रसायनशास्त्र (Chemistry 55) Board Paper Solution
प्रश्न पत्र का विवरण (Paper Details)
विषय: रसायनशास्त्र (Chemistry 55)
वर्ष: 2025
अधिकतम अंक: 70
समय: 3 घंटे
दी गई जानकारी (Given Data):
- \( R = 8.314 \text{ J/K/mol} \)
- Na का परमाणु भार = 23
- जल का \( K_f = 1.86 \text{ K kg mol}^{-1} \)
- \( 1F = 96500 \text{ C} \)
- \( N_A = 6.022 \times 10^{23} \)
(i) ______ में शॉट्की दोष (Schottky defect) नहीं देखा जाता है।
स्पष्टीकरण: शॉट्की दोष उन आयनिक ठोसों में पाया जाता है जिनमें धनायन और ऋणायन का आकार लगभग समान होता है (जैसे NaCl, KCl, AgBr)। NiO में धातु न्यूनता दोष (Metal deficiency defect) पाया जाता है।
(ii) यदि जल का \( K_f \) 1.86 K kg mol\(^{-1}\) है तो यूरिया के 0.1m जलीय विलयन का हिमांक (freezing point) कितना होगा?
स्पष्टीकरण: $$ \Delta T_f = K_f \times m \times i $$ यूरिया एक विद्युत अनपघट्य (non-electrolyte) है, इसलिए \( i = 1 \)। $$ \Delta T_f = 1.86 \times 0.1 \times 1 = 0.186 \text{ K} $$ विलयन का हिमांक: $$ T_f = T_f^0 - \Delta T_f = 0^\circ\text{C} - 0.186^\circ\text{C} = -0.186^\circ\text{C} $$
(iii) ओज़ोन परत का क्षरण (depletion) ______ द्वारा होता है।
स्पष्टीकरण: नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) ओज़ोन के साथ अभिक्रिया करके उसका क्षरण करता है: \( \text{NO} + \text{O}_3 \rightarrow \text{NO}_2 + \text{O}_2 \)।
(iv) जब अतिरिक्त AgNO\(_3\) को संकुल (complex) में मिलाते हैं तो एक मोल AgCl उपजता (precipitate) है। संकुल का सूत्र होगा?
स्पष्टीकरण: 1 मोल AgCl के अवक्षेपण का अर्थ है कि समन्वय मंडल (coordination sphere) के बाहर केवल 1 क्लोराइड आयन उपस्थित है।
(v) 4 मोल के सल्फर डाइऑक्साइड से सल्फर ट्राइऑक्साइड के ऑक्सीकरण (oxidation) के लिए \( \Delta n_g \) का मान ______ है?
स्पष्टीकरण: अभिक्रिया: \( 4\text{SO}_2(g) + 2\text{O}_2(g) \rightarrow 4\text{SO}_3(g) \) $$ \Delta n_g = (\text{गैसीय उत्पादों के मोल}) - (\text{गैसीय अभिकारकों के मोल}) $$ $$ \Delta n_g = 4 - (4 + 2) = 4 - 6 = -2 $$
(vi) निम्नलिखित में से एक आयामी (one dimensional) नैनो संरचना है?
स्पष्टीकरण: नैनोट्यूब्स और नैनोवायर्स को एक आयामी (1D) नैनो संरचनाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
(vii) विद्युत अपघट्य की सांद्रता एवं वियोजनांश (degree of dissociation) में संबंध कौन सा सूत्र दर्शाता है?
स्पष्टीकरण: ओस्टवाल्ड के तनुता नियम (Ostwald's dilution law) के अनुसार, \( K_a = \alpha^2 c \), अतः \( \alpha = \sqrt{\frac{K_a}{c}} \)।
(viii) निम्नलिखित में से अधिकतम अम्लीय (acidic) यौगिक है?
स्पष्टीकरण:
(अ) m-Hydroxybenzoic acid: -OH समूह मेटा स्थिति पर केवल -I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन आकर्षी) डालता है, जिससे अम्लता बढ़ती है।
(क) बेन्जोइक अम्ल: मानक।
(ड) p-Methoxybenzoic acid: -OCH\(_3\) समूह +R प्रभाव (इलेक्ट्रॉन दाता) दिखाता है, जिससे अम्लता कम होती है।
अतः, (अ) सबसे अधिक अम्लीय है।
(ix) विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता को ज्ञात करने के लिए ______ सूत्र का उपयोग होता है।
(x) निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीयक अमीन है?
स्पष्टीकरण: डायफिनाइलअमीन का सूत्र \( (C_6H_5)_2NH \) है, जिसमें \( >NH \) समूह दो कार्बन समूहों से जुड़ा होता है, अतः यह एक द्वितीयक अमीन है।
HSC Chemistry
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(i) N, N-डायमेथिल एथेनामीिन का संरचना सूत्र लिखिए।
$$ \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{N}(\text{CH}_3)_2 $$
(ii) क्लेमेंसन अपचयन (Clemmensen’s reduction) में कार्बोनिल ग्रुप के अपचयन के लिए उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मक कौन-से हैं? लिखिए।
जिंक अमलगम (Zn-Hg) और सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (conc. HCl)।
(iii) आयसोप्रीन (isoprene) का आई.यू.पी.ए.सी.(IUPAC) नाम लिखिए।
2-मेथिलब्यूटा-1,3-डाईन (2-Methylbuta-1,3-diene)।
(iv) A \(\to\) Product के लिए दर नियम समीकरण, rate = k[A]\(^x\) है। यदि x < 0 तो ‘A’ की सांद्रता में वृद्धि (increase) करने पर अभिक्रिया की दर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
चूँकि अभिक्रिया की कोटि \( x \) ऋणात्मक है, अभिक्रिया की दर ‘A’ की सांद्रता के व्युत्क्रमानुपाती है। इसलिए, यदि ‘A’ की सांद्रता बढ़ाई जाती है, तो अभिक्रिया की दर घट जाएगी।
(v) KBr का जलीय विलयन जिसका हिमांक –3.72°C है, इसकी मोललता क्या होगी? [ जल का \( K_f \) = 1.86 K kg mol\(^{-1}\) है ]
KBr एक प्रबल विद्युत अपघट्य है, जो \( \text{K}^+ \) और \( \text{Br}^- \) में वियोजित होता है, अतः वांट हॉफ गुणांक \( i = 2 \)।
$$ \Delta T_f = 0 - (-3.72) = 3.72^\circ \text{C} $$
$$ \Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m $$
$$ 3.72 = 2 \times 1.86 \times m $$
$$ 3.72 = 3.72 \times m $$
$$ m = 1 \text{ mol/kg (या 1 molal)} $$
(vi) जब अतिरिक्त अमोनिया की क्रिया क्लोरीन के साथ होती है, तो उसका संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
जब अमोनिया अधिक मात्रा में हो:
$$ 8\text{NH}_3 + 3\text{Cl}_2 \rightarrow 6\text{NH}_4\text{Cl} + \text{N}_2 $$
(vii) संकुल रचना के निर्माण के दौरान, EDTA में उपस्थित दाता (donor) परमाणुओं की संख्या लिखिए।
EDTA एक षटदंती (hexadentate) लिगेंड है। इसमें 6 दाता परमाणु होते हैं (4 ऑक्सीजन परमाणु और 2 नाइट्रोजन परमाणु)।
(viii) ब्रास (brass) मिश्रधातु में धातु तत्त्वों के नाम लिखिए।
तांबा (Copper - Cu) और जस्ता (Zinc - Zn)।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [१६]
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित दर नियम है:
$$ k = \frac{2.303}{t} \log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_t} $$
जहाँ \( [A]_0 \) प्रारंभिक सांद्रता है और \( [A]_t \), \( t \) समय पर सांद्रता है।
अर्द्ध जीवन (\( t_{1/2} \)) पर:
अभिकारक की सांद्रता प्रारंभिक सांद्रता की आधी हो जाती है।
$$ [A]_t = \frac{[A]_0}{2} $$
ये मान समीकरण में रखने पर:
$$ k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log_{10} \frac{[A]_0}{[A]_0 / 2} $$
$$ k = \frac{2.303}{t_{1/2}} \log_{10} (2) $$
चूँकि \( \log_{10}(2) = 0.3010 \):
$$ k = \frac{2.303 \times 0.3010}{t_{1/2}} $$
$$ k = \frac{0.693}{t_{1/2}} $$
$$ \therefore t_{1/2} = \frac{0.693}{k} $$
यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्द्ध जीवन और दर स्थिरांक के बीच संबंध है।
(अ) हेनरी का नियम (Henry's Law):
स्थिर तापमान पर, किसी द्रव में गैस की विलेयता विलयन की सतह पर गैस के आंशिक दाब के सीधे समानुपाती होती है।
$$ S = K_H P $$
जहाँ \( S \) विलेयता है, \( P \) दाब है, और \( K_H \) हेनरी स्थिरांक है।
(ब) परासरण दाब (Osmotic Pressure):
वह अतिरिक्त द्रवस्थैतिक दाब जो विलायक के अणुओं को अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन में प्रवेश करने से रोकने के लिए विलयन पर लगाया जाता है, परासरण दाब कहलाता है।
| लेन्थेनॉइड (Lanthanoids) | एक्टिनॉइड (Actinoids) |
|---|---|
| अंतिम इलेक्ट्रॉन 4f कक्षक में प्रवेश करता है। | अंतिम इलेक्ट्रॉन 5f कक्षक में प्रवेश करता है। |
| 4f कक्षकों की बंधन ऊर्जा अधिक होती है। | 5f कक्षकों की बंधन ऊर्जा कम होती है। |
| ये सीमित ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+2, +3, +4) दर्शाते हैं। +3 सबसे सामान्य है। | ये विविध ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+3, +4, +5, +6, +7) दर्शाते हैं। |
| ये रेडियोधर्मी नहीं होते (प्रोमिथियम को छोड़कर)। | सभी एक्टिनॉइड रेडियोधर्मी होते हैं। |
(i) परमाणुता (Atomicity): ऑक्सीजन एक द्विपरमाणुक (\( \text{O}_2 \)) अणु है, जबकि समूह के अन्य तत्व बहुपरमाणुक (जैसे \( \text{S}_8 \)) होते हैं।
(ii) ऑक्सीकरण अवस्था: ऑक्सीजन सामान्यतः -2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। d-कक्षक की अनुपस्थिति के कारण यह उच्च धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+4, +6) नहीं दर्शाता।
(iii) चुंबकीय गुणधर्म: आण्विक ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) अनुचुंबकीय (paramagnetic) है, जबकि अन्य तत्व प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होते हैं।
(iv) हाइड्राइड्स की प्रकृति: हाइड्रोजन बंध के कारण जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) सामान्य ताप पर द्रव है, जबकि अन्य हाइड्राइड्स (जैसे \( \text{H}_2\text{S} \)) गैसें हैं।
(i) एनीसोल पर ब्रोमीनीकरण:
एसीटीक अम्ल की उपस्थिति में ब्रोमीन, एनीसोल के साथ अभिक्रिया करके पैरा-ब्रोमोएनीसोल (मुख्य उत्पाद) और ऑर्थो-ब्रोमोएनीसोल (अल्प उत्पाद) बनाता है।
$$ \text{Anisole} + \text{Br}_2 \xrightarrow{\text{CH}_3\text{COOH}} \text{p-Bromoanisole} + \text{o-Bromoanisole} $$
(ii) सोडियम ऐसीटेट पर सोडा-लाइम की क्रिया:
सोडियम ऐसीटेट को सोडा-लाइम (NaOH और CaO का मिश्रण) के साथ गर्म करने पर विकारार्बोक्सिलीकरण (decarboxylation) होता है और मीथेन गैस बनती है।
$$ \text{CH}_3\text{COONa} + \text{NaOH} \xrightarrow[\Delta]{\text{CaO}} \text{CH}_4 \uparrow + \text{Na}_2\text{CO}_3 $$
दिया गया है:
\( V_1 = 8 \text{ dm}^3 \)
\( V_2 = 4 \text{ dm}^3 \)
\( P_{ext} = 43 \text{ bar} \)
सूत्र: \( W = -P_{ext} (V_2 - V_1) \)
गणना:
$$ W = -43 \text{ bar} \times (4 \text{ dm}^3 - 8 \text{ dm}^3) $$
$$ W = -43 \times (-4) $$
$$ W = +172 \text{ bar dm}^3 $$
kJ में परिवर्तन:
\( 1 \text{ bar dm}^3 = 100 \text{ J} = 0.1 \text{ kJ} \)
$$ W = 172 \times 0.1 \text{ kJ} = 17.2 \text{ kJ} $$
किया गया कार्य 17.2 kJ है।
आयनन समावयवता (Ionization Isomerism): यह समावयवता तब उत्पन्न होती है जब संकुल लवण में प्रति-आयन (counter ion) स्वयं एक लिगेंड के रूप में कार्य कर सकता है और संकुल के भीतर लिगेंड को विस्थापित कर सकता है। ये समावयवी विलयन में भिन्न-भिन्न आयन देते हैं।
उदाहरण:
1. \( [Co(NH_3)_5SO_4]Br \) (रंग: लाल-बैंगनी)
यह AgNO\(_3\) के साथ AgBr का अवक्षेप देता है (Br\(^-\) बाहर है)।
2. \( [Co(NH_3)_5Br]SO_4 \) (रंग: लाल)
यह BaCl\(_2\) के साथ BaSO\(_4\) का अवक्षेप देता है (SO\(_4^{2-}\) बाहर है)।
प्रयोगशाला में, सुक्रोज (चीनी) के अल्कोहलिक विलयन को तनु HCl या H\(_2\)SO\(_4\) के साथ उबालने पर इसका जल-अपघटन (hydrolysis) होता है और ग्लूकोज व फ्रुक्टोज का सममोलर मिश्रण प्राप्त होता है।
अभिक्रिया: \( \text{Na}^+ + e^- \rightarrow \text{Na} \)
1 मोल इलेक्ट्रॉन (1 फैराडे = 96500 C) 1 मोल Na निक्षेपित करता है।
Na का मोलर द्रव्यमान = 23 g/mol।
23 g Na उत्पन्न करने के लिए आवश्यक आवेश = 96500 C।
अतः, 1 g Na उत्पन्न करने के लिए:
$$ Q = \frac{96500}{23} \text{ C} $$
$$ Q \approx 4195.65 \text{ C} $$
जो अल्कोहल सामान्य परिस्थितियों में ऑक्सीकरण के प्रति प्रतिरोधी होता है, वह तृतीयक अल्कोहल (Tertiary alcohol) होता है।
C\(_4\)H\(_\text{10}\)O सूत्र के लिए तृतीयक अल्कोहल 'tert-ब्यूटिल अल्कोहल' है।
संरचना सूत्र:
$$ (\text{CH}_3)_3\text{C-OH} $$
IUPAC नाम: 2-Methylpropan-2-ol (2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल)
\( \text{CH}_3 - \text{CH} = \text{CH}_2 \xrightarrow[\text{पैरॉक्साईड}]{\text{HBr}} \text{अ} \xrightarrow[\text{-KBr}]{\text{अल्कोहलिक KCN}} \text{ब} \)
चरण 1: प्रोपीन की HBr के साथ पैरॉक्साईड की उपस्थिति में अभिक्रिया एंटी-मार्कोनिकॉफ नियम का पालन करती है।
अ = 1-Bromopropane (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \))।
चरण 2: अल्कोहलिक KCN के साथ अभिक्रिया से ब्रोमीन साइनाइड समूह द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है।
ब = Butanenitrile (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CN} \))।
पूर्ण अभिक्रिया:
\( \text{CH}_3 - \text{CH} = \text{CH}_2 \xrightarrow[\text{Peroxide}]{\text{HBr}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \xrightarrow{\text{alc. KCN}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CN} \)
(i) रोजनमंड अभिक्रिया (एसीटैल्डिहाइड):
एसिटिल क्लोराइड का Pd/BaSO\(_4\) की उपस्थिति में हाइड्रोजन द्वारा अपचयन करने पर एसीटैल्डिहाइड प्राप्त होता है।
$$ \text{CH}_3\text{COCl} + \text{H}_2 \xrightarrow{\text{Pd/BaSO}_4} \text{CH}_3\text{CHO} + \text{HCl} $$
(ii) गॉटरमन-कोच अभिक्रिया (बेंजल्डिहाइड):
निर्जल AlCl\(_3\) और CuCl की उपस्थिति में बेंजीन की कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और HCl के साथ क्रिया कराने पर बेंजल्डिहाइड बनता है।
$$ \text{C}_6\text{H}_6 + \text{CO} + \text{HCl} \xrightarrow{\text{Anhyd. AlCl}_3 / \text{CuCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CHO} + \text{HCl} $$
निम्नलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [२४]
3d श्रेणी का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
\( [\text{Ar}] 3d^{1-10} 4s^{1-2} \)
संरचना:
1. सल्फ्यूरिक अम्ल (H\(_2\)SO\(_4\)): S केंद्रीय परमाणु है, जिससे दो S=O बंध और दो S-OH बंध जुड़े होते हैं (चतुष्फलकीय)।
2. थायोसल्फ्यूरिक अम्ल (H\(_2\)S\(_2\)O\(_3\)): सल्फ्यूरिक अम्ल के समान, लेकिन एक द्वि-बंधित ऑक्सीजन परमाणु को सल्फर परमाणु से प्रतिस्थापित किया जाता है (S=S बंध)।
संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair): अम्ल और क्षार का ऐसा युग्म जो केवल एक प्रोटॉन (H\(^+\)) के अंतर से भिन्न होता है, संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म कहलाता है।
गणना:
दिया गया है: \( [\text{OH}^-] = 2 \times 10^{-4} \text{ M} \)
$$ \text{pOH} = -\log_{10} [\text{OH}^-] $$
$$ \text{pOH} = -\log_{10} (2 \times 10^{-4}) $$
$$ \text{pOH} = 4 - \log_{10} 2 = 4 - 0.3010 = 3.699 $$
हम जानते हैं, \( \text{pH} + \text{pOH} = 14 \)
$$ \text{pH} = 14 - 3.699 $$
$$ \text{pH} = 10.301 $$
परमाणु अर्थव्यवस्था (Atom Economy): यह रासायनिक अभिक्रिया की दक्षता का माप है, जिसे वांछित उत्पाद के आणविक भार और सभी अभिकारकों के कुल आणविक भार के अनुपात (प्रतिशत में) के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका उद्देश्य अंतिम उत्पाद में सभी अभिकारक परमाणुओं को शामिल करना है।
नैनो सामग्री के उपयोग:
1. चिकित्सा: लक्षित दवा वितरण (Targeted drug delivery) के लिए नैनोकणों (जैसे गोल्ड नैनोकण) का उपयोग किया जाता है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं होता।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स: क्वांटम डॉट्स और नैनोवायर्स का उपयोग करके छोटे, तेज और अधिक कुशल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और डिस्प्ले बनाए जाते हैं।
पेप्टाइड बंध (Peptide Bond): प्रोटीन में, एक अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिल समूह (-COOH) और दूसरे अमीनो अम्ल के अमीनो समूह (-NH\(_2\)) के बीच बने एमाइड लिंकेज (-CO-NH-) को पेप्टाइड बंध कहते हैं।
निर्माण: यह एक संघनन (condensation) अभिक्रिया द्वारा बनता है जिसमें जल का एक अणु निकलता है।
एल्किल हैलाइड से नाइट्रोएल्केन अभिकर्मक:
नाम: सिल्वर नाइट्राइट
सूत्र: AgNO\(_2\)
(अ) फिनॉल की अभिक्रियाएं:
(i) नाइट्रेटिंग मिश्रण (सांद्र HNO\(_3\) + सांद्र H\(_2\)SO\(_4\)): फिनॉल का नाइट्रीकरण होकर 2,4,6-ट्राईनाइट्रोफिनॉल (पिक्रिक अम्ल) बनता है।
(ii) जिंक धूल: फिनॉल का अपचयन होकर बेंजीन बनता है। \( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{Zn} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_6 + \text{ZnO} \).
(ब) PCl\(_5\) की एथिल मेथिल ईथर पर क्रिया:
ईथर का C-O बंध टूटकर एल्किल क्लोराइड बनते हैं।
$$ \text{CH}_3-\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 + \text{PCl}_5 \xrightarrow{\Delta} \text{CH}_3\text{Cl} + \text{C}_2\text{H}_5\text{Cl} + \text{POCl}_3 $$
उत्पाद: मेथिल क्लोराइड, एथिल क्लोराइड और फॉस्फोरिल क्लोराइड।
(अ) EAN (Effective Atomic Number) सूत्र:
$$ \text{EAN} = Z - X + Y $$
जहाँ \( Z \) = धातु का परमाणु क्रमांक, \( X \) = ऑक्सीकरण अवस्था (खोए गए इलेक्ट्रॉन), \( Y \) = लिगेंड्स द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉन (2 \(\times\) समन्वय संख्या)।
(ब) [Co(NH\(_3\))\(_6\)]\(^{3+}\):
कोबाल्ट (Z=27), ऑक्सीकरण अवस्था = +3।
Co\(^{3+}\) विन्यास: [Ar] \( 3d^6 \)।
NH\(_3\) प्रबल लिगेंड है, जिससे 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है।
(i) संकरण: \( d^2sp^3 \) (आंतरिक कक्षक संकुल)।
(ii) चुंबकीय गुणधर्म: सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं, अतः यह प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) है।
(अ) चुंबकीय आघूर्ण गणना:
M = 26 (आयरन - Fe)। M\(^{2+}\) मतलब Fe\(^{2+}\)।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] \( 3d^6 \)।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (\( n \)) = 4।
$$ \mu = \sqrt{n(n+2)} \text{ B.M.} $$
$$ \mu = \sqrt{4(4+2)} = \sqrt{24} \approx 4.90 \text{ B.M.} $$
(ब) गैडोलिनियम (Gd, Z=64) का विन्यास:
$$ [\text{Xe}] 4f^7 5d^1 6s^2 $$
(नोट: 5d में 1 इलेक्ट्रॉन जाता है क्योंकि अर्ध-पूरित f-कक्षक स्थिर होता है)।
(अ) वात्या भट्टी में अपचायक:
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कोक (कार्बन, C)।
(ब) रासायनिक समीकरण:
(i) कार्बिलएमीन अभिक्रिया (एथीलएमीन):
$$ \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH (alc)} \xrightarrow{\Delta} \text{C}_2\text{H}_5\text{NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} $$
(उत्पाद: एथिल आइसोसाइनाइड)
(ii) हॉफमेन ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (एसीटामाइड):
$$ \text{CH}_3\text{CONH}_2 + \text{Br}_2 + 4\text{KOH} \rightarrow \text{CH}_3\text{NH}_2 + \text{K}_2\text{CO}_3 + 2\text{KBr} + 2\text{H}_2\text{O} $$
(उत्पाद: मेथिलएमीन)
(अ) कैनीज़ारो अभिक्रिया:
जिन एल्डिहाइड में \(\alpha\)-हाइड्रोजन नहीं होता (जैसे बेंजल्डिहाइड), वे सांद्र क्षार (NaOH/KOH) के साथ गर्म करने पर स्वतः ऑक्सीकरण और अपचयन (असमानुपातन) दर्शाते हैं।
$$ 2\text{C}_6\text{H}_5\text{CHO} + \text{conc. NaOH} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{OH} + \text{C}_6\text{H}_5\text{COONa} $$
(उत्पाद: बेंजिल अल्कोहल और सोडियम बेंजोएट)।
(ब) साइक्लोहेक्जीन से एडिपिक अम्ल:
साइक्लोहेक्जीन का अम्लीय KMnO\(_4\) के साथ ऑक्सीकरण करने पर वलय टूट जाता है और एडिपिक अम्ल बनता है।
$$ \text{Cyclohexene} + [O] \xrightarrow{\text{KMnO}_4, \text{H}_2\text{SO}_4, \Delta} \text{HOOC}-(\text{CH}_2)_4-\text{COOH} $$
शून्य कोटि अभिक्रिया: वह अभिक्रिया जिसमें अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करती है, शून्य कोटि की अभिक्रिया कहलाती है।
अभिक्रिया विश्लेषण:
पद 1: \( \text{NO} + \text{Cl}_2 \rightarrow \text{NOCl}_2 \)
पद 2: \( \text{NOCl}_2 + \text{NO} \rightarrow 2\text{NOCl} \)
संपूर्ण अभिक्रिया: (योग करने पर) \( 2\text{NO} + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{NOCl} \)
अभिक्रिया मध्यस्थ: \( \text{NOCl}_2 \) (यह पहले पद में बनता है और दूसरे पद में उपभोग होता है)।
इथेन निर्माण की अभिक्रिया:
$$ 2\text{C(s)} + 3\text{H}_2(g) \rightarrow \text{C}_2\text{H}_6(g) $$
\( \Delta n_g \) की गणना:
\( \Delta n_g = (\text{गैसीय उत्पाद}) - (\text{गैसीय अभिकारक}) \)
\( \Delta n_g = 1 - 3 = -2 \)
सूत्र: \( \Delta H = \Delta U + \Delta n_g RT \)
दिया गया है: \( \Delta H = -84.4 \text{ kJ} \), \( R = 8.314 \times 10^{-3} \text{ kJ K}^{-1}\text{mol}^{-1} \), \( T = 300 \text{ K} \)।
$$ -84.4 = \Delta U + (-2 \times 8.314 \times 10^{-3} \times 300) $$
$$ -84.4 = \Delta U - (2 \times 2.4942) $$
$$ -84.4 = \Delta U - 4.9884 $$
$$ \Delta U = -84.4 + 4.9884 $$
$$ \Delta U = -79.4116 \text{ kJ} $$
$$ \Delta U \approx -79.41 \text{ kJ} $$
अंतरआण्विक बलों के आधार पर बहुलकों के प्रकार:
1. इलास्टोमर्स (सबसे कमजोर बल)।
2. रेशे (Fibers) (मजबूत हाइड्रोजन बंध)।
3. थर्मोप्लास्टिक (मध्यम बल)।
4. थर्मोसेटिंग (दृढ़ क्रॉस-लिंक्स)।
कम घनत्व पॉलीएथीलीन (LDPE) के उपयोग:
1. लचीले पाइप और स्क्वीज़ बोतलें बनाने में।
2. बिजली के तारों और केबलों के इंसुलेशन के रूप में।
3. पैकेजिंग फिल्म और प्लास्टिक की थैलियां बनाने में।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [१२]
(अ) इकाई कोष्ठिका का प्रकार:
दिया गया है: \( M = 27 \text{ g/mol} \), \( a = 405 \text{ pm} = 4.05 \times 10^{-8} \text{ cm} \), \( \rho = 2.7 \text{ g/cm}^3 \)।
सूत्र: \( \rho = \frac{Z \cdot M}{a^3 \cdot N_A} \)
$$ Z = \frac{\rho \cdot a^3 \cdot N_A}{M} $$
$$ a^3 = (4.05 \times 10^{-8})^3 \approx 66.4 \times 10^{-24} \text{ cm}^3 $$
$$ Z = \frac{2.7 \times 66.4 \times 10^{-24} \times 6.022 \times 10^{23}}{27} $$
$$ Z = \frac{2.7}{27} \times (66.4 \times 0.6022) $$
$$ Z = 0.1 \times 40 \approx 4 $$
चूँकि \( Z = 4 \) है, इसलिए इकाई कोष्ठिका फलक केंद्रित घनीय (Face Centered Cubic - FCC) है।
(ब) राउल्ट नियम का व्युत्पन्न:
राउल्ट के नियम के अनुसार, विलयन में विलायक का वाष्प दाब, शुद्ध विलायक के वाष्प दाब और विलयन में उसके मोल-अंश के गुणनफल के बराबर होता है।
$$ P_1 = P_1^0 x_1 $$
द्विअंगी विलयन के लिए, \( x_1 + x_2 = 1 \Rightarrow x_1 = 1 - x_2 \)।
समीकरण में \( x_1 \) का मान रखने पर:
$$ P_1 = P_1^0 (1 - x_2) $$
$$ P_1 = P_1^0 - P_1^0 x_2 $$
$$ P_1^0 x_2 = P_1^0 - P_1 $$
$$ x_2 = \frac{P_1^0 - P_1}{P_1^0} $$
यह समीकरण वाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन और विलेय के मोल-अंश के बीच संबंध दर्शाता है।
(अ) एन्ट्रापी परिवर्तन:
(i) बर्फ का गलन: धनात्मक (\( \Delta S > 0 \))। ठोस से द्रव बनने पर अव्यवस्था बढ़ती है।
(ii) द्रव का वाष्पीकरण: धनात्मक (\( \Delta S > 0 \))। द्रव से गैस बनने पर अव्यवस्था अत्यधिक बढ़ती है।
(ब) समआयन प्रभाव:
किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के वियोजन को एक प्रबल विद्युत अपघट्य (जिसमें एक समान आयन हो) मिलाने पर दबाने या कम करने की प्रक्रिया को समआयन प्रभाव कहते हैं।
उदाहरण: एसिटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)) का आयनन:
$$ \text{CH}_3\text{COOH} \rightleftharpoons \text{CH}_3\text{COO}^- + \text{H}^+ $$
यदि इसमें सोडियम एसीटेट (\( \text{CH}_3\text{COONa} \)) मिलाया जाए, जो एक प्रबल विद्युत अपघट्य है:
$$ \text{CH}_3\text{COONa} \rightarrow \text{CH}_3\text{COO}^- + \text{Na}^+ $$
विलयन में एसीटेट आयनों (\( \text{CH}_3\text{COO}^- \)) की सांद्रता बढ़ जाती है। ले-शातैलिए के सिद्धांत के अनुसार, साम्य बाईं ओर खिसक जाता है और एसिटिक अम्ल का आयनन कम हो जाता है।
एनोड: Pb प्लेटें
कैथोड: PbO\(_2\) प्लेटें
विद्युत अपघट्य: तनु H\(_2\)SO\(_4\) (38%)
निरावेशन (Discharging) अभिक्रियाएँ:
एनोड पर (ऑक्सीकरण):
$$ \text{Pb}(s) + \text{SO}_4^{2-}(aq) \rightarrow \text{PbSO}_4(s) + 2e^- $$
कैथोड पर (अपचयन):
$$ \text{PbO}_2(s) + 4\text{H}^+(aq) + \text{SO}_4^{2-}(aq) + 2e^- \rightarrow \text{PbSO}_4(s) + 2\text{H}_2\text{O}(l) $$
संपूर्ण सेल अभिक्रिया:
$$ \text{Pb}(s) + \text{PbO}_2(s) + 2\text{H}_2\text{SO}_4(aq) \rightarrow 2\text{PbSO}_4(s) + 2\text{H}_2\text{O}(l) $$
(अ)
इकाई कोष्ठिका (Unit Cell): क्रिस्टल जालक की वह सबसे छोटी इकाई जो बार-बार पुनरावृत्त होकर संपूर्ण क्रिस्टल का निर्माण करती है, इकाई कोष्ठिका कहलाती है।
NaCl का रंग: पीला (Yellow)। (F-सेंटर के कारण)।
(ब) फ्लोरिन का असामान्य व्यवहार:
फ्लोरिन अन्य हैलोजन से भिन्न व्यवहार करता है, इसके कारण हैं:
(अ) SN\(^2\) क्रियाविधि की विशेषताएँ:
1. यह एक पदीय (Single step) अभिक्रिया है। बंध टूटना और नया बंध बनना एक साथ होता है।
2. यह द्वि-आण्विक (Bimolecular) अभिक्रिया है (दर \(\propto [\text{Substrate}][\text{Nucleophile}]\))।
3. न्यूक्लियोफाइल पीछे की ओर से (Backside attack) आक्रमण करता है।
4. इसमें संक्रमण अवस्था (Transition state) बनती है।
5. इसमें विन्यास का प्रतिलोमन (Walden Inversion) होता है।
6. क्रियाशीलता क्रम: मिथिल > प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक।
(ब) ब्रोमोमिथेन (\( \text{CH}_3\text{Br} \)) पर क्रिया:
(i) ब्रोमोबेंजीन (Wurtz-Fittig अभिक्रिया):
ब्रोमोमिथेन और ब्रोमोबेंजीन की सोडियम धातु के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में क्रिया कराने पर टोल्यून (Toluene) बनता है।
$$ \text{CH}_3\text{Br} + \text{C}_6\text{H}_5\text{Br} + 2\text{Na} \xrightarrow{\text{dry ether}} \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_3 + 2\text{NaBr} $$
(ii) मरक्यूरस फ्लुअराइड (Swarts अभिक्रिया):
हैलोजन विनिमय होकर फ्लोरोमिथेन बनता है।
$$ 2\text{CH}_3\text{Br} + \text{Hg}_2\text{F}_2 \rightarrow 2\text{CH}_3\text{F} + \text{Hg}_2\text{Br}_2 $$