रिया: वह अभिक्रिया जिसमें अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करती है, शून्य कोटि की अभिक्रिया कहलाती है।

अभिक्रिया विश्लेषण:
पद 1: \( \text{NO} + \text{Cl}_2 \rightarrow \text{NOCl}_2 \)
पद 2: \( \text{NOCl}_2 + \text{NO} \rightarrow 2\text{NOCl} \)
संपूर्ण अभिक्रिया: (योग करने पर) \( 2\text{NO} + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{NOCl} \)
अभिक्रिया मध्यस्थ: \( \text{NOCl}_2 \) (यह पहले पद में बनता है और दूसरे पद में उपभोग होता है)।

प्र. २५. 300 K पर इथेन गैस के निर्माण के लिए \(\Delta\)H यह – 84.4 kJ है। अभिक्रिया के लिए \(\Delta\)U की गणना कीजिए।

इथेन निर्माण की अभिक्रिया:
$$ 2\text{C(s)} + 3\text{H}_2(g) \rightarrow \text{C}_2\text{H}_6(g) $$ \( \Delta n_g \) की गणना:
\( \Delta n_g = (\text{गैसीय उत्पाद}) - (\text{गैसीय अभिकारक}) \)
\( \Delta n_g = 1 - 3 = -2 \)

सूत्र: \( \Delta H = \Delta U + \Delta n_g RT \)
दिया गया है: \( \Delta H = -84.4 \text{ kJ} \), \( R = 8.314 \times 10^{-3} \text{ kJ K}^{-1}\text{mol}^{-1} \), \( T = 300 \text{ K} \)।

$$ -84.4 = \Delta U + (-2 \times 8.314 \times 10^{-3} \times 300) $$ $$ -84.4 = \Delta U - (2 \times 2.4942) $$ $$ -84.4 = \Delta U - 4.9884 $$ $$ \Delta U = -84.4 + 4.9884 $$ $$ \Delta U = -79.4116 \text{ kJ} $$ $$ \Delta U \approx -79.41 \text{ kJ} $$

प्र. २६. अंतरआण्विक (intermolecular) बल के आधार पर निर्मित बहुलकों के प्रकार का उल्लेख कीजिए। कम घनत्व पॉलीएथीलीन (polyethylene) के कोई दो उपयोग लिखिए।

अंतरआण्विक बलों के आधार पर बहुलकों के प्रकार:
1. इलास्टोमर्स (सबसे कमजोर बल)।
2. रेशे (Fibers) (मजबूत हाइड्रोजन बंध)।
3. थर्मोप्लास्टिक (मध्यम बल)।
4. थर्मोसेटिंग (दृढ़ क्रॉस-लिंक्स)।

कम घनत्व पॉलीएथीलीन (LDPE) के उपयोग:
1. लचीले पाइप और स्क्वीज़ बोतलें बनाने में।
2. बिजली के तारों और केबलों के इंसुलेशन के रूप में।
3. पैकेजिंग फिल्म और प्लास्टिक की थैलियां बनाने में।

विभाग - ड (SECTION - D)

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [१२]

प्र. २७. (अ) 27 g/mol मोलर द्रव्यमान का एक तत्त्व 405 pm किनारी लंबाई (edge length) की घनीय मात्रक कोष्ठिका (cubic unit cell) तैयार करता है। यदि क्रिस्टल का घनत्व 2.7 g cm\(^{-3}\) हो तो इकाई (मात्रक) कोष्ठिका (unit cell) का प्रकार पहचानिए। (ब) द्विअंगी विलयन (binary solution) जिसमें अवाष्पशील विलेय पाया जाता है, के लिए राउल्ट नियम का समीकरण स्थापित कीजिए।

(अ) इकाई कोष्ठिका का प्रकार:
दिया गया है: \( M = 27 \text{ g/mol} \), \( a = 405 \text{ pm} = 4.05 \times 10^{-8} \text{ cm} \), \( \rho = 2.7 \text{ g/cm}^3 \)।
सूत्र: \( \rho = \frac{Z \cdot M}{a^3 \cdot N_A} \)
$$ Z = \frac{\rho \cdot a^3 \cdot N_A}{M} $$ $$ a^3 = (4.05 \times 10^{-8})^3 \approx 66.4 \times 10^{-24} \text{ cm}^3 $$ $$ Z = \frac{2.7 \times 66.4 \times 10^{-24} \times 6.022 \times 10^{23}}{27} $$ $$ Z = \frac{2.7}{27} \times (66.4 \times 0.6022) $$ $$ Z = 0.1 \times 40 \approx 4 $$ चूँकि \( Z = 4 \) है, इसलिए इकाई कोष्ठिका फलक केंद्रित घनीय (Face Centered Cubic - FCC) है।

(ब) राउल्ट नियम का व्युत्पन्न:
राउल्ट के नियम के अनुसार, विलयन में विलायक का वाष्प दाब, शुद्ध विलायक के वाष्प दाब और विलयन में उसके मोल-अंश के गुणनफल के बराबर होता है।
$$ P_1 = P_1^0 x_1 $$ द्विअंगी विलयन के लिए, \( x_1 + x_2 = 1 \Rightarrow x_1 = 1 - x_2 \)।
समीकरण में \( x_1 \) का मान रखने पर: $$ P_1 = P_1^0 (1 - x_2) $$ $$ P_1 = P_1^0 - P_1^0 x_2 $$ $$ P_1^0 x_2 = P_1^0 - P_1 $$ $$ x_2 = \frac{P_1^0 - P_1}{P_1^0} $$ यह समीकरण वाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन और विलेय के मोल-अंश के बीच संबंध दर्शाता है।

प्र. २८. (अ) निम्नलिखित उदाहरणों में स्पष्ट कीजिए कि एन्ट्रापी परिवर्तन धनात्मक है या ऋणात्मक है : (i) बर्फ का गलन (melting of ice) (ii) द्रव का वाष्पीकरण (vaporisation of a liquid) (ब) समआयन प्रभाव (common ion effect) उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

(अ) एन्ट्रापी परिवर्तन:
(i) बर्फ का गलन: धनात्मक (\( \Delta S > 0 \))। ठोस से द्रव बनने पर अव्यवस्था बढ़ती है।
(ii) द्रव का वाष्पीकरण: धनात्मक (\( \Delta S > 0 \))। द्रव से गैस बनने पर अव्यवस्था अत्यधिक बढ़ती है।

(ब) समआयन प्रभाव:
किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के वियोजन को एक प्रबल विद्युत अपघट्य (जिसमें एक समान आयन हो) मिलाने पर दबाने या कम करने की प्रक्रिया को समआयन प्रभाव कहते हैं।
उदाहरण: एसिटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)) का आयनन:
$$ \text{CH}_3\text{COOH} \rightleftharpoons \text{CH}_3\text{COO}^- + \text{H}^+ $$ यदि इसमें सोडियम एसीटेट (\( \text{CH}_3\text{COONa} \)) मिलाया जाए, जो एक प्रबल विद्युत अपघट्य है: $$ \text{CH}_3\text{COONa} \rightarrow \text{CH}_3\text{COO}^- + \text{Na}^+ $$ विलयन में एसीटेट आयनों (\( \text{CH}_3\text{COO}^- \)) की सांद्रता बढ़ जाती है। ले-शातैलिए के सिद्धांत के अनुसार, साम्य बाईं ओर खिसक जाता है और एसिटिक अम्ल का आयनन कम हो जाता है।

प्र. २९. सीसा संचायक सेल (lead accumulator cell) का स्वच्छ व नामांकित चित्र बनाइए। सेल के निरावेशन (discharging) के समय कैथोड एवं एनोड पर होने वाली संपूर्ण अभिक्रियाएँ लिखिए।
[लेड एक्युमुलेटर का चित्र]
एनोड: Pb प्लेटें
कैथोड: PbO\(_2\) प्लेटें
विद्युत अपघट्य: तनु H\(_2\)SO\(_4\) (38%)

निरावेशन (Discharging) अभिक्रियाएँ:
एनोड पर (ऑक्सीकरण):
$$ \text{Pb}(s) + \text{SO}_4^{2-}(aq) \rightarrow \text{PbSO}_4(s) + 2e^- $$ कैथोड पर (अपचयन):
$$ \text{PbO}_2(s) + 4\text{H}^+(aq) + \text{SO}_4^{2-}(aq) + 2e^- \rightarrow \text{PbSO}_4(s) + 2\text{H}_2\text{O}(l) $$ संपूर्ण सेल अभिक्रिया:
$$ \text{Pb}(s) + \text{PbO}_2(s) + 2\text{H}_2\text{SO}_4(aq) \rightarrow 2\text{PbSO}_4(s) + 2\text{H}_2\text{O}(l) $$

प्र. ३०. (अ) इकाई कोष्ठिका (unit cell) की परिभाषा लिखिए। एफ-सेंटर (F-centre) के निर्माण के फलस्वरूप NaCl क्रिस्टल द्वारा कौन सा रंग प्रदर्शित होता है? (ब) 17 ग्रुप तत्त्वों में फ्लोरिन असामान्य व्यवहार क्यों दर्शाता है?

(अ)
इकाई कोष्ठिका (Unit Cell): क्रिस्टल जालक की वह सबसे छोटी इकाई जो बार-बार पुनरावृत्त होकर संपूर्ण क्रिस्टल का निर्माण करती है, इकाई कोष्ठिका कहलाती है।
NaCl का रंग: पीला (Yellow)। (F-सेंटर के कारण)।

(ब) फ्लोरिन का असामान्य व्यवहार:
फ्लोरिन अन्य हैलोजन से भिन्न व्यवहार करता है, इसके कारण हैं:

  • सबसे छोटा परमाणु आकार।
  • सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मकता।
  • कम F-F बंध वियोजन एन्थैल्पी।
  • संयोजी कोश में d-कक्षकों की अनुपस्थिति।
परिणामस्वरूप: यह केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है और हाइड्रोजन बंध बनाता है।

प्र. ३१. (अ) SN\(^2\) क्रियाविधि (mechanism) की मुख्य विशेषताएँ लिखिए। (ब) निम्नलिखित अभिकर्मकों की ब्रोमोमिथेन पर क्या क्रिया होती है : (i) ब्रोमोबेंजीन (ii) मरक्यूरस फ्लुअराइड

(अ) SN\(^2\) क्रियाविधि की विशेषताएँ:
1. यह एक पदीय (Single step) अभिक्रिया है। बंध टूटना और नया बंध बनना एक साथ होता है।
2. यह द्वि-आण्विक (Bimolecular) अभिक्रिया है (दर \(\propto [\text{Substrate}][\text{Nucleophile}]\))।
3. न्यूक्लियोफाइल पीछे की ओर से (Backside attack) आक्रमण करता है।
4. इसमें संक्रमण अवस्था (Transition state) बनती है।
5. इसमें विन्यास का प्रतिलोमन (Walden Inversion) होता है।
6. क्रियाशीलता क्रम: मिथिल > प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक।

(ब) ब्रोमोमिथेन (\( \text{CH}_3\text{Br} \)) पर क्रिया:
(i) ब्रोमोबेंजीन (Wurtz-Fittig अभिक्रिया):
ब्रोमोमिथेन और ब्रोमोबेंजीन की सोडियम धातु के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में क्रिया कराने पर टोल्यून (Toluene) बनता है। $$ \text{CH}_3\text{Br} + \text{C}_6\text{H}_5\text{Br} + 2\text{Na} \xrightarrow{\text{dry ether}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_3 + 2\text{NaBr} $$ (ii) मरक्यूरस फ्लुअराइड (Swarts अभिक्रिया):
हैलोजन विनिमय होकर फ्लोरोमिथेन बनता है। $$ 2\text{CH}_3\text{Br} + \text{Hg}_2\text{F}_2 \rightarrow 2\text{CH}_3\text{F} + \text{Hg}_2\text{Br}_2 $$